गिनती 19
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
गिनती अध्याय 19 में परमेश्वर मूसा और हारून को एक अनोखी विधि के बारे में बताते हैं। इस्राएलियों को एक लाल बछिया लानी थी, जो पूरी तरह निर्दोष हो, जिस पर कभी जूआ न रखा गया हो। याजक एलीआजर उसे छावनी के बाहर ले जाकर बलिदान करता, और उसका लहू मिलापवाले तम्बू की ओर सात बार छिड़कता। फिर पूरी बछिया, खाल, माँस, लहू और सब कुछ जला दी जाती। उस राख को इकट्ठा करके एक शुद्ध स्थान पर रखा जाता। यह राख बाद में काम आती।
यहाँ बात यह है कि मृत्यु से छूना इस्राएलियों को अशुद्ध बना देता था, चाहे कोई किसी के शव को छू ले, किसी डेरे में मृत्यु हो जाए, या कोई हड्डी या कब्र को छू ले। ऐसा व्यक्ति सात दिन तक अशुद्ध रहता। तीसरे और सातवें दिन उस राख को जल में मिलाकर, जूफा नाम के पौधे से उस व्यक्ति पर, उसके तंबू पर, और उसके बर्तनों पर छिड़का जाता। तब ही वह शुद्ध ठहरता। अगर कोई ऐसा नहीं करता, तो वह परमेश्वर के पवित्रस्थान को अशुद्ध करनेवाला ठहरता, और मंडली में से निकाला जा सकता था।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय पढ़ते समय शायद तुम्हें अजीब लगे। राख, जल, छिड़कना, यह सब आज हमारे जीवन से बहुत दूर लगता है। पर सोचो, इस्राएली एक ऐसी दुनिया में रहते थे जहाँ मृत्यु हर जगह मौजूद थी, और परमेश्वर उन्हें दिखाना चाहते थे कि मृत्यु सिर्फ एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह उस टूटन का चिन्ह है जो पाप के कारण दुनिया में आई। इसलिए मृत्यु से छूना अशुद्ध बनाता था, और अशुद्धता का मतलब था कि व्यक्ति परमेश्वर के करीब नहीं आ सकता, जब तक वह शुद्ध न हो जाए।
पर ध्यान दो, परमेश्वर ने इस्राएलियों को अशुद्धता में छोड़ा नहीं। उन्होंने एक रास्ता दिया, वह राख वाला जल। यह रास्ता आसान था, हर कोई इसका उपयोग कर सकता था। परमेश्वर चाहते थे कि उनकी प्रजा उनके करीब रहे, इसलिए उन्होंने शुद्ध होने का एक तरीका बनाया। यह दिखाता है कि परमेश्वर कठोर नहीं हैं, बल्कि वे चाहते हैं कि उनके लोग उनके पास आ सकें, भले ही जीवन में मृत्यु और दुख का सामना करना पड़े।
समान सूत्र
इब्रानियों की पत्री में लिखा है कि यह बछिया की राख और उसका जल एक बड़ी सच्चाई की ओर इशारा करते हैं। जैसे वह राख शरीर को बाहरी रूप से शुद्ध करती थी, वैसे ही यीशु मसीह का लहू हमारे भीतर को शुद्ध करता है। पुराने नियम में शुद्धि बार-बार करनी पड़ती थी, क्योंकि लोग बार-बार अशुद्ध होते रहते थे। पर यीशु मसीह ने एक ही बार अपना जीवन दिया, और वह काफी है। यह वाचा है, यानी परमेश्वर का पक्का वादा, कि जो कोई यीशु के पास आता है, वह सच में शुद्ध हो जाता है, न केवल शाम तक, बल्कि हमेशा के लिए।
यह सोचना दिलचस्प है कि परमेश्वर हजारों साल पहले भी अपनी प्रजा को यह सिखा रहे थे कि शुद्धि उनकी ओर से आती है, हमारी अपनी कोशिश से नहीं।
आपके लिए
शायद तुम्हारे जीवन में भी ऐसा कुछ हो जो तुम्हें भीतर से गंदा या भारी महसूस कराता है, कोई झूठ, कोई गुस्सा, कोई ऐसा काम जिस पर तुम्हें शर्म आती है। इस्राएली अपने आप को शुद्ध नहीं कर सकते थे, उन्हें राख और जल की जरूरत थी, जो परमेश्वर ने दिया था। वैसे ही तुम भी अपने आप को पूरी तरह ठीक नहीं कर सकते। पर परमेश्वर के पास रास्ता है। यीशु मसीह के पास आना, उनसे बात करना, ईमानदारी से बताना कि क्या गलत हुआ, यही वह रास्ता है। यह शर्म की बात नहीं, बल्कि राहत की बात है कि परमेश्वर ने पहले से एक रास्ता बना रखा है।
बात करें
क्या तुम्हें लगता है कि परमेश्वर इतने सारे नियम क्यों देते थे? क्या वे सच में इतनी परवाह करते थे?
क्या कोई ऐसी बात है जिससे तुम अपने आप को गंदा महसूस करते हो, और जिसे तुम परमेश्वर के सामने लाना चाहते हो?
साथ में प्रार्थना
हे प्रभु, धन्यवाद कि आपने हमें शुद्ध होने का रास्ता दिया है। हम अपने आप को ठीक नहीं कर सकते, पर आप कर सकते हैं। यीशु मसीह के लहू के लिए धन्यवाद, जो हमें एक बार और हमेशा के लिए शुद्ध करता है। हमें अपने पास खींच लीजिए, जब हम गंदा महसूस करें। आमीन।
गिनती 19 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गिनती 19 किस विषय में है?
गिनती 19 क्या कहता है?
गिनती 19 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे गिनती 19 से क्या सीख सकते हैं?
गिनती 19 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?
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