ओबद्याह 1
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
ओबद्याह की पुस्तक बाइबल की सबसे छोटी पुस्तक है, पर इसमें एक गहरा दर्द छिपा है। यह एदोम नाम के देश के बारे में है। एदोम वहाँ के लोग थे जो एसाव के वंशज थे, और याकूब एसाव का जुड़वाँ भाई था। यानी एदोम और इस्राएल असल में भाई-भाई थे।
परमेश्वर ओबद्याह के द्वारा एदोम से कहते हैं कि उनका घमंड उन्हें धोखा दे रहा है। वे पहाड़ों की दरारों में, ऊँचे और सुरक्षित स्थानों में रहते थे और सोचते थे, “हमें कोई नीचे नहीं गिरा सकता।” पर परमेश्वर कहते हैं कि चाहे वे उकाब पक्षी जैसे ऊँचे उड़ें, चाहे तारों के बीच घोंसला बनाएँ, वे उन्हें वहाँ से भी नीचे ला देंगे।
फिर बताया जाता है कि एदोम ने क्या किया था। जब यरूशलेम पर मुसीबत आई, जब पराए लोग शहर में घुसे और सब कुछ लूट लिया, तब एदोम वहाँ खड़ा तमाशा देखता रहा। वे अपने ही भाई याकूब के घराने की तबाही पर आनन्द मनाते रहे, उनकी सम्पत्ति पर हाथ लगाते रहे, और भागने वालों को पकड़वाते रहे। पद 12 से 14 में बार-बार कहा गया है, “तुझे उचित नहीं था” यह भाई होने के नाते सबसे बड़ा अपराध था।
इसलिए परमेश्वर कहते हैं कि यहोवा का दिन आ रहा है, वह दिन जब वे न्याय करेंगे। जैसा एदोम ने किया, वैसा ही उसके साथ भी होगा। परन्तु सिय्योन पर्वत पर, यानी यरूशलेम में, कुछ लोग बचे रहेंगे। याकूब का घराना फिर से अपनी भूमि पाएगा, और अंत में कहा जाता है, “राज्य यहोवा ही का हो जाएगा।”
What Does This Mean?
यह पुस्तक हमें एक कठिन सच बताती है, परमेश्वर देखते हैं कि हम एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, खासकर तब जब कोई मुसीबत में हो। एदोम ने सीधे तलवार नहीं उठाई थी, वे बस दूर खड़े होकर देखते रहे और खुश होते रहे। फिर भी परमेश्वर इसे गंभीर पाप मानते हैं। तमाशा देखना, चुप रहना, दूसरे के दुख में मन ही मन खुश होना, यह भी अन्याय के साथ खड़ा होना है।
साथ ही यह किताब बताती है कि घमंड इंसान को अंधा कर देता है। एदोम को लगता था कि वे बहुत ऊँचे और सुरक्षित हैं, कोई उन्हें छू नहीं सकता। पर सबसे ऊँची जगह भी परमेश्वर की नजर से छिपी नहीं रहती।
The Common Thread
यह पूरी कहानी एक बड़े वादे से जुड़ी है, परमेश्वर का वादा कि वे अपनी प्रजा को पूरी तरह नहीं छोड़ेंगे। भले यरूशलेम गिर गया, भले याकूब के घराने पर मुसीबत आई, फिर भी अंत में एक बचा हुआ समूह रहेगा, सिय्योन पर्वत खड़ा रहेगा। यह वही वादा है जो आगे चलकर यीशु मसीह में पूरा होता है, जो टूटे हुए और बिखरे हुए लोगों को इकट्ठा करके एक नया घराना बनाते हैं। ओबद्याह के आखिरी शब्द हैं, “राज्य यहोवा ही का हो जाएगा।” यही वह राज्य है जिसकी घोषणा यीशु ने भी की, एक ऐसा राज्य जहाँ अन्याय हमेशा के लिए नहीं टिकता।
For You
कभी सोचना, क्या तुमने कभी किसी को मुसीबत में देखा और चुपचाप खड़े रहे, या मन ही मन सोचा “अच्छा हुआ”? यह हर किसी के साथ हो सकता है, दोस्ती में, स्कूल में, घर में भी। ओबद्याह हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर चाहते हैं कि हम अपने भाई-बहनों के दुख में उनके साथ खड़े हों, तमाशबीन बनकर नहीं। और अगर कभी घमंड तुम्हें लगे कि तुम बहुत ऊँचे या सुरक्षित हो, याद रखना, परमेश्वर ही हैं जो सचमुच ऊँचे हैं, और वे विनम्र दिल को प्रेम करते हैं।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, सिर्फ तमाशा देखना और चुप रहना, क्या यह भी गलत काम करने जैसा हो सकता है?
ओबद्याह में परमेश्वर एदोम के घमंड को नीचे गिराने की बात करते हैं, पर तुम्हारे विचार में सच्ची विनम्रता कैसी दिखती है?
Praying Together
हे प्रभु, आप ऊँचे और महान हैं, फिर भी आप हर दुखी दिल को देखते हैं। हमें सिखाइए कि जब कोई मुसीबत में हो, हम चुप खड़े न रहें बल्कि उसके साथ खड़े हों। हमारे घमंड को दूर कीजिए, और हमारे दिल को विनम्र बनाइए। आपका राज्य आए, आपकी भलाई हम में दिखे। आमीन।
ओबद्याह 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
ओबद्याह 1 किस विषय में है?
ओबद्याह 1 क्या कहता है?
ओबद्याह 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे ओबद्याह 1 से क्या सीख सकते हैं?
ओबद्याह 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
देख, मैं तुझे जातियों में छोटा कर दूँगा; तू बहुत तुच्छ ठहरेगा।" एदोम चट्टानों की ऊँचाई पर बैठा था, सुरक्षित और घमंडी। पर जो ऊँचाई हम खुद अपने लिए बनाते हैं, वह परमेश्वर के सामने एक पल में ढह जाती है। आज अपने मन से पूछ: मेरी सुरक्षा किस पर टिकी है, अपनी कमाई और नाम पर, या उसकी दया पर?
एदोम ने न तलवार उठाई, न फाटक तोड़ा। वह बस खड़ा देखता रहा, और परमेश्वर ने कहा, "उस दिन तू भी उनमें से एक था।" चुप रहना भी एक पक्ष चुनना है। जब तेरे भाई की बदनामी हो रही थी और तू मुँह फेरकर चला गया, तब तू निर्दोष नहीं था। सोच, आज किसके दर्द के सामने तू अलग खड़ा है?
एदोम ने यरूशलेम के गिरने पर जश्न मनाया था, परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर प्याला उठाकर पिया था। अब वही प्याला उसके अपने हाथ में थमा दिया जाता है, "वे ऐसी हो जाएँगी जैसे कभी थीं ही नहीं।" जिस पीड़ा पर तू आज हँसता है, कल वह तेरे दरवाज़े पर दस्तक दे सकती है। किसी के गिरने की खबर सुनकर तेरे मन में सबसे पहले क्या उठता है?
दक्षिण देश के लोग एसाव के पहाड़ के अधिकारी हो जाएँगे", यह उन लोगों से कहा गया जिनसे सब कुछ छिन चुका था। जो अपना घर खो बैठे थे, उन्हें पहाड़ मिल रहे हैं। यह सिर्फ वापसी नहीं, बढ़ोतरी है। तेरा नुकसान परमेश्वर के हिसाब में आखिरी शब्द नहीं है। जो आज तेरे हाथ से गिर गया, वह उसकी सूची में दर्ज है।
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