2 इतिहास 19
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
बाइबल की व्याख्या
यहोशापात यहूदा देश का राजा था। उसने अभी-अभी एक बड़ी गलती की थी। वह इस्राएल के दुष्ट राजा अहाब के साथ मिलकर लड़ाई में गया था। उस लड़ाई में अहाब मारा गया, पर यहोशापात परमेश्वर की दया से बच निकला और सही-सलामत यरूशलेम अपने महल में लौट आया।
घर लौटने पर उसे लगा होगा कि सब कुछ ठीक है। पर तभी येहू नाम का एक भविष्यद्वक्ता उससे मिलने आया। येहू ने सीधी बात कही, "क्या दुष्टों की सहायता करना और यहोवा के बैरियों से प्रेम रखना चाहिए?" यह सुनना यहोशापात के लिए आसान नहीं था। एक भविष्यद्वक्ता राजा को उसकी गलती याद दिला रहा था। परमेश्वर उससे नाराज़ थे।
पर येहू ने यह भी कहा कि यहोशापात में कुछ अच्छाई भी है। उसने देश से मूरतें हटाई थीं और अपना मन परमेश्वर की खोज में लगाया था। परमेश्वर सिर्फ गलतियाँ नहीं देखते, वे अच्छाई भी देखते हैं।
यहोशापात ने डाँट को गंभीरता से लिया। वह अपने पूरे राज्य में घूमा, बेर्शेबा से लेकर एप्रैम के पहाड़ी देश तक, और लोगों को फिर से परमेश्वर की ओर लौटा लाया। फिर उसने हर बड़े शहर में न्यायी नियुक्त किए, यानी ऐसे लोग जो झगड़ों का इंसाफ करें।
न्यायियों को उसने बहुत महत्वपूर्ण बात कही, "सोचो कि क्या करते हो, क्योंकि तुम जो न्याय करोगे, वह मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा के लिये करोगे।" उसने उन्हें चेतावनी दी कि परमेश्वर पक्षपात नहीं करते और घूस नहीं लेते। इसलिए न्यायी भी ऐसे बनें।
यरूशलेम में भी उसने याजकों और लेवियों को न्याय करने के लिए बैठाया। महायाजक अमर्याह परमेश्वर के मामलों का अगुआ था, और जबद्याह राजा के मामलों का। यहोशापात ने अंत में कहा, "हियाव बाँधकर काम करो और भले मनुष्य के साथ यहोवा रहेगा।"
इसका क्या अर्थ है?
इस अध्याय में हम एक राजा को देखते हैं जो गलती करता है, डाँट सुनता है, और फिर सुधार लाता है। यह बहुत खास बात है। बहुत से लोग जब उन्हें उनकी गलती बताई जाती है, तो नाराज़ हो जाते हैं। यहोशापात नाराज़ नहीं हुआ। उसने भविष्यद्वक्ता की बात मानी और कुछ अच्छा करने लगा।
दूसरी बात, न्याय के बारे में यहोशापात ने जो कहा वह बहुत गहरी बात है। न्यायी सिर्फ इंसानों के लिए काम नहीं करते, वे परमेश्वर के लिए काम करते हैं। परमेश्वर खुद न्यायी हैं, और वे चाहते हैं कि पृथ्वी पर भी सच्चाई से न्याय हो। परमेश्वर घूस नहीं लेते, वे किसी का पक्ष नहीं करते, चाहे वह अमीर हो या गरीब।
बड़ी कहानी में जगह
यहोशापात एक अच्छा राजा था, पर वह पूरा-पूरा अच्छा नहीं था। उसने भी गलतियाँ कीं। बाइबल में हर राजा किसी न किसी जगह लड़खड़ाता है। यह हमें एक बड़ी बात की ओर ले जाता है, एक ऐसे राजा की खोज जो कभी गलती न करे।
वह राजा यीशु मसीह हैं। यीशु सच्चे न्यायी हैं। वे कभी घूस नहीं लेते, कभी पक्षपात नहीं करते। और सबसे अद्भुत बात यह है कि जब वे हमें दोषी पाते हैं, तब भी वे हमें प्रेम करते हैं। उन्होंने खुद क्रूस पर हमारी सज़ा उठाई ताकि हम परमेश्वर के सामने साफ़ ठहर सकें। यहोशापात की कहानी हमें उस राजा की ओर देखने में मदद करती है जो पूरी तरह भला है।
तुम्हारे लिए
सोचो, जब कोई तुम्हारी गलती बताता है, तब तुम कैसा महसूस करते हो? माता-पिता, शिक्षक, या दोस्त कहते हैं, "यह ठीक नहीं था।" पहला जवाब अक्सर होता है, "पर मैंने कुछ नहीं किया!" यहोशापात हमें कुछ और सिखाता है। सुनो, मान लो, और फिर उठकर कुछ अच्छा करो।
और न्याय की बात। स्कूल में या घर पर, क्या तुम सच बोलते हो, भले ही सच बोलना कठिन हो? क्या तुम अपने दोस्त का पक्ष लेते हो जब वह गलत होता है, सिर्फ इसलिए कि वह तुम्हारा दोस्त है? परमेश्वर पक्षपात नहीं करते। वे चाहते हैं कि हम भी सच्चाई से सोचें और बोलें।
इस पर बात करो
जब किसी ने तुम्हें बताया कि तुमने गलत किया है, तब तुमने कैसी प्रतिक्रिया दी? यहोशापात से क्या सीखा जा सकता है?
परमेश्वर घूस नहीं लेते और पक्षपात नहीं करते। यह तुम्हारे लिए क्यों अच्छी खबर है?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप सच्चे न्यायी हैं। जब कोई हमें हमारी गलती बताए, तो हमें सुनने का मन दीजिए। हमें हिम्मत दीजिए कि हम सच बोलें और सही करें। और धन्यवाद कि यीशु हमारे सच्चे राजा हैं। आमीन।
2 इतिहास 19 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 इतिहास 19 किस विषय में है?
2 इतिहास 19 क्या कहता है?
2 इतिहास 19 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 2 इतिहास 19 से क्या सीख सकते हैं?
2 इतिहास 19 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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