नीतिवचन 28
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
नीतिवचन 28 एक अध्याय है जिसमें राजा सुलैमान छोटे-छोटे वाक्यों में बड़ी सच्चाइयाँ बताते हैं। हर वाक्य जैसे एक तस्वीर है। पहले वाक्य में लिखा है कि दुष्ट लोग बिना किसी पीछा किए भी डर के मारे भागते हैं, पर धर्मी लोग जवान सिंहों के समान निडर रहते हैं। सोचो, कोई व्यक्ति जिसने कुछ गलत किया है, वह हर आहट से चौंक जाता है। पर जिसका मन साफ है, वह शांति से चल सकता है।
इस अध्याय में बार-बार दो तरह के लोगों की तुलना होती है, वे जो परमेश्वर की व्यवस्था यानी उनके नियमों के अनुसार जीते हैं, और वे जो अपने लालच या चालाकी के पीछे भागते हैं। गरीबों पर अत्याचार करने वाला शासक, अपने माता-पिता को लूटकर झूठ बोलने वाला बेटा, धन कमाने की जल्दी में पड़ा लालची आदमी, इन सबकी तस्वीरें यहाँ मिलती हैं। साथ ही यह भी बताया गया है कि जो अपने अपराध छिपाता है, वह सफल नहीं होता, पर जो उन्हें मान लेता और छोड़ देता है, उस पर दया की जाती है (वचन 13)। और एक सुंदर वचन कहता है कि जो यहोवा पर भरोसा रखता है, वह हष्ट-पुष्ट यानी मजबूत और स्वस्थ हो जाता है (वचन 25)।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय हमें सिखाता है कि जीवन में हमारे चुनावों का असर होता है। यह कोई जादू नहीं है, बल्कि एक पैटर्न है जो परमेश्वर ने इस दुनिया में रखा है। जो ईमानदारी से चलता है, उसे कुछ न कुछ सहारा मिलता रहता है। जो छल से चलता है, वह अचानक गिर पड़ता है, भले ही कुछ समय के लिए वह सफल दिखे।
पर यहाँ एक बात ध्यान देने लायक है, सुलैमान यह नहीं कहते कि धर्मी लोग कभी गलती नहीं करते। वचन 13 ही बताता है कि गलती करना संभव है, असली सवाल यह है कि हम उसे छिपाते हैं या मान लेते हैं। यही ईमानदारी परमेश्वर को प्रिय है। यह अध्याय कठोर भी लग सकता है, क्योंकि यह साफ-साफ कहता है कि गलत काम का नतीजा बुरा होता है। पर यह डराने के लिए नहीं, बल्कि चेताने के लिए है, जैसे कोई माता-पिता अपने बच्चे को आग से दूर रहने की सलाह देते हैं।
बड़ा सिलसिला
पूरी बाइबल में यह सच्चाई बार-बार दिखती है कि परमेश्वर धर्मी और ईमानदार लोगों के साथ हैं, पर वे छल और अन्याय से घृणा करते हैं। यह अध्याय हमें यीशु मसीह की ओर भी इशारा करता है। वचन 13 कहता है कि जो अपने अपराध मान लेता है, उस पर दया की जाएगी। यही वह रास्ता है जो यीशु मसीह ने खोला, उनके पास आकर हम अपनी गलतियाँ छिपाने के बजाय मान सकते हैं, और परमेश्वर की दया पाते हैं। यीशु मसीह स्वयं वह धर्मी व्यक्ति थे जो निडर सिंह के समान चले, कभी भागे नहीं, चाहे कितनी भी कठिनाई आई। और वे गरीबों और कुचले हुए लोगों के साथ खड़े रहे, जैसे यह अध्याय भी सिखाता है कि निर्धन को दान देने वाले को घटी नहीं होती (वचन 27)।
तुम्हारे लिए
तुम्हारी जिंदगी में भी ऐसे मौके आते होंगे जब कुछ छिपाना आसान लगता है, एक झूठ, एक छोटी चोरी, कोई गलती जो तुमने की। यह अध्याय तुमसे पूछता है, क्या तुम उसे छिपाओगे या मान लोगे? यह आसान नहीं है, पर परमेश्वर उन्हें दया देते हैं जो सच बोलने का साहस रखते हैं। साथ ही, जब कोई तुम्हें डाँटे या सुधारे, याद रखना कि वचन 23 कहता है कि ऐसा व्यक्ति अंत में चापलूसी करने वाले से ज्यादा प्यारा लगता है। शायद अभी वह सुधार कड़वा लगे, पर बाद में तुम समझोगे कि वह तुम्हारी भलाई के लिए था।
बात करें
अगर किसी से गलती हो जाए, तो उसे मान लेना इतना मुश्किल क्यों लगता है?
क्या तुम्हें याद है कि किसी ने तुम्हें डाँटा या सुधारा और बाद में तुमने समझा कि वह सही था?
प्रार्थना
प्रभु, हमें ईमानदार दिल दीजिए, जो गलती छिपाने के बजाय आपके सामने मान ले। हमें आप पर भरोसा रखना सिखाइए, जैसे आपने वादा किया है कि जो आप पर भरोसा रखता है वह मजबूत बना रहता है। हमें निडर बनाइए, जैसे धर्मी लोग निडर सिंहों के समान चलते हैं। आमीन।
नीतिवचन 28 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नीतिवचन 28 किस विषय में है?
नीतिवचन 28 क्या कहता है?
नीतिवचन 28 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे नीतिवचन 28 से क्या सीख सकते हैं?
नीतिवचन 28 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
जब धर्मी लोग जयवन्त होते हैं, तब बड़ी शोभा होती है; परन्तु जब दुष्ट लोग प्रबल होते हैं, तब मनुष्य ढूँढ़े नहीं मिलते।" ध्यान दो, जब बुराई सिर उठाती है तो अच्छे लोग मरते नहीं, बस छिप जाते हैं। चुप हो जाते हैं, किनारा कर लेते हैं। सोचो, तुम्हारे दफ्तर में, मोहल्ले में, परिवार में कहीं तुम भी तो छिपे नहीं बैठे? तुम्हारी आवाज़ किसी की शोभा बन सकती थी।
व्यवस्था को छोड़नेवाले दुष्टों की प्रशंसा करते हैं, परन्तु व्यवस्था पर चलनेवाले उनसे लड़ते हैं।"
ध्यान दो, परमेश्वर का वचन छोड़ने वाला चुपचाप नहीं रहता, वह ताली बजाने लगता है। जो बात पहले उसके मन को दुखाती थी, अब वही उसे चतुराई लगती है।
अपने दिल से पूछो, आजकल तुम किस चीज़ पर वाह कहते हो? तुम्हारी तालियाँ बता देती हैं कि तुम्हारा पैर किस रास्ते पर टिका है।
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