भजन संहिता 50
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
सोचो, एक दिन आसमान में तेज़ बिजली चमकती है। पूरब से पश्चिम तक, हर जगह की धरती के लोग एक आवाज़ सुनते हैं। यह आवाज़ परमेश्वर की है, सबसे शक्तिशाली राजा की आवाज़। वे सिय्योन नाम की सुंदर पहाड़ी से चमकते हैं, और चुपचाप नहीं रहते। उनके आगे आग जलती हुई चलती है, और उनके चारों तरफ तेज़ आँधी बहती है। डरावना लगता है, है ना?
परमेश्वर आकाश और पृथ्वी दोनों को बुलाते हैं, क्योंकि वे अपने लोगों का न्याय करने आ रहे हैं। न्याय यानी सच और झूठ को अलग-अलग करना। वे कहते हैं, "मेरे भक्तों को मेरे पास इकट्ठा करो, जिन्होंने बलिदान चढ़ाकर मुझसे वाचा बाँधी है!" यानी अपने वे लोग जिन्होंने उनसे वादा किया था।
फिर परमेश्वर बोलना शुरू करते हैं। वे कहते हैं, "मैं तुझ पर तेरे बलियों के विषय दोष नहीं लगाता।" उनके लोग जानवर चढ़ाते थे, जैसे बैल और बकरे, यह दिखाने के लिए कि वे परमेश्वर से प्यार करते हैं। पर परमेश्वर कहते हैं, "मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशाला से बकरे लूँगा। क्योंकि जंगल के सारे जानवर और हज़ारों पहाड़ों के पशु मेरे ही हैं!" हर चिड़िया, हर हिरण, हर जानवर पहले से ही उनका है। परमेश्वर को उनकी ज़रूरत ही नहीं है।
तो फिर वे क्या चाहते हैं? वे कहते हैं, "परमेश्वर को धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा। और संकट के दिन मुझे पुकार, मैं तुझे छुड़ाऊँगा।" यानी असली भेंट है दिल से धन्यवाद कहना, और मुश्किल में परमेश्वर को पुकारना।
What Does This Mean?
फिर परमेश्वर एक दूसरी बात कहते हैं, और यह ज़रा कड़ी है। कुछ लोग बाहर से भला दिखते हैं, पर अंदर से चोर की संगत रखते हैं, झूठ बोलते हैं, और अपने ही भाई के खिलाफ बातें बनाते हैं। परमेश्वर कहते हैं, "तूने समझ लिया कि परमेश्वर बिल्कुल मेरे समान है? परन्तु मैं तुझे समझाऊँगा।" इसका मतलब है, परमेश्वर सब कुछ देखते हैं, चाहे कोई चुप रहे तो भी। वे सोते नहीं, भूलते नहीं।
यह ज़रूरी बात है क्योंकि यह हमें सिखाती है कि परमेश्वर के साथ रिश्ता सिर्फ दिखावे का नहीं होता। कोई मंदिर में बहुत कुछ भेंट कर सकता है, पर अगर उसका दिल झूठा है, तो परमेश्वर उसे पहचान लेते हैं। परमेश्वर दिल देखते हैं, हाथ में क्या है वह नहीं।
The Common Thread
बहुत साल बाद, यीशु मसीह इस धरती पर आए। उन्होंने भी सिखाया कि परमेश्वर बलिदान से ज़्यादा सच्चा दिल चाहते हैं। इब्रानियों की पुस्तक में लिखा है, "धन्यवाद ही का बलिदान चढ़ा।" यीशु ने खुद को हमारे लिए दे दिया, ताकि हम सचमुच परमेश्वर के करीब आ सकें, बिना किसी जानवर की भेंट के। अब हम परमेश्वर को अपने होंठों से धन्यवाद देते हैं, क्योंकि यीशु ने पहले ही सारी कीमत चुका दी है।
For You
जब तुम परमेश्वर से बात करो, दिखावा मत करना। सच कहना, "परमेश्वर, धन्यवाद," और सचमुच उसका मतलब समझना। जब तुम मुश्किल में हो, डरे हुए हो, तो उन्हें पुकारो, जैसे यह भजन कहता है। और अपने भाई-बहन के बारे में बुरी बातें बनाने से बचो, क्योंकि परमेश्वर सुनते हैं।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर को जानवरों की भेंट की ज़रूरत क्यों नहीं थी?
आज तुम परमेश्वर को धन्यवाद का बलिदान कैसे दे सकते हो?
Praying Together
प्रभु परमेश्वर, आप बड़े और शक्तिशाली हैं, फिर भी हमारी सुनते हैं। हमें सिखाइए कि दिखावा नहीं, सच्चा दिल आपको भाता है। हम आपको धन्यवाद देते हैं, और जब हम डरे हुए हों, हमें याद दिलाइए कि हम आपको पुकार सकते हैं। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।
भजन संहिता 50 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
भजन संहिता 50 किस विषय में है?
भजन संहिता 50 क्या कहता है?
भजन संहिता 50 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे भजन संहिता 50 से क्या सीख सकते हैं?
भजन संहिता 50 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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