7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रकाशितवाक्य 13

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

प्रकाशितवाक्य 13 की व्याख्या

व्याख्या

यूहन्ना एक दर्शन में देखते हैं कि समुद्र में से एक डरावना पशु निकलता है। उसके दस सींग और सात सिर हैं, और उस पर परमेश्वर की निन्दा करने वाले नाम लिखे हैं। यह पशु चीते जैसा दिखता है, उसके पाँव भालू के जैसे और मुँह सिंह के जैसा है। यह किसी असली जानवर का चित्र नहीं है, बल्कि एक शक्ति का चित्र है जो परमेश्वर के विरुद्ध खड़ी होती है। उस अजगर, यानी शैतान ने अपनी सामर्थ्य और सिंहासन इस पशु को दे दिया है।

अचम्भे की बात यह है कि इस पशु के सिर पर एक घातक घाव था, मानो वह मर चुका हो, पर वह घाव भर गया। और पूरी पृथ्वी के लोग इससे चौंक गए और इस पशु की पूजा करने लगे। वे कहते हैं, "इस पशु के समान कौन है?" इसे बयालीस महीने तक बड़े बोल बोलने और परमेश्वर के लोगों से लड़ने का अधिकार दिया गया।

फिर यूहन्ना एक दूसरे पशु को देखते हैं, यह पृथ्वी में से निकलता है और मेम्ने जैसे सींग रखता है, पर बोलता अजगर जैसा है। यह पशु लोगों को पहले पशु की पूजा करने के लिए प्रभावित करता है। यह बड़े-बड़े चिन्ह दिखाता है, आकाश से आग भी बरसाता है, और एक मूर्ति बनवाता है जो बोलने भी लगती है। जो इस मूर्ति की पूजा नहीं करते, उन्हें मार डाला जाता है। हर व्यक्ति के हाथ या माथे पर एक छाप लगाई जाती है, जिसके बिना कोई खरीद-बिक्री नहीं कर सकता। उस छाप का एक अंक है, छः सौ छियासठ।

इसका मतलब क्या है?

यह अध्याय डरावना है, और इसे छिपाना ठीक नहीं होगा। यूहन्ना अपने समय के विश्वासियों को लिख रहे थे, जो रोमी साम्राज्य के अधीन सताव सह रहे थे। वह सम्राट जिसकी पूजा होती थी, वह झूठे वादे करने वाली शक्ति, यह सब उस पशु में झलकता है। परमेश्वर की जगह कोई और लेने की कोशिश, झूठे चमत्कार, और दबाव कि सब एक जैसे बनें, यह हर समय में किसी न किसी रूप में दिखता है।

पर ध्यान दें, इस पशु को "अधिकार दिया गया" है, यह शब्द कई बार आता है। इसका अर्थ है कि यह पशु अपनी मरजी से कुछ नहीं कर सकता। परमेश्वर ने इसकी सीमा तय कर रखी है। बयालीस महीने, यह भी एक सीमित समय है। यह पशु शक्तिशाली लगता है, पर वह परमेश्वर से बड़ा नहीं है।

सूत्र

इस अध्याय में एक बात बार-बार कही गई है, "मेम्ने की जीवन की पुस्तक में नाम लिखे हुए हैं।" यह मेम्ना यीशु मसीह हैं, जो जगत की उत्पत्ति से पहले ही मारे जाने के लिए ठहराए गए थे। यह पशु अजगर की नकल करता है, पर मेम्ना असली विजेता हैं। जो लोग मेम्ने के साथ जुड़े हैं, उनके नाम पहले से ही उस पुस्तक में लिखे हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि उन्हें कष्ट नहीं होगा, आगे की आयतें कहती हैं कि कुछ कैद में जाएंगे, कुछ तलवार से मरेंगे। पर उनका भविष्य परमेश्वर के हाथ में सुरक्षित है, न कि किसी पशु के हाथ में।

आपके लिए

तुम शायद सोचो, क्या यह सब आज भी सच है? सच तो यह है कि आज भी ऐसी आवाजें हैं जो कहती हैं कि सबको एक जैसा बनना चाहिए, वरना बाहर रहो। कभी स्कूल में, कभी दोस्तों के बीच, दबाव बनता है कि सबके जैसा बनो, नहीं तो अलग पड़ जाओगे। परमेश्वर के लोगों को कभी-कभी "नहीं" कहने की हिम्मत चाहिए होती है, जैसे वे लोग जो मूर्ति की पूजा नहीं करते थे। यह आसान नहीं है। पर यह अध्याय याद दिलाता है कि जो दिखने में शक्तिशाली लगता है, वह हमेशा सबसे मजबूत नहीं होता। असली ताकत मेम्ने के पास है।

बात करें

अगर तुम उन लोगों में होते जो पहली सदी में रहते थे, तो क्या तुम्हें लगता कि यह अध्याय डर देता या हिम्मत देता?

क्या तुम सोच सकते हो कि आज किसी चीज़ का दबाव हमें "सबके जैसा बनने" के लिए मजबूर करता है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, यह दुनिया कभी-कभी डरावनी लगती है, जहाँ बुरी ताकतें बड़ी दिखती हैं। हमें याद दिलाइए कि आप सब पर अधिकार रखते हैं, और मेम्ना यीशु मसीह पहले ही जीत चुके हैं। हमारे नाम आपकी किताब में सुरक्षित रखिए, और हमें हिम्मत दीजिए जब सबके जैसा बनने का दबाव आए। आमीन।

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प्रकाशितवाक्य 13 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 13 किस विषय में है?
यूहन्ना एक दर्शन में देखते हैं कि समुद्र में से एक डरावना पशु निकलता है। उसके दस सींग और सात सिर हैं, और उस पर परमेश्वर की निन्दा करने वाले नाम लिखे हैं। यह पशु चीते जैसा दिखता है, उसके पाँव भालू के जैसे और मुँह सिंह के जैसा है। यह किसी असली जानवर का चित्र नहीं है, बल्कि एक शक्ति का चित्र है जो परमेश्वर के विरुद्ध खड़ी होती है। उस अजगर, यानी शैतान ने अपनी सामर्थ्य और सिंहासन इस पशु को दे दिया है।
प्रकाशितवाक्य 13 क्या कहता है?
फिर यूहन्ना एक दूसरे पशु को देखते हैं, यह पृथ्वी में से निकलता है और मेम्ने जैसे सींग रखता है, पर बोलता अजगर जैसा है। यह पशु लोगों को पहले पशु की पूजा करने के लिए प्रभावित करता है। यह बड़े-बड़े चिन्ह दिखाता है, आकाश से आग भी बरसाता है, और एक मूर्ति बनवाता है जो बोलने भी लगती है। जो इस मूर्ति की पूजा नहीं करते, उन्हें मार डाला जाता है। हर व्यक्ति के हाथ या माथे पर एक छाप लगाई जाती है, जिसके बिना कोई खरीद-बिक्री नहीं कर सकता। उस छाप का एक अंक है, छः सौ छियासठ।
प्रकाशितवाक्य 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर ध्यान दें, इस पशु को "अधिकार दिया गया" है, यह शब्द कई बार आता है। इसका अर्थ है कि यह पशु अपनी मरजी से कुछ नहीं कर सकता। परमेश्वर ने इसकी सीमा तय कर रखी है। बयालीस महीने, यह भी एक सीमित समय है। यह पशु शक्तिशाली लगता है, पर वह परमेश्वर से बड़ा नहीं है।
बच्चे प्रकाशितवाक्य 13 से क्या सीख सकते हैं?
तुम शायद सोचो, क्या यह सब आज भी सच है? सच तो यह है कि आज भी ऐसी आवाजें हैं जो कहती हैं कि सबको एक जैसा बनना चाहिए, वरना बाहर रहो। कभी स्कूल में, कभी दोस्तों के बीच, दबाव बनता है कि सबके जैसा बनो, नहीं तो अलग पड़ जाओगे। परमेश्वर के लोगों को कभी-कभी "नहीं" कहने की हिम्मत चाहिए होती है, जैसे वे लोग जो मूर्ति की पूजा नहीं करते थे। यह आसान नहीं है। पर यह अध्याय याद दिलाता है कि जो दिखने में शक्तिशाली लगता है, वह हमेशा सबसे मजबूत नहीं होता। असली ताकत मेम्ने के पास है।
प्रकाशितवाक्य 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम सोच सकते हो कि आज किसी चीज़ का दबाव हमें "सबके जैसा बनने" के लिए मजबूर करता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

उसे यह अधिकार दिया गया कि पवित्र लोगों से लड़े, और उन पर जय पाए।" ध्यान दे, अधिकार उसने छीना नहीं, उसे दिया गया। डोर किसी और के हाथ में है। तेरी ज़िंदगी में जो हार जैसा दिखता है, वह भी परमेश्वर की तय की हुई सीमा के भीतर है। पशु देह तक पहुँच सकता है, पर मेम्ने की पुस्तक में लिखे तेरे नाम तक नहीं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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