7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रकाशितवाक्य 15

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यूहन्ना फिर से स्वर्ग की ओर देखता है, और वहाँ एक बड़ा और अद्भुत चिन्ह दिखाई देता है। सात स्वर्गदूत खड़े हैं, और उनके पास सात अंतिम विपत्तियाँ हैं। ये आखिरी विपत्तियाँ हैं, क्योंकि इनके बाद परमेश्वर का प्रकोप, यानी उनका न्यायपूर्ण क्रोध, पूरा हो जाएगा।

फिर यूहन्ना एक समुद्र देखता है, जो काँच जैसा साफ है पर आग से मिला हुआ है। उसके किनारे वे लोग खड़े हैं जिन्होंने उस पशु को और उसकी मूर्ति को नहीं माना, जिन्होंने उसकी हार नहीं मानी बल्कि जीत पाई। उनके हाथों में वीणाएँ हैं, और वे गीत गा रहे हैं, मूसा का गीत और मेम्ने का गीत। यह गीत कहता है कि परमेश्वर के काम महान और अद्भुत हैं, कि उनकी राहें ठीक और सच्ची हैं, और कि केवल वे ही पवित्र हैं।

इसके बाद स्वर्ग में एक मन्दिर खुलता है, जिसे "साक्षी का तम्बू" कहा गया है, यह वही जगह है जहाँ परमेश्वर अपनी उपस्थिति दिखाते थे। उसमें से सात स्वर्गदूत निकलते हैं, शुद्ध और चमकदार वस्त्र पहने, सोने की पट्टियाँ बाँधे। चार जीवित प्राणियों में से एक उन्हें सात सोने के कटोरे देता है, जो परमेश्वर के प्रकोप से भरे हैं। मन्दिर परमेश्वर की महिमा और सामर्थ्य के धुएँ से भर जाता है, और जब तक सातों विपत्तियाँ पूरी नहीं हो जातीं, तब तक कोई भी मन्दिर में प्रवेश नहीं कर सकता।

What Does This Mean?

यह अध्याय दो चीज़ें एक साथ दिखाता है, जो पहली नज़र में अजीब लग सकती हैं। एक तरफ विजय का गीत है, खुशी और भरोसे से भरा हुआ। दूसरी तरफ न्याय की तैयारी है, कुछ ऐसा जो गंभीर और भारी है। बाइबल इन दोनों को छिपाती नहीं। परमेश्वर केवल प्रेम करने वाले नहीं हैं, वे पवित्र भी हैं, और पवित्रता का मतलब है कि बुराई हमेशा के लिए नहीं चल सकती। जो लोग समुद्र के किनारे खड़े हैं, उन्होंने कठिन रास्ते से होकर जीत पाई है। उनका गीत यह नहीं कहता कि सब कुछ आसान था, बल्कि यह कहता है कि परमेश्वर की राहें सच्ची हैं, भले ही हम उन्हें हमेशा तुरंत समझ न पाएं।

The Common Thread

वे "मूसा का गीत" गाते हैं। याद है मूसा का गीत कब गाया गया था? जब इस्राएल के लोग लाल सागर से पार निकले थे, गुलामी से आज़ादी की ओर। अब यहाँ वही गीत "मेम्ने का गीत" के साथ जुड़ जाता है, मेम्ना यानी यीशु मसीह, जिन्होंने अपने लहू से लोगों को छुड़ाया। जैसे परमेश्वर ने एक बार इस्राएल को मिस्र से निकाला, वैसे ही अब वे अपने लोगों को पाप और बुराई की ताकत से निकालते हैं। यह परमेश्वर की वाचा का हिस्सा है, वह वादा जो वे हमेशा निभाते हैं। मन्दिर का धुआँ भी नया नहीं है, यशायाह नबी ने भी एक बार परमेश्वर की महिमा का मन्दिर धुएँ से भरते देखा था। यूहन्ना यही दिखा रहा है, कि वही परमेश्वर जो कल काम करते थे, आज भी काम कर रहे हैं, और अपने वादे पूरे करेंगे।

For You

शायद तुम सोचो, मुझे इन कटोरों और विपत्तियों से क्या लेना देना? पर ध्यान दो, गीत गाने वाले लोग डरे हुए नहीं हैं। वे जानते हैं कि परमेश्वर न्यायी हैं, फिर भी वे भरोसे से गाते हैं। इसका मतलब है कि तुम भी परमेश्वर से डर सकते हो, एक गहरे आदर के डर से, और साथ ही उन पर भरोसा भी रख सकते हो। यह दोनों एक साथ चल सकते हैं। कभी कभी तुम्हें भी लगेगा कि दुनिया में बुराई बहुत ज़्यादा है, और सवाल उठेगा कि परमेश्वर कब कुछ करेंगे। यह अध्याय यह नहीं बताता कि कब, पर यह ज़रूर बताता है कि आखिरकार न्याय होगा, और जो लोग यीशु के साथ खड़े हैं, वे गीत गाने वालों में शामिल होंगे।

Talk About It

तुम्हें क्या लगता है, क्या परमेश्वर का न्यायी होना डरावना है या भरोसा दिलाने वाला? या दोनों?

मूसा का गीत और मेम्ने का गीत एक साथ क्यों गाया गया होगा, इनमें क्या समानता है?

Praying Together

हे प्रभु परमेश्वर, आप पवित्र हैं और आपके काम सच्चे और सही हैं। हमें डर नहीं बल्कि भरोसा दीजिए, जब हम दुनिया की बुराई देखें। हमें सिखाइए कि हम भी एक दिन उस गीत में शामिल हों, जो मेम्ने की जीत का गीत है। आमीन।

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प्रकाशितवाक्य 15 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रकाशितवाक्य 15 किस विषय में है?
यूहन्ना फिर से स्वर्ग की ओर देखता है, और वहाँ एक बड़ा और अद्भुत चिन्ह दिखाई देता है। सात स्वर्गदूत खड़े हैं, और उनके पास सात अंतिम विपत्तियाँ हैं। ये आखिरी विपत्तियाँ हैं, क्योंकि इनके बाद परमेश्वर का प्रकोप, यानी उनका न्यायपूर्ण क्रोध, पूरा हो जाएगा।
प्रकाशितवाक्य 15 क्या कहता है?
इसके बाद स्वर्ग में एक मन्दिर खुलता है, जिसे "साक्षी का तम्बू" कहा गया है, यह वही जगह है जहाँ परमेश्वर अपनी उपस्थिति दिखाते थे। उसमें से सात स्वर्गदूत निकलते हैं, शुद्ध और चमकदार वस्त्र पहने, सोने की पट्टियाँ बाँधे। चार जीवित प्राणियों में से एक उन्हें सात सोने के कटोरे देता है, जो परमेश्वर के प्रकोप से भरे हैं। मन्दिर परमेश्वर की महिमा और सामर्थ्य के धुएँ से भर जाता है, और जब तक सातों विपत्तियाँ पूरी नहीं हो जातीं, तब तक कोई भी मन्दिर में प्रवेश नहीं कर सकता।
प्रकाशितवाक्य 15 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
वे "मूसा का गीत" गाते हैं। याद है मूसा का गीत कब गाया गया था? जब इस्राएल के लोग लाल सागर से पार निकले थे, गुलामी से आज़ादी की ओर। अब यहाँ वही गीत "मेम्ने का गीत" के साथ जुड़ जाता है, मेम्ना यानी यीशु मसीह, जिन्होंने अपने लहू से लोगों को छुड़ाया। जैसे परमेश्वर ने एक बार इस्राएल को मिस्र से निकाला, वैसे ही अब वे अपने लोगों को पाप और बुराई की ताकत से निकालते हैं। यह परमेश्वर की वाचा का हिस्सा है, वह वादा जो वे हमेशा निभाते हैं। मन्दिर का धुआँ भी नया नहीं है, यशायाह नबी ने भी एक बार परमेश्वर की महिमा का मन्दिर धुएँ से भरते देखा था। यूहन्ना यही दिखा रहा है, कि वही परमेश्वर जो कल काम करते थे, आज भी काम कर रहे हैं, और अपने वादे पूरे करेंगे।
बच्चे प्रकाशितवाक्य 15 से क्या सीख सकते हैं?
तुम्हें क्या लगता है, क्या परमेश्वर का न्यायी होना डरावना है या भरोसा दिलाने वाला? या दोनों?
प्रकाशितवाक्य 15 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे प्रभु परमेश्वर, आप पवित्र हैं और आपके काम सच्चे और सही हैं। हमें डर नहीं बल्कि भरोसा दीजिए, जब हम दुनिया की बुराई देखें। हमें सिखाइए कि हम भी एक दिन उस गीत में शामिल हों, जो मेम्ने की जीत का गीत है। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

समुद्र के पार पहुँचकर मूसा ने जो गीत गाया था, वही गीत ये लोग फिर गाते हैं: "हे सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर, तेरे कार्य बड़े और अद्भुत हैं।" ध्यान दे, जिन्होंने सबसे ज़्यादा सहा, वे अपने घावों का बखान नहीं करते, परमेश्वर के कामों का करते हैं। तेरी आज की शिकायत किसी दिन गीत बन सकती है, अगर तू पार तक चलता रहे।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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