7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

रूत 1

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explानना

बहुत समय पहले, जब न्यायी लोग इस्राएल पर राज्य करते थे, तब देश में अकाल पड़ा। खेतों में अनाज नहीं उगा। रोटी नहीं मिली। बैतलहम शहर से एलीमेलेक नाम का एक आदमी अपनी पत्नी नाओमी और अपने दो बेटों को लेकर दूर देश मोआब चला गया। वहाँ शायद भोजन मिल जाए, उसने सोचा।

पर मोआब में दुःख उनका पीछा नहीं छोड़ता था। एलीमेलेक मर गया। नाओमी अकेली रह गई, अपने दो बेटों के साथ। बेटों ने मोआब की दो लड़कियों से ब्याह किया, एक का नाम ओर्पा और दूसरी का नाम रूत था। दस साल बीत गए। फिर एक और दुःख आया, महलोन और किल्योन भी मर गए। अब नाओमी के पास न पति था, न बेटे। सिर्फ दो बहुएँ थीं, और एक भारी, खाली दिल।

एक दिन नाओमी ने सुना कि यहोवा ने अपने लोगों को फिर से भोजन दिया है। उसने कहा, "अब मुझे अपने देश लौट जाना चाहिए।" वह चल पड़ी, और ओर्पा और रूत भी उसके साथ चलीं। रास्ते में नाओमी रुक गई और बोली, "तुम दोनों अपने-अपने घर लौट जाओ। यहोवा तुम पर कृपा करे।" वह उनसे बहुत प्यार करती थी, पर वह जानती थी कि उसके पास उन्हें देने के लिए कुछ नहीं बचा।

तीनों रोने लगीं। ओर्पा ने अपनी सास को चूमा और लौट गई। पर रूत नहीं गई। वह नाओमी से चिपकी रही।

इसका क्या अर्थ है?

क्या तुमने कभी सोचा, रूत को लौट जाना कितना आसान होता? उसका अपना घर था, अपने लोग थे, अपना देवता था। पर रूत ने कुछ ऐसा कहा जो बहुत साहसी था। उसने कहा, "जिधर तू जाएगी उधर मैं भी जाऊँगी। तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" क्या तुम ऐसा साहस दिखा पाते?

रूत ने अपने आराम को नहीं चुना। उसने नाओमी को चुना, और नाओमी के परमेश्वर को चुना। यह प्रेम सिर्फ शब्द नहीं था, यह एक फैसला था जो पूरी जिंदगी के लिए था।

जब दोनों बैतलहम पहुँचीं, तो पूरे शहर में हलचल मच गई। स्त्रियाँ पूछने लगीं, "क्या यह नाओमी है?" नाओमी ने उदास होकर जवाब दिया, "मुझे मारा कहो, क्योंकि सर्वशक्तिमान ने मुझे बड़ा दुःख दिया है। मैं भरी पूरी गई थी, यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटाया है।" नाओमी का दिल टूटा हुआ था, और उसने अपनी सच्ची तकलीफ को छिपाया नहीं।

समान सूत्र

नाओमी को लगा कि वह बिलकुल खाली हाथ लौटी है। पर परमेश्वर की आँखें उस पर थीं, भले ही नाओमी को यह अभी दिखाई न दिया। रूत जो साथ चली, वही आगे परमेश्वर की बड़ी योजना का हिस्सा बनी। बहुत साल बाद, इसी रूत के परिवार से राजा दाऊद जन्मा, और उसी वंश से यीशु मसीह भी आए। जब सब कुछ खाली और टूटा हुआ लगता है, परमेश्वर चुपचाप कुछ नया रच रहे होते हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम्हारे किसी दोस्त का दिल दुखी है? रूत की तरह उसके पास रहो, उसे अकेला मत छोड़ो। और जब तुम्हारा अपना दिल भारी हो, नाओमी की तरह परमेश्वर को सच बता सकते हो, जैसा महसूस होता है वैसा ही।

बात करें

अगर तुम रूत की जगह होते, तो क्या तुम भी नाओमी के साथ जाना चुनते?

नाओमी अपनी उदासी छिपाती नहीं थी। तुम अपनी उदासी परमेश्वर को कैसे बता सकते हो?

साथ मिलकर प्रार्थना

हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते। जैसे रूत ने नाओमी का साथ दिया, वैसे ही हमें भी अपने दोस्तों का सच्चा साथी बनने में मदद दीजिए। जब हमारा दिल दुखी हो, हमें आपके पास आने का साहस दीजिए। आमीन।

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रूत 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रूत 1 किस विषय में है?
बहुत समय पहले, जब न्यायी लोग इस्राएल पर राज्य करते थे, तब देश में अकाल पड़ा। खेतों में अनाज नहीं उगा। रोटी नहीं मिली। बैतलहम शहर से एलीमेलेक नाम का एक आदमी अपनी पत्नी नाओमी और अपने दो बेटों को लेकर दूर देश मोआब चला गया। वहाँ शायद भोजन मिल जाए, उसने सोचा।
रूत 1 क्या कहता है?
एक दिन नाओमी ने सुना कि यहोवा ने अपने लोगों को फिर से भोजन दिया है। उसने कहा, "अब मुझे अपने देश लौट जाना चाहिए।" वह चल पड़ी, और ओर्पा और रूत भी उसके साथ चलीं। रास्ते में नाओमी रुक गई और बोली, "तुम दोनों अपने-अपने घर लौट जाओ। यहोवा तुम पर कृपा करे।" वह उनसे बहुत प्यार करती थी, पर वह जानती थी कि उसके पास उन्हें देने के लिए कुछ नहीं बचा।
रूत 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्या तुमने कभी सोचा, रूत को लौट जाना कितना आसान होता? उसका अपना घर था, अपने लोग थे, अपना देवता था। पर रूत ने कुछ ऐसा कहा जो बहुत साहसी था। उसने कहा, "जिधर तू जाएगी उधर मैं भी जाऊँगी। तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।" क्या तुम ऐसा साहस दिखा पाते?
बच्चे रूत 1 से क्या सीख सकते हैं?
जब दोनों बैतलहम पहुँचीं, तो पूरे शहर में हलचल मच गई। स्त्रियाँ पूछने लगीं, "क्या यह नाओमी है?" नाओमी ने उदास होकर जवाब दिया, "मुझे मारा कहो, क्योंकि सर्वशक्तिमान ने मुझे बड़ा दुःख दिया है। मैं भरी पूरी गई थी, यहोवा ने मुझे खाली हाथ लौटाया है।" नाओमी का दिल टूटा हुआ था, और उसने अपनी सच्ची तकलीफ को छिपाया नहीं।
रूत 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हारे किसी दोस्त का दिल दुखी है? रूत की तरह उसके पास रहो, उसे अकेला मत छोड़ो। और जब तुम्हारा अपना दिल भारी हो, नाओमी की तरह परमेश्वर को सच बता सकते हो, जैसा महसूस होता है वैसा ही।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

नाओमी उन्हें दूर भेज रही है, फिर भी पुकारती है "हे मेरी बेटियों।" यह ठुकराना नहीं, यह खाली हाथों का प्रेम है। वह कहती है, "क्या मेरी कोख में और पुत्र हैं जो तुम्हारे पति हों?" यानी मेरे पास तुम्हें देने को कुछ नहीं बचा।

पर रूत इसलिए नहीं रुकी कि नाओमी उसे कुछ दे सकती थी। कभी सोचा है, लोग आपसे तब भी जुड़े रहें जब आपके हाथ खाली हों, यह कैसा रिश्ता होता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

नाओमी बेथलेहम से इसलिए निकली थी कि रोटी नहीं थी। अब मोआब में उसके कानों तक खबर पहुँची, "यहोवा ने अपनी प्रजा की सुधि लेकर उन्हें भोजनवस्तु दी है।" और लिखा है कि वह "उठी"। सुनना और उठना, दोनों साथ चले।

तुमने भी परमेश्वर की भलाई की खबर सुनी है। पर क्या तुम अब भी वहीं बैठे हो, जहाँ अकाल ने तुम्हें छोड़ा था?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

नाओमी के पास देने को कुछ नहीं बचा था। न पति, न बेटे, न रोटी। फिर भी वह कहती है, "यहोवा ऐसा करे कि तुम फिर अपने अपने पति के घर में विश्राम पाओ।" खाली हाथ, पर आशीष से भरा मुँह। फिर उसने उन्हें चूमा और वे रोने लगीं। जब आपके पास देने को कुछ न हो, तब भी आप किसी के लिए विश्राम माँग सकते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

एलीमेलेक नाम का अर्थ है, "मेरा परमेश्वर राजा है।" और यही आदमी रोटी के घर बैतलहम से निकलकर मोआब चला जाता है। वचन कहता है, "वे मोआब देश में जाकर वहीं रहे।" कुछ दिनों की सोच थी, पर "वहीं रहे" बन गई। सोचो, कौन सा छोटा समझौता, जो तुमने थोड़े समय के लिए किया था, अब तुम्हारा स्थायी पता बन चुका है?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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