3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

रूत 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

बहुत समय पहले की बात है। एक देश था, जिसका नाम था यहूदा। वहाँ एक छोटा सा गाँव था, बैतलहम। वहाँ रोटी नहीं थी। खाना नहीं था। सब लोगों के पेट खाली थे।

वहाँ एक परिवार रहता था। पापा का नाम था एलीमेलेक। मम्मी का नाम था नाओमी। और उनके दो बेटे थे। पापा ने कहा, "यहाँ खाना नहीं है। चलो हम दूसरे देश जाएँ।" वे मोआब देश में गए।

पर वहाँ बहुत दुःख हुआ। पापा एलीमेलेक बीमार होकर मर गए। नाओमी बहुत रोई। फिर दोनों बेटों की शादी हो गई। एक बहू का नाम था ओर्पा। दूसरी बहू का नाम था रूत।

पर फिर, दोनों बेटे भी मर गए। नाओमी अकेली रह गई। बहुत, बहुत अकेली। उसका दिल टूट गया था।

एक दिन नाओमी ने सुना, "बैतलहम में फिर से रोटी है! परमेश्वर ने अपने लोगों को खाना दिया है।" नाओमी ने कहा, "मैं घर जाऊँगी।"

रूत और ओर्पा भी साथ चलीं। पर नाओमी ने कहा, "मेरी बेटियों, तुम अपने घर लौट जाओ।" ओर्पा ने नाओमी को गले लगाया, चूमा, और चली गई।

पर रूत? रूत ने नाओमी का हाथ कसकर पकड़ लिया। उसने कहा, "नहीं! जहाँ आप जाएँगी, वहाँ मैं भी जाऊँगी। आपके लोग मेरे लोग होंगे। आपका परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।"

नाओमी और रूत साथ चलीं। लंबा, लंबा रास्ता। जब वे बैतलहम पहुँचीं, तो सब लोग हैरान हो गए। "अरे, यह नाओमी है क्या?"

What Does This Mean?

नाओमी बहुत उदास थी। उसका दिल भारी था। पर परमेश्वर ने उसे अकेला नहीं छोड़ा। रूत उसके साथ थी। और परमेश्वर भी उसके साथ थे। जब हम रोते हैं, तब भी परमेश्वर हमें देखते हैं।

The Common Thread

रूत ने कहा, "मैं आपको कभी नहीं छोड़ूँगी।" यह कितनी सुंदर बात है! प्रभु यीशु भी हमसे कहते हैं, "मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा।" यीशु हमारा सबसे अच्छा दोस्त हैं। वे हमेशा, हमेशा साथ रहते हैं।

और जानते हो? रूत आगे चलकर यीशु के परिवार की दादी-नानी बनी! परमेश्वर ने रूत के दुःख से भी कुछ सुंदर बनाया।

For You

कभी-कभी हम भी उदास होते हैं। शायद कोई गिर गया। शायद मम्मी दूर गई। शायद कोई खिलौना टूट गया। पर परमेश्वर हमें देखते हैं। वे हमारे साथ हैं। हम अकेले नहीं हैं। कभी नहीं।

Talk About It

नाओमी क्यों उदास थी? क्या तुम भी कभी उदास होते हो?

रूत ने नाओमी को नहीं छोड़ा। तुम्हारे साथ कौन-कौन हमेशा रहता है?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप मुझे देखते हैं। धन्यवाद कि जब मैं उदास हूँ, तब भी आप मेरे साथ हैं। धन्यवाद यीशु के लिए, जो मेरे दोस्त हैं। आमीन।

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रूत 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रूत 1 किस विषय में है?
बहुत समय पहले की बात है। एक देश था, जिसका नाम था यहूदा। वहाँ एक छोटा सा गाँव था, बैतलहम। वहाँ रोटी नहीं थी। खाना नहीं था। सब लोगों के पेट खाली थे।
रूत 1 क्या कहता है?
पर फिर, दोनों बेटे भी मर गए। नाओमी अकेली रह गई। बहुत, बहुत अकेली। उसका दिल टूट गया था।
रूत 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पर रूत? रूत ने नाओमी का हाथ कसकर पकड़ लिया। उसने कहा, "नहीं! जहाँ आप जाएँगी, वहाँ मैं भी जाऊँगी। आपके लोग मेरे लोग होंगे। आपका परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।"
नन्हे बच्चे रूत 1 से क्या सीख सकते हैं?
रूत ने कहा, "मैं आपको कभी नहीं छोड़ूँगी।" यह कितनी सुंदर बात है! प्रभु यीशु भी हमसे कहते हैं, "मैं तुम्हें कभी नहीं छोड़ूँगा।" यीशु हमारा सबसे अच्छा दोस्त हैं। वे हमेशा, हमेशा साथ रहते हैं।
रूत 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
रूत ने नाओमी को नहीं छोड़ा। तुम्हारे साथ कौन-कौन हमेशा रहता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

नाओमी उन्हें दूर भेज रही है, फिर भी पुकारती है "हे मेरी बेटियों।" यह ठुकराना नहीं, यह खाली हाथों का प्रेम है। वह कहती है, "क्या मेरी कोख में और पुत्र हैं जो तुम्हारे पति हों?" यानी मेरे पास तुम्हें देने को कुछ नहीं बचा।

पर रूत इसलिए नहीं रुकी कि नाओमी उसे कुछ दे सकती थी। कभी सोचा है, लोग आपसे तब भी जुड़े रहें जब आपके हाथ खाली हों, यह कैसा रिश्ता होता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

नाओमी बेथलेहम से इसलिए निकली थी कि रोटी नहीं थी। अब मोआब में उसके कानों तक खबर पहुँची, "यहोवा ने अपनी प्रजा की सुधि लेकर उन्हें भोजनवस्तु दी है।" और लिखा है कि वह "उठी"। सुनना और उठना, दोनों साथ चले।

तुमने भी परमेश्वर की भलाई की खबर सुनी है। पर क्या तुम अब भी वहीं बैठे हो, जहाँ अकाल ने तुम्हें छोड़ा था?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

नाओमी के पास देने को कुछ नहीं बचा था। न पति, न बेटे, न रोटी। फिर भी वह कहती है, "यहोवा ऐसा करे कि तुम फिर अपने अपने पति के घर में विश्राम पाओ।" खाली हाथ, पर आशीष से भरा मुँह। फिर उसने उन्हें चूमा और वे रोने लगीं। जब आपके पास देने को कुछ न हो, तब भी आप किसी के लिए विश्राम माँग सकते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

एलीमेलेक नाम का अर्थ है, "मेरा परमेश्वर राजा है।" और यही आदमी रोटी के घर बैतलहम से निकलकर मोआब चला जाता है। वचन कहता है, "वे मोआब देश में जाकर वहीं रहे।" कुछ दिनों की सोच थी, पर "वहीं रहे" बन गई। सोचो, कौन सा छोटा समझौता, जो तुमने थोड़े समय के लिए किया था, अब तुम्हारा स्थायी पता बन चुका है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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