रूत 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
रूत और नाओमी बैतलहम में लौट आई थीं, लेकिन उनके पास खाने के लिए कुछ खास नहीं था। दोनों विधवा थीं और गरीब भी। तब रूत ने नाओमी से कहा कि वह किसी खेत में जाकर बालें बीनेगी, यानी जो अनाज कटनेवाले पीछे छोड़ जाते हैं, वह उठा लेगी। यह गरीबों के लिए इस्राएल में एक अनुमति थी, कोई भीख नहीं बल्कि मेहनत का काम। रूत जिस खेत में गई, वह संयोग से बोअज का खेत था, जो एलीमेलेक का कुटुम्बी और एक धनी आदमी था।
बोअज ने रूत को देखा और उसके बारे में पूछा। जब उसे बताया गया कि यह वही मोआबिन है जो नाओमी के साथ आई है, तो उसने रूत से सीधे बात की। उसने उससे कहा कि वह किसी दूसरे खेत में न जाए, बल्कि उसी के खेत में बीनती रहे, और जवानों को आज्ञा दी कि वे उसे तंग न करें। दोपहर के खाने में उसने रूत को अपने साथ रोटी और भुनी हुई बालें खाने दी। रूत ने आदर से भूमि तक झुककर पूछा कि उसने उस पर, एक परदेशी पर, यह अनुग्रह की दृष्टि क्यों की है। बोअज ने उत्तर दिया कि उसने सुना है कि रूत ने अपनी सास के लिए अपना घर और देश छोड़ा है, और उसने प्रार्थना की कि यहोवा उसे इसका फल दे।
शाम को रूत के पास जौ का पूरा एक एपा, यानी लगभग बीस किलो अनाज था, क्योंकि बोअज ने अपने जवानों को गुप्त रूप से आज्ञा दी थी कि वे कुछ बालें उसके लिये गिरा दें। जब नाओमी ने यह देखा, तो उसने पूछा कि यह किसने किया, और जब उसने बोअज का नाम सुना, तो वह पहचान गई कि यह आदमी उनका कुटुम्बी है, जिसे भूमि छुड़ाने का अधिकार है।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय दिखाता है कि परमेश्वर छोटी, रोज़ की चीज़ों के बीच काम करते हैं। रूत का किसी और खेत में नहीं, बल्कि बोअज के खेत में जाना कोई मामूली संयोग नहीं लगता, भले ही पाठ खुद यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने ऐसा किया। कभी-कभी बाइबल यह खुला छोड़ देती है कि किस हद तक कुछ संयोग है और किस हद तक परमेश्वर की अगुवाई है, और यह सवाल हमें भी सोचने पर छोड़ देता है।
बोअज केवल दयालु नहीं है, वह न्यायी भी है। वह जानता है कि गरीब और परदेशी के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, और वह अपने अधिकार का उपयोग रूत की भलाई के लिए करता है। रूत की तरफ से हम देखते हैं कि वह विनम्र है पर डरपोक नहीं, वह मेहनत करती है और आदर से बोलती है।
बड़ी कहानी से संबंध
बोअज ने कहा, "इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है।" यह शब्द याद दिलाते हैं कि परमेश्वर ने इस्राएल से एक वाचा, यानी एक पक्का वादा किया था, कि वे उनकी प्रजा और उनके बीच रहनेवाले परदेशियों की भी परवाह करेंगे। रूत एक मोआबिन थी, बाहर की स्त्री, फिर भी परमेश्वर के पंखों के तले जगह पाती है। यही आगे बड़ी कहानी में भी दिखता है, कि परमेश्वर के परिवार में बाहर के लोगों के लिए भी जगह है। बोअज, जो कुटुम्बी और भूमि छुड़ानेवाला कहा जाता है, आगे के अध्यायों में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, और यीशु मसीह उसी परिवार से आगे जन्म लेंगे।
तुम्हारे लिए
तुम कभी सोचते हो कि तुम्हारे स्कूल में या घर में कोई अकेला या नया महसूस कर रहा है? बोअज ने रूत को अपने बराबर जगह दी, हालाँकि वह पूरी तरह उसे जानता नहीं था। तुम भी किसी को अपनी मेज़ पर, अपने खेल में, अपनी बातचीत में जगह दे सकते हो। रूत की मेहनत भी याद रखने लायक है, वह शिकायत नहीं करती बल्कि सुबह से शाम तक काम करती है। परमेश्वर हमारी रोज़ की मेहनत और हमारी दयालुता, दोनों को देखते हैं।
आपस में बात करें
बोअज ने रूत को अपने खेत में जगह दी, हालाँकि वह उसे ठीक से जानता नहीं था। तुम किसी नए या अकेले व्यक्ति को कैसे जगह दे सकते हो?
पाठ यह साफ नहीं बताता कि रूत का बोअज के खेत में जाना संयोग था या परमेश्वर की अगुवाई। तुम्हें क्या लगता है?
मिलकर प्रार्थना करें
प्रभु, धन्यवाद कि आप रूत जैसी परदेशी और बोअज जैसे दयालु आदमी की परवाह करते थे। हमें भी वैसी आँखें दें, जो अकेले लोगों को देख सकें, और वैसा दिल, जो मेहनत से भागे नहीं। आमीन।
रूत 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
रूत 2 किस विषय में है?
रूत 2 क्या कहता है?
रूत 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे रूत 2 से क्या सीख सकते हैं?
रूत 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
रूत भूखी थी, पर उसने भीख नहीं माँगी। उसने कहा, "मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जिसकी दृष्टि में मैं अनुग्रह पाऊँ उसके पीछे-पीछे मैं बालें बीनती जाऊँ।" वह गिरी हुई बालें बीनने निकली, वही जो कटाई वाले छोड़ जाते थे। परदेशी, विधवा, खाली हाथ, फिर भी उठकर चल पड़ी।
तेरी कमी तुझे बैठा देती है या उठा देती है? परमेश्वर अक्सर उसी खेत में मिलता है जहाँ तू काम करने जाता है।
बोअज ने रूत से यह नहीं कहा कि जाकर पानी भर ला। उसने कहा, "जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू घड़ों के पास जाकर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।" एक परदेशी विधवा, जिसे सेवा करनी चाहिए थी, अब सेवा पा रही है। और एक बात और, "क्या मैंने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझको न छूएँ?" सुरक्षा पहले, फिर रोटी। परमेश्वर तेरी भी चिंता ऐसे ही करता है।
बोअज़ खेत पर पहुँचते ही काम की जाँच नहीं करता, वह कहता है, "यहोवा तुम्हारे संग रहे।" और मज़दूर लौटकर कहते हैं, "यहोवा तुझे आशीष दे।" मालिक और मज़दूर के बीच यही पहला वाक्य है। सोचो, तुम्हारे घर में, दफ़्तर में, तुम्हारा पहला वाक्य क्या होता है? जहाँ परमेश्वर का नाम रोज़ के अभिवादन में बसता है, वहीं रूत को शरण मिलती है।
नाओमी, जिसने कुछ ही दिन पहले कहा था कि मुझे मारा कहो, अब कहती है, "हे मेरी बेटी।" कड़वाहट के बीच भी उसके भीतर माँ का दिल जीवित था। वह सोचती है कि रूत किस खेत में जाए, किसके साथ रहे, कहाँ सुरक्षित रहेगी। तेरा दुःख तुझसे दूसरों की फ़िक्र छीन ले, यह ज़रूरी नहीं। कई बार चंगाई तब शुरू होती है जब हम किसी और की सुरक्षा की चिन्ता करने लगते हैं।
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