3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

रूत 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

बड़े परमेश्वर की कहानी

व्याख्या

सुबह हुई। सूरज निकला। रूत उठी।

रूत ने नाओमी से कहा, "मुझे खेत में जाने दो।" वहाँ गिरी हुई बालें बीनने के लिए।

नाओमी ने कहा, "जा, बेटी।"

रूत चली। वह एक खेत में पहुँची। वहाँ बहुत सारी सुनहरी बालें बिखरी थीं। यह खेत बोअज़ का था। बोअज़ नाओमी का कुटुम्बी था। एक भला आदमी।

बोअज़ खेत में आया। उसने काम करनेवालों से कहा, "परमेश्वर तुम्हारे साथ रहें।"

फिर उसने रूत को देखा। उसने पूछा, "यह कौन है?"

एक सेवक बोला, "यह रूत है। नाओमी के साथ आई है।"

इसका क्या अर्थ है?

बोअज़ रूत के पास गया। उसने कोमलता से कहा, "बेटी, सुन। यहीं मेरे खेत में बीनना। और जब प्यास लगे, पानी पी लेना।"

रूत चकित हुई। वह झुकी, मुँह के बल गिरी। उसने पूछा, "आपने मुझ परदेशिन पर इतनी दया क्यों की?"

बोअज़ मुस्कुराया। उसने कहा, "मैंने सुना है, तूने अपनी सास की कितनी देखभाल की है। परमेश्वर तुझे इसका फल दें।"

दोपहर हुई। भूख लगी। बोअज़ ने रूत को रोटी दी। भुनी हुई बालें भी दीं। रूत ने खाया। खूब खाया। पेट भर गया। फिर भी कुछ बचा रहा।

समान सूत्र

बोअज़ ने चुपचाप एक और काम किया। उसने अपने सेवकों से कहा, "मुट्ठी भर बालें गिरा देना। रूत के लिए। और उसे मत डाँटना।"

बोअज़ ने रूत को छिपकर मदद दी। उसने उसे प्यार से भरपूर दिया।

परमेश्वर भी ऐसे ही हैं। वे हमें देखते हैं। वे चुपचाप हमारी मदद करते हैं। जब हमें कुछ चाहिए होता है, परमेश्वर देते हैं। भरपूर देते हैं

शाम हुई। रूत ने अपना अनाज तौला। बहुत सारा जौ निकला! वह घर गई। नाओमी को दिखाया।

नाओमी की आँखें चमक उठीं। उसने पूछा, "यह किसके खेत में बीना?"

रूत बोली, "बोअज़ के खेत में।"

नाओमी खुश हुई। बहुत खुश। उसने कहा, "परमेश्वर उसे आशीष दें! वह तो हमारा कुटुम्बी है।"

आपके लिए

क्या तुमने कभी देखा, किसी ने चुपचाप तुम्हारी मदद की हो? शायद अम्मा ने, या पापा ने।

परमेश्वर भी वैसे ही हैं। वे तुम्हें देखते हैं। वे तुम्हें प्यार करते हैं। जैसे बोअज़ ने रूत का ध्यान रखा, वैसे ही परमेश्वर तुम्हारा ध्यान रखते हैं

रूत अकेली नहीं थी। परमेश्वर उसके साथ थे। तुम भी अकेले नहीं हो।

बात करें

तुम्हें क्या लगता है, रूत को खेत में बालें मिलीं तो कैसा लगा होगा?

बोअज़ ने रूत की मदद कैसे की?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आपने रूत का ध्यान रखा। हमारा भी ध्यान रखिए। हमें भी भरपूर दीजिए। जैसे बोअज़ ने रूत को दिया। धन्यवाद, क्योंकि आप हमसे प्यार करते हैं। आमीन।

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रूत 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रूत 2 किस विषय में है?
रूत ने नाओमी से कहा, "मुझे खेत में जाने दो।" वहाँ गिरी हुई बालें बीनने के लिए।
रूत 2 क्या कहता है?
रूत चकित हुई। वह झुकी, मुँह के बल गिरी। उसने पूछा, "आपने मुझ परदेशिन पर इतनी दया क्यों की?"
रूत 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बोअज़ ने रूत को छिपकर मदद दी। उसने उसे प्यार से भरपूर दिया।
नन्हे बच्चे रूत 2 से क्या सीख सकते हैं?
नाओमी खुश हुई। बहुत खुश। उसने कहा, "परमेश्वर उसे आशीष दें! वह तो हमारा कुटुम्बी है।"
रूत 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें क्या लगता है, रूत को खेत में बालें मिलीं तो कैसा लगा होगा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

रूत भूखी थी, पर उसने भीख नहीं माँगी। उसने कहा, "मुझे किसी खेत में जाने दे, कि जिसकी दृष्टि में मैं अनुग्रह पाऊँ उसके पीछे-पीछे मैं बालें बीनती जाऊँ।" वह गिरी हुई बालें बीनने निकली, वही जो कटाई वाले छोड़ जाते थे। परदेशी, विधवा, खाली हाथ, फिर भी उठकर चल पड़ी।

तेरी कमी तुझे बैठा देती है या उठा देती है? परमेश्वर अक्सर उसी खेत में मिलता है जहाँ तू काम करने जाता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

बोअज ने रूत से यह नहीं कहा कि जाकर पानी भर ला। उसने कहा, "जब जब तुझे प्यास लगे, तब तब तू घड़ों के पास जाकर जवानों का भरा हुआ पानी पीना।" एक परदेशी विधवा, जिसे सेवा करनी चाहिए थी, अब सेवा पा रही है। और एक बात और, "क्या मैंने जवानों को आज्ञा नहीं दी, कि तुझको न छूएँ?" सुरक्षा पहले, फिर रोटी। परमेश्वर तेरी भी चिंता ऐसे ही करता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

बोअज़ खेत पर पहुँचते ही काम की जाँच नहीं करता, वह कहता है, "यहोवा तुम्हारे संग रहे।" और मज़दूर लौटकर कहते हैं, "यहोवा तुझे आशीष दे।" मालिक और मज़दूर के बीच यही पहला वाक्य है। सोचो, तुम्हारे घर में, दफ़्तर में, तुम्हारा पहला वाक्य क्या होता है? जहाँ परमेश्वर का नाम रोज़ के अभिवादन में बसता है, वहीं रूत को शरण मिलती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

नाओमी, जिसने कुछ ही दिन पहले कहा था कि मुझे मारा कहो, अब कहती है, "हे मेरी बेटी।" कड़वाहट के बीच भी उसके भीतर माँ का दिल जीवित था। वह सोचती है कि रूत किस खेत में जाए, किसके साथ रहे, कहाँ सुरक्षित रहेगी। तेरा दुःख तुझसे दूसरों की फ़िक्र छीन ले, यह ज़रूरी नहीं। कई बार चंगाई तब शुरू होती है जब हम किसी और की सुरक्षा की चिन्ता करने लगते हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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