7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

श्रेष्ठगीत 7

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

श्रेष्ठगीत एक गीत है, एक कविता। और अध्याय 7 में दूल्हा अपनी दुल्हन के बारे में गाता है। वह पाँवों से शुरू करता है और सिर तक पहुँचता है, जैसे कोई किसी चित्र को धीरे-धीरे निहारता है।

उसकी तुलनाएँ हमें अजीब लग सकती हैं। "तेरा गला हाथी दाँत का मीनार है।" किसी की नाक की तुलना लबानोन के मीनार से? आज कोई ऐसा कहे तो हम हँस पड़ेंगे। पर उस समय ये सबसे ऊँची तारीफ़ें थीं। मीनार का मतलब था: मज़बूत, सीधी, गरिमा से भरी। कर्मेल एक हरा-भरा सुंदर पहाड़ था। बैंगनी रंग का कपड़ा इतना महँगा था कि केवल राजा उसे पहनते थे। यानी दूल्हा कह रहा है: तू शाही है, तू शानदार है, तू ख़ास है।

फिर पद 5 में कुछ हैरान करने वाला होता है: "राजा उन लटाओं में बँधुआ हो गया हैं।" वह राजा है, उसके पास शक्ति है, फ़ौज है। पर वहाँ वह उसके बालों में उलझे हुए एक बंदी की तरह खड़ा है। प्रेम ने उसे पकड़ लिया है।

वह उसे खजूर के पेड़ से तुलना करता है, ऊँचा और शानदार। उसकी श्वास की सुगंध सेबों जैसी। उसके चुम्बन उत्तम दाखमधु जैसे।

और तब पद 10 में आवाज़ बदल जाती है। अब दुल्हन बोलती है: "मैं अपनी प्रेमी की हूँ। और उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है।" वह चुपचाप सुनने वाली नहीं है। वह भी बोलती है, और वह उसे बुलाती है: आ, खेतों में चलें, गाँवों में रहें, सवेरे दाख की बारियों में जाकर देखें कि कलियाँ लगी हैं या नहीं, अनार फूले हैं या नहीं। वहाँ मैं तुझको अपना प्रेम दिखाऊँगी। और वह कहती है कि उसने द्वारों पर फल इकट्ठे रखे हैं, नये और पुराने, अपने प्रेमी के लिये।

ईमानदारी से एक बात: इस अध्याय में शरीर के बारे में इतनी खुलकर बातें हैं कि पढ़ते हुए तुम्हें हँसी आ सकती है, या शर्म लग सकती है। यह ठीक है। यह गंदा नहीं है। बाइबल यह कहने से नहीं डरती कि एक पति और पत्नी एक-दूसरे को सुंदर पाते हैं। और कुछ चित्र हमें आज पूरी तरह समझ नहीं आते। हेशबोन के कुण्ड कैसे दिखते थे, हम ठीक-ठीक नहीं जानते। बाइबल पढ़ने वाले बड़े-बड़े जानकार भी इस पर एकमत नहीं हैं। ऐसे सवाल पूछना ग़लत नहीं है।

इसका अर्थ क्या है?

परमेश्वर का वचन केवल नियमों, लड़ाइयों और प्रार्थनाओं से भरा नहीं है। उसमें एक प्रेमगीत भी है। इसका मतलब कुछ बड़ा है: परमेश्वर ने शरीर बनाया, और वे उससे शरमाते नहीं। उन्होंने प्रेम बनाया, और उन्होंने उसे अच्छा कहा।

ध्यान दो कि यहाँ प्रेम एकतरफ़ा नहीं है। वह उसकी तारीफ़ करता है, और वह कहती है: मैं उसकी हूँ, और उसकी चाह मेरी ओर बनी रहती है। दोनों देते हैं, कोई किसी पर कब्ज़ा नहीं करता। और दोनों बोलते हैं। यह गीत सिखाता है कि प्रेम चुप नहीं रहता। जो अच्छा है, उसे कहा जाता है।

जोड़ने वाला सूत्र

पूरी बाइबल में परमेश्वर अपने लोगों के साथ अपने रिश्ते को शादी जैसा बताते हैं। भविष्यद्वक्ता इस्राएल को परमेश्वर की दुल्हन कहते हैं। नये नियम में कलीसिया, यानी यीशु मसीह पर विश्वास करने वालों का समूह, मसीह की दुल्हन कहलाती है।

तो यह गीत, जो पहले-पहले एक आदमी और एक औरत का गीत है, हमें कुछ और भी दिखाता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर हमें किस नज़र से देखते हैं। घृणा से नहीं। थके मन से नहीं। जैसे कोई अपने प्रिय को निहारता है।

और वह पद 5 याद है? राजा प्रेम में बँधुआ हो गया। यीशु मसीह राजा हैं, और उन्होंने अपने आप को बाँधने दिया, पकड़वाने दिया, क्रूस तक जाने दिया। प्रेम के कारण। दुल्हन के शब्द हमारे भी शब्द बन सकते हैं: मैं अपने प्रभु की हूँ, और वे मुझे चाहते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम्हारी उम्र में शरीर बदलने लगता है, और उसके बारे में बात करना अजीब लगता है। यह अध्याय तुमसे कहता है: तुम्हारा शरीर शर्म की बात नहीं है। परमेश्वर ने उसे बनाया है, और वे उसे सुंदर कहते हैं।

दूसरी बात: तारीफ़ करना सीखो। हम चिढ़ाने में तेज़ होते हैं और तारीफ़ में धीमे। आज किसी को ज़ोर से कहो कि उसमें क्या अच्छा है, अपनी माँ को, अपने दोस्त को, अपने भाई को।

और तीसरी बात: दुल्हन कहती है कि उसने फल इकट्ठे रखे हैं, अपने प्रेमी के लिये। कुछ चीज़ें बचाकर रखने लायक होती हैं, सही समय और सही जगह के लिये। जब लोग शरीर और प्रेम को मज़ाक बना देते हैं, तो तुम जानते हो कि बाइबल इसके बारे में कहीं ज़्यादा सुंदर ढंग से बोलती है।

इस पर बात करो

जब तुमने यह अध्याय पढ़ा, तो तुम्हें कैसा लगा? हँसी, शर्म, हैरानी? और तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर ने ऐसा गीत बाइबल में क्यों रहने दिया?

पद 10 कहता है: "मैं अपनी प्रेमी की हूँ।" अगर तुम यह परमेश्वर के बारे में कहो, कि मैं उनका हूँ और वे मुझे चाहते हैं, तो इससे क्या फ़र्क पड़ता है?

मिलकर प्रार्थना

हे परमेश्वर, आपने प्रेम बनाया और आपने हमें बनाया। धन्यवाद कि आप हमारे शरीर से नहीं शरमाते, और हमसे भी नहीं। हमें सिखाइए कि हम अच्छी बातें ज़ोर से कहें। और धन्यवाद कि यीशु मसीह ने प्रेम के कारण अपने आप को बँधने दिया। हम आपके हैं। आमीन।

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श्रेष्ठगीत 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

श्रेष्ठगीत 7 किस विषय में है?
श्रेष्ठगीत एक गीत है, एक कविता। और अध्याय 7 में दूल्हा अपनी दुल्हन के बारे में गाता है। वह पाँवों से शुरू करता है और सिर तक पहुँचता है, जैसे कोई किसी चित्र को धीरे-धीरे निहारता है।
श्रेष्ठगीत 7 क्या कहता है?
और तब पद 10 में आवाज़ बदल जाती है। अब दुल्हन बोलती है: "मैं अपनी प्रेमी की हूँ। और उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है।" वह चुपचाप सुनने वाली नहीं है। वह भी बोलती है, और वह उसे बुलाती है: आ, खेतों में चलें, गाँवों में रहें, सवेरे दाख की बारियों में जाकर देखें कि कलियाँ लगी हैं या नहीं, अनार फूले हैं या नहीं। वहाँ मैं तुझको अपना प्रेम दिखाऊँगी। और वह कहती है कि उसने द्वारों पर फल इकट्ठे रखे हैं, नये और पुराने, अपने प्रेमी के लिये।
श्रेष्ठगीत 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पूरी बाइबल में परमेश्वर अपने लोगों के साथ अपने रिश्ते को शादी जैसा बताते हैं। भविष्यद्वक्ता इस्राएल को परमेश्वर की दुल्हन कहते हैं। नये नियम में कलीसिया, यानी यीशु मसीह पर विश्वास करने वालों का समूह, मसीह की दुल्हन कहलाती है।
बच्चे श्रेष्ठगीत 7 से क्या सीख सकते हैं?
दूसरी बात: तारीफ़ करना सीखो। हम चिढ़ाने में तेज़ होते हैं और तारीफ़ में धीमे। आज किसी को ज़ोर से कहो कि उसमें क्या अच्छा है, अपनी माँ को, अपने दोस्त को, अपने भाई को।
श्रेष्ठगीत 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आपने प्रेम बनाया और आपने हमें बनाया। धन्यवाद कि आप हमारे शरीर से नहीं शरमाते, और हमसे भी नहीं। हमें सिखाइए कि हम अच्छी बातें ज़ोर से कहें। और धन्यवाद कि यीशु मसीह ने प्रेम के कारण अपने आप को बँधने दिया। हम आपके हैं। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 13

नये और पुराने भी, जो, हे मेरे प्रेमी, मैंने तेरे लिये रख छोड़े हैं।" प्रेम का सबसे कोमल रूप यही है, किसी के लिए कुछ बचाकर रखना। न सिर्फ आज की ताज़ा खुशी, बल्कि बरसों से सँभाली हुई बातें भी। सोचो, तुम्हारे जीवन में परमेश्वर के लिए क्या रखा है? या जो बचता है, वही उसे मिलता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

हे मेरे प्रेमी, आ, हम खेतों में निकल चलें और गाँवों में रात बिताएँ।" प्रेमिका बुलाती है, पर किसी ऊँची जगह नहीं, बस खुले खेतों और छोटे गाँवों में। प्यार को महँगी जगहें नहीं, साथ बिताया गया बिना जल्दबाजी का समय चाहिए। सोचो, जिनसे तुम प्रेम करते हो, क्या तुमने उन्हें आख़िरी बार कब कहा था, चलो, कहीं चलें?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

तेरा पेट गेहूँ का ढेर है जिसके चारों ओर सोसन फूल हों।" प्रेमी अपनी प्रिया की सुंदरता को खेत और फसल की भाषा में कहता है, ऐसी सुंदरता जो सिर्फ देखने की नहीं, जीवन देने वाली है। ध्यान दे, उसकी बात कितनी खास और ठोस है, कोई ठंडी तारीफ नहीं। तू जिनसे प्रेम करता है, क्या तूने कभी उन्हें इतने साफ शब्दों में बताया कि वे तेरे लिए क्या हैं? बहुत से दिल इसी एक वाक्य के इंतज़ार में सूख जाते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

तेरी दोनों छातियाँ मृग के जुड़वे बच्चों के समान हैं।" दूल्हा अपनी दुल्हन की सुंदरता के लिए हिरण के नन्हे बच्चों की उपमा चुनता है, कुछ कोमल, नाज़ुक, जिसे थामने के लिए हाथ नरम होने चाहिए। परमेश्वर ने अपने वचन में ऐसी बातों के लिए जगह रखी, क्योंकि प्रेम केवल महसूस करने की चीज़ नहीं, कहने की भी चीज़ है। जिससे तू प्रेम करता है, क्या उसने आखिरी बार कब तेरे मुँह से सुना कि वह तेरी नज़रों में सुंदर है?

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