1 पतरस 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक छोटा बच्चा है। वह भूखा है। वह रोता है। उसे दूध चाहिए। मीठा, गरम दूध। पतरस कहते हैं, हम भी ऐसे ही हैं। हमें परमेश्वर की बातें चाहिए, जैसे बच्चे को दूध चाहिए।
अब सुनो एक पत्थर की बात। एक बड़ा, मजबूत पत्थर था। कुछ लोगों ने उसे देखा और कहा, "यह पत्थर काम का नहीं। फेंक दो।" पर परमेश्वर ने वह पत्थर उठाया। वे बोले, "यह पत्थर सबसे अच्छा है। इस पर मैं अपना घर बनाऊँगा।" वह पत्थर यीशु हैं। कोने का सबसे मुख्य पत्थर।
हम भी पत्थरों जैसे हैं। छोटे, जीवित पत्थर। परमेश्वर हम सबको जोड़कर एक घर बना रहे हैं। एक सुंदर घर, जहाँ वे रहते हैं।
इसका मतलब क्या है?
पहले हम कुछ भी नहीं थे। जैसे भेड़ें जो भटक गई हों। दूर, बहुत दूर निकल गई हों। रास्ता भूल गई हों। अकेली, डरी हुई भेड़ें। पर एक चरवाहा आया। वह उन्हें ढूँढता आया। वह चरवाहा यीशु हैं। वे हमें वापस घर ले आए।
कहानी की एक लड़ी
सुनो, यीशु के साथ क्या हुआ। लोगों ने उन्हें मारा। गाली दी। दुःख दिया, बहुत दुःख। पर यीशु ने वापस गाली नहीं दी। चिल्लाए नहीं। धमकाया नहीं। वे शांत रहे। बहुत शांत। क्योंकि वे जानते थे, परमेश्वर सब देख रहे हैं।
फिर यीशु क्रूस पर गए। वहाँ उन्होंने हमारी सारी गलतियाँ अपने ऊपर ले लीं। हमारे लिए, ताकि हम फिर से अच्छे बन सकें। उनके मार खाने से हम चंगे हुए।
तुम्हारे लिए
सोचो, जब कोई तुम्हारा खिलौना छीन ले। या तुम्हें धक्का दे दे। तुम्हें रोना आता है, या मारने का मन करता है, है ना? यीशु के साथ भी ऐसा हुआ था। पर उन्होंने वापस नहीं मारा। वे परमेश्वर के पास गए, और चुप रहे। तुम भी कभी कोशिश करना। जब कोई तुम्हें दुःख दे, चिल्लाओ मत। परमेश्वर से बात करो। वे सुन रहे हैं।
और जब तुम्हें परमेश्वर की बातें सुनने का मन हो, याद रखना, वह वैसे ही अच्छी हैं जैसे मीठा दूध। पीते जाओ, बढ़ते जाओ।
तुम्हें कब गुस्सा आता है? क्या तुम फिर भी शांत रह सकते हो, जैसे यीशु रहे?
चरवाहा भटकी भेड़ को कैसे ढूँढता है? क्या तुम्हें लगता है यीशु तुम्हें भी ढूँढते हैं?
साथ में प्रार्थना
प्रभु यीशु, धन्यवाद कि आप मेरे चरवाहे हैं। मैं भटक जाऊँ तो मुझे ढूँढ लेना। मुझे अपनी अच्छी बातें सिखाओ, जैसे मीठा दूध। मुझे भी शांत रहना सिखाओ। आमीन।
1 पतरस 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 पतरस 2 किस विषय में है?
1 पतरस 2 क्या कहता है?
1 पतरस 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 1 पतरस 2 से क्या सीख सकते हैं?
1 पतरस 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तुम तो भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और अध्यक्ष के पास फिर लौट आए हो।" ध्यान दो, पतरस यह बात सताए जा रहे विश्वासियों से कह रहा है। उनके हालात नहीं बदले, पर उनका चरवाहा मिल गया।
भेड़ रास्ता भूलती है, जानबूझकर नहीं, थोड़ा थोड़ा चरते चरते। और लौटना उसका अपना पराक्रम नहीं होता, चरवाहा ढूँढ़ने निकलता है। आज भी जो तुम्हें खींच रहा है, वह तुम्हारी इच्छाशक्ति नहीं, उसी की आवाज़ है।
नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।" एक नवजात बच्चा दूध माँगने में शर्म नहीं करता, वह रो पड़ता है। पर हम परमेश्वर के वचन के बिना कई दिन चुपचाप निकाल देते हैं। सोचो, आखिरी बार तुम्हारे भीतर वैसी भूख कब जागी थी?
अपने आपको स्वतंत्र जानो पर अपनी इस स्वतंत्रता को बुराई के लिए आड़ न बनाओ, परन्तु अपने आपको परमेश्वर के दास समझकर चलो।" आड़ यानी परदा। कितनी बार हम अपनी मनमानी पर "मसीह में स्वतंत्रता" का परदा डाल देते हैं। पर मसीह ने तुम्हें जंजीरों से इसलिए नहीं छुड़ाया कि तुम खुद के गुलाम बन जाओ। सच्ची आज़ादी वहीं मिलती है जहाँ तुम परमेश्वर के हाथ में खुद को सौंप देते हो।
पतरस पहले यह नहीं कहता कि क्या छोड़ो, पहले यह याद दिलाता है कि तुम कौन हो: "हे प्रियो, मैं तुमसे विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से बचे रहो, जो आत्मा से लड़ती हैं।" यात्री अपना सारा सामान नहीं खोलता, क्योंकि उसे आगे बढ़ना है। सोचो, जिस चीज़ को तुम कसकर पकड़े हो, क्या वह तुम्हें यहीं बसा तो नहीं रही?
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