3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

2 इतिहास 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

क्या कहा गया है?

राजा सुलैमान एक बड़े मैदान में खड़े थे। हवा गरम थी। उनकी आँखों में एक सपना था। "मैं परमेश्वर के लिए एक भवन बनाऊँगा," उन्होंने सोचा। बहुत बड़ा भवन। बहुत सुंदर भवन।

सुलैमान ने बहुत से लोगों को बुलाया। सत्तर हज़ार लोग बोझ उठाने के लिए। अस्सी हज़ार लोग पहाड़ से पत्थर काटने के लिए। सब काम में लग गए। हथौड़ों की आवाज़ गूंजती थी। धूल हवा में उड़ती थी।

पर सुलैमान को एक चीज़ और चाहिए थी। लकड़ी। अच्छी, खुशबूदार लकड़ी। देवदार की लकड़ी। उसने दूर देश के राजा हीराम को चिट्ठी भेजी। "मेरे लिए देवदार के पेड़ भेजो," उसने लिखा। "मैं परमेश्वर यहोवा के लिए भवन बना रहा हूँ।"

इसका क्या अर्थ है?

सुलैमान ने लिखा, "यह भवन महान होगा। क्योंकि हमारा परमेश्वर सब से महान हैं।" फिर उसने एक और बात लिखी, "कौन इतना बड़ा भवन बना सकता है, कि परमेश्वर उसमें समा जाएँ? आकाश भी उन्हें नहीं पकड़ सकता।" सुलैमान जानता था, परमेश्वर कितने बड़े हैं। इतने बड़े, कि कोई भवन उन्हें रोक नहीं सकता। फिर भी सुलैमान भवन बनाना चाहता था। एक जगह, जहाँ लोग परमेश्वर से मिल सकें। जहाँ सुगन्धित धूप जलाई जाए। जहाँ रोटी रखी जाए। जहाँ हर सुबह और हर शाम भेंट चढ़ाई जाए।

राजा हीराम ने चिट्ठी पढ़ी। वह खुश हुआ। उसने लिखा, "यहोवा अपनी प्रजा से प्रेम रखते हैं।" फिर उसने एक चतुर कारीगर भेजा। उसका नाम हूराम-अबी था। वह सोने से, चाँदी से, लकड़ी से काम करना जानता था। बड़े जहाज़ों पर लकड़ी के ढेर लादे गए। जहाज़ समुद्र पर तैरते हुए चले। लहरें ऊँची उठती थीं। हवा में नमक की गंध थी। आखिर में सारी लकड़ी यरूशलेम पहुँची।

एक ही धागा

सुलैमान ने परमेश्वर के लिए एक घर बनाया। पर परमेश्वर उस घर में बंद नहीं रहे। बहुत बाद में, परमेश्वर ने एक और तरीका चुना, अपने लोगों के पास आने का। वे खुद हमारे पास आए, एक छोटे बच्चे यीशु मसीह के रूप में। कोई बड़ा भवन नहीं चाहिए था। परमेश्वर खुद चले आए, हमारे बीच रहने को।

तुम्हारे लिए

सुलैमान ने सोचा, परमेश्वर के लिए सबसे अच्छी चीज़ चाहिए। सबसे अच्छी लकड़ी। सबसे चतुर कारीगर। तुम भी परमेश्वर को अपना सबसे अच्छा दे सकते हो। अपनी प्रार्थना। अपना गाना। अपना प्यार। परमेश्वर को यह बहुत भाता है।

आपस में बात करें

सुलैमान ने परमेश्वर के लिए सबसे अच्छी लकड़ी माँगी। तुम परमेश्वर को क्या अच्छा दे सकते हो?

राजा हीराम ने सुलैमान की मदद की। तुम किसकी मदद कर सकते हो?

आइए मिलकर प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, सुलैमान ने आपके लिए घर बनाया। मैं भी आपको अपना प्यार देता हूँ। आप इतने बड़े हैं, और इतने अच्छे हैं। धन्यवाद, कि आप यीशु में मेरे पास आए। आमीन।

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2 इतिहास 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 इतिहास 2 किस विषय में है?
राजा सुलैमान एक बड़े मैदान में खड़े थे। हवा गरम थी। उनकी आँखों में एक सपना था। "मैं परमेश्वर के लिए एक भवन बनाऊँगा," उन्होंने सोचा। बहुत बड़ा भवन। बहुत सुंदर भवन।
2 इतिहास 2 क्या कहता है?
पर सुलैमान को एक चीज़ और चाहिए थी। लकड़ी। अच्छी, खुशबूदार लकड़ी। देवदार की लकड़ी। उसने दूर देश के राजा हीराम को चिट्ठी भेजी। "मेरे लिए देवदार के पेड़ भेजो," उसने लिखा। "मैं परमेश्वर यहोवा के लिए भवन बना रहा हूँ।"
2 इतिहास 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
राजा हीराम ने चिट्ठी पढ़ी। वह खुश हुआ। उसने लिखा, "यहोवा अपनी प्रजा से प्रेम रखते हैं।" फिर उसने एक चतुर कारीगर भेजा। उसका नाम हूराम-अबी था। वह सोने से, चाँदी से, लकड़ी से काम करना जानता था। बड़े जहाज़ों पर लकड़ी के ढेर लादे गए। जहाज़ समुद्र पर तैरते हुए चले। लहरें ऊँची उठती थीं। हवा में नमक की गंध थी। आखिर में सारी लकड़ी यरूशलेम पहुँची।
नन्हे बच्चे 2 इतिहास 2 से क्या सीख सकते हैं?
सुलैमान ने सोचा, परमेश्वर के लिए सबसे अच्छी चीज़ चाहिए। सबसे अच्छी लकड़ी। सबसे चतुर कारीगर। तुम भी परमेश्वर को अपना सबसे अच्छा दे सकते हो। अपनी प्रार्थना। अपना गाना। अपना प्यार। परमेश्वर को यह बहुत भाता है।
2 इतिहास 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
राजा हीराम ने सुलैमान की मदद की। तुम किसकी मदद कर सकते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

मन्दिर बनाने के लिए जो कारीगर चुना गया, उसका परिचय ऐसे दिया गया: "वह एक दानी स्त्री का पुत्र है, और उसका पिता सोरवासी था।" आधा इस्राएली, आधा परदेशी। किसी की नज़र में शायद वह पूरी तरह कहीं का नहीं था, पर उसके हाथ परमेश्वर के भवन को गढ़ रहे थे। तेरी मिलीजुली कहानी तुझे अयोग्य नहीं बनाती। परमेश्वर तेरे हुनर को जानता है, और उसे बुलाने का हक़ भी रखता है।

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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