6 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 इतिहास 2

प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

2 इतिहास अध्याय 2: सुलैमान का बड़ा सपना

The Explanation

सुलैमान इस्राएल का राजा था। उसके मन में एक बड़ा सपना था। वह परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाना चाहता था। एक ऐसा भवन, जहाँ परमेश्वर की उपस्थिति हो और लोग उनकी आराधना करें।

यह कोई छोटा काम नहीं था। सुलैमान ने सत्तर हजार लोगों को बोझ ढोने के लिए ठहराया। अस्सी हजार लोगों को पहाड़ से पत्थर काटने के लिए। और तीन हजार छः सौ मुखियों को, जो इन सब पर नज़र रखते थे। सोचो, कितने लोग, कितनी मेहनत!

सुलैमान को अच्छी लकड़ी चाहिए थी, देवदार की लकड़ी, जो लबानोन के पहाड़ों पर उगती थी। इसलिए उसने सोर के राजा हीराम को एक पत्र भेजा। उसने कहा, "जैसा तूने मेरे पिता दाऊद के लिए किया, वैसा ही मेरे लिए कर।"

सुलैमान ने समझाया कि यह भवन छोटा नहीं होगा। उसने कहा, "जो भवन मैं बनाने पर हूँ, वह महान होगा, क्योंकि हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है।" फिर उसने एक गहरी बात कही, "परन्तु किस में इतनी शक्ति है, कि परमेश्वर के लिये भवन बनाए? वे तो सबसे ऊँचे स्वर्ग में भी नहीं समाते।"

हीराम ने उत्तर में एक चिट्ठी लिखी। उसने लिखा, "धन्य है इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसने दाऊद राजा को एक बुद्धिमान पुत्र दिया है।" हीराम ने एक कुशल कारीगर भेजा, जिसका नाम हूराम-अबी था। वह सोने, चाँदी, लकड़ी और पत्थर के साथ अद्भुत काम करना जानता था।

सुलैमान ने भी अपनी ओर से अनाज, तेल और दाखमधु भेजने का वादा किया। हीराम के मजदूर लकड़ी काटते, उसे समुद्र के रास्ते बेड़ों में बाँधकर भेजते। सुलैमान उन्हें यरूशलेम तक ले जाता। दोनों राजा मिलकर काम कर रहे थे, एक बड़े सपने को सच करने के लिए।

What Does This Mean?

यह सिर्फ ईंट और पत्थर की कहानी नहीं है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की आराधना के लिए सबसे अच्छा देना ज़रूरी है। सुलैमान ने सस्ती लकड़ी नहीं चुनी। उसने सबसे अच्छी लकड़ी, सबसे कुशल कारीगर, और अपना पूरा दिल लगाया।

और ध्यान दो सुलैमान की विनम्रता पर। वह राजा था, फिर भी उसने कहा, "मैं क्या हूँ कि परमेश्वर के लिए भवन बनाऊँ?" वह जानता था कि परमेश्वर इतने बड़े हैं कि पूरा आकाश भी उनके लिए छोटा है। फिर भी परमेश्वर चाहते थे कि उनके लोग उनसे मिलने के लिए एक जगह बनाएँ।

The Common Thread

सुलैमान का भवन परमेश्वर के पास आने का एक रास्ता था। पर बाद में, यीशु मसीह आए और उन्होंने कुछ अद्भुत कहा, कि वे खुद परमेश्वर का भवन हैं। हमें अब पत्थर और देवदार की लकड़ी से भवन बनाने की ज़रूरत नहीं। जो कोई यीशु पर भरोसा करता है, उसमें परमेश्वर का पवित्र आत्मा रहता है। हम खुद परमेश्वर के रहने की जगह बन जाते हैं।

For You

सुलैमान ने परमेश्वर के लिए अपना सबसे अच्छा दिया। तुम भी सोच सकते हो, मैं परमेश्वर को क्या दे सकता हूँ? शायद अपना समय, जब तुम प्रार्थना करते हो। शायद अपनी आवाज़, जब तुम उनकी स्तुति गाते हो। परमेश्वर को आधा मन नहीं, पूरा दिल चाहिए।

Talk About It

सुलैमान ने परमेश्वर के भवन के लिए सबसे अच्छी चीज़ें चुनीं। तुम परमेश्वर को अपना सबसे अच्छा कैसे दे सकते हो?

हीराम और सुलैमान ने मिलकर काम किया। तुम्हारे परिवार या दोस्तों के साथ मिलकर कौन सा अच्छा काम किया जा सकता है?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, सुलैमान ने आपके लिए अपना सबसे अच्छा दिया। हम भी चाहते हैं कि हमारा दिल आपके लिए हो। हमें सिखाएँ कि हम आपको आधा नहीं, पूरा प्यार दें। धन्यवाद कि यीशु मसीह के कारण हम आपके पास आ सकते हैं। आमीन।

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2 इतिहास 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 इतिहास 2 किस विषय में है?
सुलैमान इस्राएल का राजा था। उसके मन में एक बड़ा सपना था। वह परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनाना चाहता था। एक ऐसा भवन, जहाँ परमेश्वर की उपस्थिति हो और लोग उनकी आराधना करें।
2 इतिहास 2 क्या कहता है?
सुलैमान ने समझाया कि यह भवन छोटा नहीं होगा। उसने कहा, "जो भवन मैं बनाने पर हूँ, वह महान होगा, क्योंकि हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है।" फिर उसने एक गहरी बात कही, "परन्तु किस में इतनी शक्ति है, कि परमेश्वर के लिये भवन बनाए? वे तो सबसे ऊँचे स्वर्ग में भी नहीं समाते।"
2 इतिहास 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह सिर्फ ईंट और पत्थर की कहानी नहीं है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की आराधना के लिए सबसे अच्छा देना ज़रूरी है। सुलैमान ने सस्ती लकड़ी नहीं चुनी। उसने सबसे अच्छी लकड़ी, सबसे कुशल कारीगर, और अपना पूरा दिल लगाया।
बच्चे 2 इतिहास 2 से क्या सीख सकते हैं?
सुलैमान ने परमेश्वर के लिए अपना सबसे अच्छा दिया। तुम भी सोच सकते हो, मैं परमेश्वर को क्या दे सकता हूँ? शायद अपना समय, जब तुम प्रार्थना करते हो। शायद अपनी आवाज़, जब तुम उनकी स्तुति गाते हो। परमेश्वर को आधा मन नहीं, पूरा दिल चाहिए।
2 इतिहास 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, सुलैमान ने आपके लिए अपना सबसे अच्छा दिया। हम भी चाहते हैं कि हमारा दिल आपके लिए हो। हमें सिखाएँ कि हम आपको आधा नहीं, पूरा प्यार दें। धन्यवाद कि यीशु मसीह के कारण हम आपके पास आ सकते हैं। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

मन्दिर बनाने के लिए जो कारीगर चुना गया, उसका परिचय ऐसे दिया गया: "वह एक दानी स्त्री का पुत्र है, और उसका पिता सोरवासी था।" आधा इस्राएली, आधा परदेशी। किसी की नज़र में शायद वह पूरी तरह कहीं का नहीं था, पर उसके हाथ परमेश्वर के भवन को गढ़ रहे थे। तेरी मिलीजुली कहानी तुझे अयोग्य नहीं बनाती। परमेश्वर तेरे हुनर को जानता है, और उसे बुलाने का हक़ भी रखता है।

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