3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

2 यूहन्ना 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाना

एक बूढ़े चाचा थे। उनका नाम था यूहन्ना। वे बहुत बूढ़े थे, और बहुत बुद्धिमान भी। यूहन्ना यीशु से बहुत प्रेम करते थे।

यूहन्ना दूर रहते थे। बहुत दूर। वे एक माँ को चिट्ठी लिखना चाहते थे। एक अच्छी माँ, जिसके बच्चे भी थे।

तो यूहन्ना ने कागज़ लिया। और स्याही ली। और लिखने बैठ गए।

"प्यारी बहन," उन्होंने लिखा। "मैं तुझ से बहुत प्रेम करता हूँ। और तेरे बच्चों से भी।"

यूहन्ना मुस्कुराए। क्योंकि उन्होंने एक अच्छी खबर सुनी थी। उस माँ के बच्चे यीशु के रास्ते पर चल रहे थे! वे परमेश्वर की बात मानते थे। यूहन्ना बहुत, बहुत खुश हुए।

"बच्चों," यूहन्ना ने आगे लिखा, "एक दूसरे से प्रेम करो। यह सबसे ज़रूरी बात है।"

फिर यूहन्ना ने कलम रोकी। उन्होंने सोचा। और लिखा: "मैं और भी बहुत कुछ कहना चाहता हूँ। पर कागज़ पर नहीं। मैं खुद आऊँगा। और तुम सबके साथ बैठूँगा। तब हमारा दिल खुशी से भर जाएगा।"

इसका क्या मतलब है?

यूहन्ना ने चिट्ठी भेजी। दूर से। क्योंकि वे उस माँ और बच्चों की बहुत परवाह करते थे।

परमेश्वर भी हमारी परवाह करते हैं। परमेश्वर चाहते हैं कि हम एक दूसरे से प्रेम करें। बिल्कुल जैसे यीशु हमसे प्रेम करते हैं।

बड़ी कहानी

यीशु ने कहा: "एक दूसरे से प्रेम करो।" यूहन्ना ने वही बात लिखी। क्योंकि यूहन्ना यीशु के दोस्त थे।

यीशु सच में आए। इस दुनिया में। हमारे लिए। यीशु ने हमें दिखाया कि प्रेम कैसा होता है।

और यूहन्ना ने लिखा: "मैं खुद आऊँगा।" यह भी यीशु जैसा है। यीशु भी एक दिन फिर आएँगे। और तब हमारा दिल पूरी तरह खुशी से भर जाएगा।

तेरे लिए

क्या तू जानता है कि तू भी परमेश्वर का बच्चा है?

परमेश्वर तुझसे बहुत प्रेम करते हैं। और परमेश्वर खुश होते हैं जब तू भी दूसरों से प्रेम करता है। अपनी माँ से। अपने पापा से। अपने भाई या बहन से। अपने दोस्त से।

आज तू किसी को गले लगा सकता है। या मुस्कुरा सकता है। या कह सकता है: "मैं तुझसे प्रेम करता हूँ।" यह भी परमेश्वर को बहुत खुश करता है।

बातचीत करें

तुझे कैसा लगता है जब कोई तुझ से कहता है, "मैं तुझ से प्रेम करता हूँ"?

आज तू किसको खुश कर सकता है?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

धन्यवाद कि आप मुझ से प्रेम करते हैं। धन्यवाद यीशु के लिए। मुझे सिखाइए कि मैं भी दूसरों से प्रेम करूँ।

आमीन।

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2 यूहन्ना 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 यूहन्ना 1 किस विषय में है?
एक बूढ़े चाचा थे। उनका नाम था यूहन्ना। वे बहुत बूढ़े थे, और बहुत बुद्धिमान भी। यूहन्ना यीशु से बहुत प्रेम करते थे।
2 यूहन्ना 1 क्या कहता है?
"प्यारी बहन," उन्होंने लिखा। "मैं तुझ से बहुत प्रेम करता हूँ। और तेरे बच्चों से भी।"
2 यूहन्ना 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर यूहन्ना ने कलम रोकी। उन्होंने सोचा। और लिखा: "मैं और भी बहुत कुछ कहना चाहता हूँ। पर कागज़ पर नहीं। मैं खुद आऊँगा। और तुम सबके साथ बैठूँगा। तब हमारा दिल खुशी से भर जाएगा।"
नन्हे बच्चे 2 यूहन्ना 1 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु ने कहा: "एक दूसरे से प्रेम करो।" यूहन्ना ने वही बात लिखी। क्योंकि यूहन्ना यीशु के दोस्त थे।
2 यूहन्ना 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर तुझसे बहुत प्रेम करते हैं। और परमेश्वर खुश होते हैं जब तू भी दूसरों से प्रेम करता है। अपनी माँ से। अपने पापा से। अपने भाई या बहन से। अपने दोस्त से।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

यूहन्ना कुछ नया नहीं लिखता। वह कहता है, "मैं तुझे कोई नई आज्ञा नहीं, परन्तु वही जो आरम्भ से हमारे पास है, लिखता हूँ।" और ध्यान दे, वह आज्ञा नहीं देता, विनती करता है। बूढ़ा प्रेरित हाथ जोड़कर कह रहा है, एक दूसरे से प्रेम रखो। हम नई बातें ढूँढ़ते रहते हैं, जबकि पहली बात अब तक अधूरी पड़ी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

प्रेम यह है कि हम उसकी आज्ञाओं के अनुसार चलें।" यूहन्ना प्रेम को भावना नहीं, चाल कहता है। कदम, रोज़ के छोटे कदम। और आज्ञा भी यही है कि प्रेम में चलते रहो। यानी आज्ञा मानना प्रेम है, और प्रेम करना आज्ञा है। सोच, घर में जिस व्यक्ति की ओर तेरा मन कड़ा हो गया है, आज उसकी ओर एक कदम कैसा दिखेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

उस सत्य के कारण जो हम में बना रहता है, और सर्वदा हमारे साथ रहेगा।" ध्यान दे, सत्य कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे यूहन्ना ने पकड़ रखा था। सत्य ही उनमें बसा हुआ था, मेहमान की तरह नहीं, घर के मालिक की तरह। और यही सत्य उस बहन और उसके बच्चों से यूहन्ना के प्रेम की जड़ थी। तेरा प्रेम भी किसी भावना पर नहीं, उसी बने रहने वाले सत्य पर टिका हो। जो हमेशा साथ रहेगा, वही तुझसे प्रेम करना सिखाएगा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

यूहन्ना लिखता है, "मैं बहुत आनन्दित हुआ, कि मैंने तेरे कुछ बच्चों को उस आज्ञा के अनुसार, जो हमें पिता की ओर से मिली थी, सत्य पर चलते हुए पाया।"

ध्यान दे, "कुछ" शब्द पर। सारे नहीं, कुछ। यूहन्ना निराश नहीं होता, वह उन थोड़े लोगों पर आनन्दित होता है जो सच्चाई में चल रहे हैं।

तेरे आस पास भी शायद सब वैसे न हों जैसा तू चाहता है। पर क्या तू उन थोड़ों को देखकर परमेश्वर का धन्यवाद करता है, जो सचमुच मसीह के पीछे चल रहे हैं?

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हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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