1 यूहन्ना 5
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
रात हो चुकी थी। बाहर सब कुछ चुप था। एक छोटे कमरे में एक दीया जल रहा था। दीये की लौ हल्की-हल्की हिल रही थी।
वहाँ एक बूढ़ा आदमी बैठा था। उसका नाम यूहन्ना था। उसके हाथ बहुत बूढ़े थे। वे थोड़े काँप रहे थे।
यूहन्ना एक चिट्ठी लिख रहा था। धीरे-धीरे। एक-एक शब्द।
चिट्ठी किसके लिए थी? उन लोगों के लिए जिन्हें वह बहुत प्यार करता था। वह उन्हें कहता था, "प्यारे बच्चों।"
यूहन्ना यीशु को जानता था। सच में जानता था। उसने यीशु के साथ चला था। उसने यीशु की आवाज़ सुनी थी।
और अब वह लिखता है, यीशु परमेश्वर का पुत्र हैं।
जो यह मानता है, वह परमेश्वर के परिवार का हो जाता है। और परिवार में सब एक-दूसरे को प्यार करते हैं।
यूहन्ना आगे लिखता है। परमेश्वर जो कहते हैं, वह भारी नहीं है। वह पत्थर की भारी बोरी जैसा नहीं है। वह हल्का है। जैसे एक गरम कोट, जो तुम्हें ठंड से बचाता है।
इसका क्या अर्थ है?
फिर यूहन्ना रुकता है। दीया टिमटिमाता है।
और वह सबसे सुंदर बात लिखता है।
परमेश्वर ने हमें एक तोहफा दिया है। जीवन। ऐसा जीवन जो कभी खत्म नहीं होता।
वह तोहफा यीशु में है। जिसके पास यीशु हैं, उसके पास जीवन है।
और यूहन्ना लिखता है, परमेश्वर तुम्हें थामे रखते हैं। मज़बूती से। जैसे बड़े, गरम हाथ।
बुरा उसे छू भी नहीं सकता।
जोड़नेवाला धागा
यूहन्ना ने यह बात खुद नहीं सोची।
परमेश्वर ने खुद कहा था। परमेश्वर ने खुद बताया, "यह मेरा पुत्र है।"
यीशु सच में आए। एक छोटे बच्चे के रूप में। वे बड़े हुए। उन्होंने बीमारों को छुआ। उन्होंने बच्चों को गोद में लिया।
और वे हमें बचाने के लिए मरे।
परमेश्वर का पुत्र आ गया है। यह सच है। यूहन्ना ने उन्हें अपनी आँखों से देखा।
तुम्हारे लिए
यूहन्ना एक बात और लिखता है। सुनो।
जब हम परमेश्वर से कुछ माँगते हैं, वे सुनते हैं।
हर बार। वे सुनते हैं।
तुम्हें ज़ोर से चिल्लाना नहीं पड़ता। तुम बिलकुल धीरे भी बोल सकते हो। परमेश्वर के कान तुम्हारे पास हैं।
कुछ लोगों के पास पत्थर की छोटी मूरतें थीं। वे उनसे बात करते थे। पर पत्थर सुन नहीं सकता। पत्थर के कान नहीं होते।
इसलिए यूहन्ना लिखता है, प्यारे बच्चों, उनसे दूर रहो।
हमारे परमेश्वर सच्चे हैं। वे ज़िंदा हैं। वे सुनते हैं।
यूहन्ना ने चिट्ठी मोड़ी। दीया अब भी जल रहा था।
और वह चिट्ठी आज भी है। यह चिट्ठी तुम्हारे लिए भी है।
इस पर बात करो
तुम आज परमेश्वर से क्या माँगना चाहते हो? वे सुन रहे हैं।
परमेश्वर तुम्हें थामे रखते हैं। यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?
मिलकर प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर, आप सुनते हैं। हर बार। धन्यवाद कि यीशु आए। धन्यवाद कि आप मुझे थामे रखते हैं। आमीन।
1 यूहन्ना 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 यूहन्ना 5 किस विषय में है?
1 यूहन्ना 5 क्या कहता है?
1 यूहन्ना 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे 1 यूहन्ना 5 से क्या सीख सकते हैं?
1 यूहन्ना 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
तो यह भी जानते हैं, कि जो कुछ हमने उससे माँगा है, वह पाया है।" ध्यान दो, यूहन्ना यह नहीं कहता कि मिलेगा। वह कहता है, मिल चुका है। तुम्हारी प्रार्थना अभी हवा में लटकी नहीं है। जिस पल परमेश्वर ने सुना, उसी पल उत्तर तय हो गया, भले तुम्हारी आँखें उसे अभी न देख पाएँ। शायद आज तुम्हें धीरज ही माँगना है, जवाब नहीं।
जो परमेश्वर के पुत्र पर विश्वास करता है, वह अपने ही में गवाही रखता है।" यह गवाही कहीं दूर मंदिर या किताब में नहीं, तेरे भीतर रखी है। जब मन डगमगाए, तो बाहर प्रमाण ढूँढ़ने से पहले भीतर झाँक। जिस क्षण यीशु ने तुझे बदला, वही परमेश्वर की सच्चाई का हस्ताक्षर है। उस पर अविश्वास करना सिर्फ़ कमज़ोरी नहीं, परमेश्वर को झूठा कहना है।
और उसकी आज्ञाएँ कठिन नहीं," यूहन्ना यह उस समय लिख रहा है जब विश्वासी सताए जा रहे थे। फिर भी वह कहता है कि बोझ आज्ञा में नहीं, हमारे मन में होता है। जिससे हम प्रेम करते हैं, उसकी बात मानना कभी भारी नहीं लगता। सोचो, परमेश्वर की कौन सी बात तुम्हें आज भारी लग रही है? शायद सवाल आज्ञा का नहीं, प्रेम के ठंडे पड़ जाने का है।
जिसके पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है।" यूहन्ना यह नहीं कहता कि जिसके पास ज्ञान है, या जिसके पास अच्छे काम हैं। वह कहता है, जिसके पास पुत्र है। जीवन कोई चीज़ नहीं, एक व्यक्ति है। तो आज खुद से पूछ लो, मेरे पास मसीह के बारे में जानकारी है, या मसीह खुद?
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