3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

नहूम 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

समझाना

सुनो। एक आदमी था। उसका नाम था नहूम। परमेश्वर ने नहूम को एक ज़रूरी बात बताई। एक बहुत ज़रूरी बात।

दूर एक बड़ा शहर था। उस शहर का नाम था नीनवे। नीनवे में बुरे लोग रहते थे। बहुत बुरे लोग। वे परमेश्वर की बात नहीं सुनते थे। वे दूसरे लोगों को दुख देते थे।

परमेश्वर ने सब देखा। परमेश्वर सब देखते हैं।

परमेश्वर बहुत बड़े हैं। जब वे चलते हैं, तो बादल उनके पैरों की धूल बन जाते हैं। सोचो! बादल, धूल की तरह। जब वे बोलते हैं, तो नदियाँ सूख जाती हैं। पहाड़ काँपने लगते हैं। बड़े, ऊँचे पहाड़। थर थर थर।

परमेश्वर बहुत ताकतवर हैं।

इसका क्या अर्थ है?

पर सुनो, यह भी सुनो। परमेश्वर सिर्फ ताकतवर नहीं हैं। परमेश्वर भले हैं। बहुत भले।

नहूम ने कहा, "परमेश्वर भले हैं!"

जब कोई डरता है, जब कोई रोता है, तब परमेश्वर एक बड़े, मज़बूत घर की तरह हैं। एक ऐसा घर जहाँ तुम छिप सकते हो। जहाँ कोई तुम्हें छू नहीं सकता।

परमेश्वर अपने बच्चों को जानते हैं। वे उनका ध्यान रखते हैं। हर दिन।

जोड़ने वाला सूत्र

और फिर, नहूम ने कुछ और देखा। दूर, पहाड़ों पर, कोई दौड़ता आ रहा था!

एक आदमी। वह अच्छी खबर लाया।

"सुनो! सुनो!" वह पुकारा। "अच्छी खबर! शांति की खबर!"

क्या तुम जानते हो? बहुत, बहुत बाद में एक और अच्छी खबर आई। सबसे अच्छी खबर। प्रभु यीशु आए! यीशु ने कहा, "मैं आया हूँ। मैं तुम्हें बचाऊँगा।"

यीशु सबसे अच्छी खबर हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुम कभी डरते हो? रात को अंधेरे में? या जब कोई ज़ोर से चिल्लाता है?

तब याद रखना। परमेश्वर बहुत बड़े हैं। पहाड़ों से भी बड़े। बादलों से भी ऊँचे। और वे तुमसे प्यार करते हैं।

तुम परमेश्वर के पास जा सकते हो। जैसे एक छोटा बच्चा पापा के पास दौड़कर जाता है। परमेश्वर तुम्हें थामे रखते हैं।

तुम अकेले नहीं हो। कभी नहीं।

इस पर बात करो

जब तुम डरते हो, तब तुम क्या करते हो?

परमेश्वर बहुत बड़े हैं, यह जानकर तुम्हें कैसा लगता है?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर,

आप बहुत बड़े हैं। आप बहुत भले हैं। जब मैं डरता हूँ, आप मेरे पास हैं। धन्यवाद, यीशु के लिए। धन्यवाद, कि आप मुझसे प्यार करते हैं।

आमीन।

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नहूम 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नहूम 1 किस विषय में है?
सुनो। एक आदमी था। उसका नाम था नहूम। परमेश्वर ने नहूम को एक ज़रूरी बात बताई। एक बहुत ज़रूरी बात।
नहूम 1 क्या कहता है?
परमेश्वर बहुत बड़े हैं। जब वे चलते हैं, तो बादल उनके पैरों की धूल बन जाते हैं। सोचो! बादल, धूल की तरह। जब वे बोलते हैं, तो नदियाँ सूख जाती हैं। पहाड़ काँपने लगते हैं। बड़े, ऊँचे पहाड़। थर थर थर।
नहूम 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
जब कोई डरता है, जब कोई रोता है, तब परमेश्वर एक बड़े, मज़बूत घर की तरह हैं। एक ऐसा घर जहाँ तुम छिप सकते हो। जहाँ कोई तुम्हें छू नहीं सकता।
नन्हे बच्चे नहूम 1 से क्या सीख सकते हैं?
और फिर, नहूम ने कुछ और देखा। दूर, पहाड़ों पर, कोई दौड़ता आ रहा था!
नहूम 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम कभी डरते हो? रात को अंधेरे में? या जब कोई ज़ोर से चिल्लाता है?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

यहोवा बवंडर और आँधी में होकर चलता है, और बादल उसके पाँवों की धूलि हैं।" जो आँधी तुझे निगलने को है, वही उसके चलने का रास्ता है। और जो देर तुझे लगती है, वह उसकी कमज़ोरी नहीं, उसका धीरज है। नीनवे को सौ साल मिले थे। तू भी सोच, यह ठहराव तेरे लिए सज़ा है या बुलावा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

अश्शूर की सेना उस समय अजेय लगती थी, उसके सामने कोई टिक नहीं पाता था। पर परमेश्वर कहता है, "चाहे वे पूरी शक्ति में हों और बहुत भी हों, तौभी वे काटे जाएँगे।" जो आज तुझे कुचल रहा है, उसकी भी एक समय-सीमा परमेश्वर ने तय कर रखी है। और यहूदा से कहा गया, "मैंने तुझे दुःख दिया है, परन्तु अब तुझे और दुःख न दूँगा।" तेरा दुःख अनन्त नहीं है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

नहूम की किताब नीनवे पर आती आग से भरी है, बादल, आँधी, पिघलते पहाड़। और उसी गर्जन के बीच अचानक यह पंक्ति आती है: "यहोवा भला है, संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ है, और अपने शरणागतों की सुधि रखता है।" ध्यान दे, वह भीड़ को नहीं, तुझे जानता है। जो उसकी ओट में दुबका है, उसका नाम उसे याद है। तेरा तूफान भी उसकी भलाई को नहीं मिटा सका।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

नीनवे ने सोचा था कि उसकी क्रूरता का हिसाब कोई नहीं रख रहा। पर नहूम कहता है, "यहोवा जलन रखनेवाला और बदला लेनेवाला परमेश्वर है।" यह जलन ठंडी नहीं, यह प्रेम की आग है, अपने लोगों के लिए। जो तुझे कुचलते हैं, वह उन्हें भूलता नहीं। तेरे आँसू उसके सामने दर्ज हैं। सवाल यह है, क्या तू हिसाब उसके हाथ में छोड़ पाएगा?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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