3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

2 शमूएल 16

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

दाऊद और शिमी का पत्थर

The Explanation

दाऊद चल रहा था। बहुत दूर तक चल रहा था। वह राजा था, पर उसका बेटा उससे झगड़ा करने लगा था। इसलिए दाऊद अपने घर से भाग रहा था। रास्ते में एक आदमी आया। उसका नाम सीबा था। सीबा गदहों पर रोटी लाया, और किशमिश, और दाखमधु भी। दाऊद थका था, और उसके लोग भी थके थे। यह सब खाना देखकर दाऊद खुश हुआ।

फिर दाऊद और आगे चला। एक जगह का नाम था बहूरीम। वहाँ एक आदमी खड़ा था। उसका नाम शिमी था। शिमी गुस्से में था। बहुत गुस्से में। वह चिल्लाने लगा, "दूर हो जा! निकल जा!" उसने पत्थर उठाए, और दाऊद पर फेंके। पत्थर उड़ते रहे। धूल उड़ती रही। दाऊद के साथ चलने वाले लोग डर गए।

What Does This Mean?

दाऊद के एक साथी ने कहा, "मुझे जाने दो। मैं उसे रोक दूँगा।" पर दाऊद ने कहा, "नहीं। उसे कोसने दो।" दाऊद ने सोचा, "शायद परमेश्वर ने ही उससे यह कहलवाया है।" दाऊद ने सोचा, "शायद परमेश्वर मुझ पर दया करेंगे।" दाऊद चुप रहा। वह आगे चलता रहा। पत्थर उसके पास गिरते रहे। धूल उस पर उड़ती रही। पर दाऊद ने एक भी पत्थर वापस नहीं फेंका।

शाम हुई। दाऊद और उसके लोग थक गए थे। वे एक जगह रुके, और आराम किया।

The Common Thread

दाऊद राजा था, पर फिर भी उस पर पत्थर फेंके गए। बहुत बाद में, एक और राजा आया। उसका नाम यीशु है। लोगों ने यीशु को भी दुख दिया। बहुत दुख दिया। पर यीशु भी चुप रहे। यीशु ने भी परमेश्वर पर भरोसा रखा। जैसे दाऊद ने प्रतीक्षा की, वैसे ही यीशु ने भी प्रतीक्षा की। परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं भूलते।

For You

कभी-कभी कोई तुम्हें चिढ़ाता है। कभी-कभी कोई तुम्हारे साथ बुरा करता है। तब तुम क्या करते हो? दाऊद ने वापस पत्थर नहीं फेंके। उसने परमेश्वर से बात की, और इंतज़ार किया। हम भी ऐसा कर सकते हैं।

Talk About It

शिमी ने दाऊद पर पत्थर क्यों फेंके?

जब कोई तुम्हें चिढ़ाए, तब तुम क्या कर सकते हो?

Praying Together

हे परमेश्वर, कभी-कभी कोई मुझसे बुरा बोलता है। तब मुझे गुस्सा आता है। पर दाऊद की तरह, मुझे भी शांत रहना सिखाइए। आप मेरे साथ रहिए। आमीन।

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2 शमूएल 16 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 शमूएल 16 किस विषय में है?
दाऊद चल रहा था। बहुत दूर तक चल रहा था। वह राजा था, पर उसका बेटा उससे झगड़ा करने लगा था। इसलिए दाऊद अपने घर से भाग रहा था। रास्ते में एक आदमी आया। उसका नाम सीबा था। सीबा गदहों पर रोटी लाया, और किशमिश, और दाखमधु भी। दाऊद थका था, और उसके लोग भी थके थे। यह सब खाना देखकर दाऊद खुश हुआ।
2 शमूएल 16 क्या कहता है?
फिर दाऊद और आगे चला। एक जगह का नाम था बहूरीम। वहाँ एक आदमी खड़ा था। उसका नाम शिमी था। शिमी गुस्से में था। बहुत गुस्से में। वह चिल्लाने लगा, "दूर हो जा! निकल जा!" उसने पत्थर उठाए, और दाऊद पर फेंके। पत्थर उड़ते रहे। धूल उड़ती रही। दाऊद के साथ चलने वाले लोग डर गए।
2 शमूएल 16 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दाऊद के एक साथी ने कहा, "मुझे जाने दो। मैं उसे रोक दूँगा।" पर दाऊद ने कहा, "नहीं। उसे कोसने दो।" दाऊद ने सोचा, "शायद परमेश्वर ने ही उससे यह कहलवाया है।" दाऊद ने सोचा, "शायद परमेश्वर मुझ पर दया करेंगे।" दाऊद चुप रहा। वह आगे चलता रहा। पत्थर उसके पास गिरते रहे। धूल उस पर उड़ती रही। पर दाऊद ने एक भी पत्थर वापस नहीं फेंका।
नन्हे बच्चे 2 शमूएल 16 से क्या सीख सकते हैं?
शाम हुई। दाऊद और उसके लोग थक गए थे। वे एक जगह रुके, और आराम किया।
2 शमूएल 16 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दाऊद राजा था, पर फिर भी उस पर पत्थर फेंके गए। बहुत बाद में, एक और राजा आया। उसका नाम यीशु है। लोगों ने यीशु को भी दुख दिया। बहुत दुख दिया। पर यीशु भी चुप रहे। यीशु ने भी परमेश्वर पर भरोसा रखा। जैसे दाऊद ने प्रतीक्षा की, वैसे ही यीशु ने भी प्रतीक्षा की। परमेश्वर अपने लोगों को कभी नहीं भूलते।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

दाऊद भागते हुए थका था, भूखा था, और सीबा रोटी और गदहे लेकर आया। ऐसे पल में एक बात कान में डाल दी गई: "वह तो यरूशलेम में रह गया।" मपीबोशेत वहाँ था ही नहीं अपनी सफाई देने को। लँगड़ा आदमी, जिस पर दाऊद ने दया की थी, उसकी अनुपस्थिति में बदनाम हो गया।

जिसके बारे में तुझसे कुछ कहा जा रहा है, क्या वह जवाब देने के लिए वहाँ मौजूद है? थकान में सुनी गई बात अक्सर सबसे गहरा घाव करती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

हूशै अबशालोम से कहता है, "फिर मैं किस की सेवा करूँ? क्या उसके पुत्र के सामने नहीं?" शब्द वफादारी के हैं, पर दिल दाऊद के पास ही है। और अबशालोम मान लेता है, क्योंकि जो सुनना चाहता था वही सुनाई दिया। यही ख़तरा है: चापलूसी हमें अंधा कर देती है। तेरे आसपास जो तुझे सबसे अच्छा लगता है बोलने वाला है, क्या वह सच भी बोलता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

अबीशै का सवाल कितना अपना सा लगता है, "यह मरा हुआ कुत्ता मेरे प्रभु राजा को क्यों शाप देने पाए?" हमारे भीतर भी कोई है जो हर आलोचक का मुँह बंद करना चाहता है। पर दाऊद चुप रहा, भागते हुए, अपमान सहते हुए। कभी कभी परमेश्वर उस आवाज़ को भी काम में लेता है जिसे हम काट देना चाहते हैं। आज तेरे कानों में जो कड़वी बात पड़ी, क्या तू उसे सुनने का साहस रखेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

अबशालोम और सब इस्राएली पुरुष यरूशलेम में आए, और अहीतोपेल उसके संग था।" वही अहीतोपेल, जिसकी सलाह दाऊद परमेश्वर के वचन जैसी मानता था। जो कल तक साथ बैठकर योजना बनाता था, आज दूसरी ओर खड़ा है। कभी कभी सबसे गहरा घाव अजनबी नहीं, अपने ही देते हैं। पर ध्यान दे, अहीतोपेल की चतुर सलाह भी परमेश्वर की मर्जी के आगे नहीं टिकी। तेरे विरुद्ध जो बैठक हो रही है, वह उससे ऊपर नहीं जा सकती जो तेरे लिए बैठा है।

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