2 शमूएल 16
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
दाऊद अपने ही बेटे अबशालोम से भाग रहा है। यह कितना दुखद है, एक पिता को अपने बेटे से डरकर भागना पड़े। रास्ते में सीबा नाम का एक सेवक आता है। वह मपीबोशेत का सेवक है, और मपीबोशेत शाऊल के परिवार से है जिसे दाऊद ने प्रेम दिखाया था। सीबा गधों पर रोटी, किशमिश, फल और दाखमधु लादकर लाता है और दाऊद को देता है। पर जब दाऊद पूछता है, "तेरा स्वामी कहाँ है?" तो सीबा कहता है कि मपीबोशेत यरूशलेम में रुक गया है, यह सोचकर कि अब उसे अपने दादा शाऊल का राज्य वापस मिल जाएगा। यह सुनकर दाऊद गुस्से में आकर मपीबोशेत की सारी संपत्ति सीबा को दे देता है। पर ध्यान दें, हमने सिर्फ सीबा की बात सुनी है। मपीबोशेत ने खुद कुछ नहीं कहा। क्या सीबा सच बोल रहा था?
आगे बहूरीम नाम की जगह में शिमी नाम का आदमी निकलता है, जो शाऊल के परिवार से है। वह दाऊद को कोसता है, पत्थर फेंकता है, और कहता है कि दाऊद खूनी है, और अब परमेश्वर उसे उसकी बुराई का बदला दे रहे हैं। अबीशै उसे मार डालना चाहता है, पर दाऊद रोक देता है। वह कहता है कि शायद प्रभु ने ही शिमी से यह कहलवाया है, और शायद प्रभु मेरे दुख को देखकर मुझे अच्छा बदला देंगे।
उधर यरूशलेम में अबशालोम पहुँचता है। हूशै, जो दाऊद का मित्र है, छल से अबशालोम की सेवा में आ जाता है ताकि वह अंदर से दाऊद की मदद कर सके। और अहीतोपेल, जिसकी सलाह मानो परमेश्वर का वचन समझी जाती थी, अबशालोम को एक बहुत बुरी सलाह देता है, जिससे वह अपने पिता का अपमान सबके सामने करता है।
What Does This Mean?
इस अध्याय में हम देखते हैं कि दाऊद के सबसे बुरे दिनों में भी लोग उसके आस-पास उसका फायदा उठाने, उसे धोखा देने, या उसे गाली देने की कोशिश कर रहे हैं। सीबा शायद झूठ बोल रहा है ताकि उसे जमीन मिल जाए। शिमी पुराने बदले की भावना निकाल रहा है। अहीतोपेल सत्ता के पीछे है। पर दाऊद का जवाब चौंकाने वाला है। वह न सीबा की बात की जाँच करता और न शिमी को मरवाता है। वह कहता है, "यहोवा ने जो उससे कहा है, कि दाऊद को श्राप दे, तो उससे कौन पूछ सकता है?" दाऊद के मन में यह विश्वास है कि परमेश्वर उसकी तकलीफ को देख रहे हैं, भले ही अभी सब कुछ उलटा लग रहा हो।
The Common Thread
दाऊद राजा होकर भी गाली सुनता है, पत्थर खाता है, और चुप रहता है। यह हमें किसी और की याद दिलाता है। बहुत बरसों बाद एक और राजा, जो दाऊद का वंशज था, यीशु मसीह, गालियाँ सुनेगा, थूका जाएगा, और वह भी अपने बचाव में कुछ नहीं कहेगा। दाऊद ने उम्मीद रखी कि परमेश्वर कभी "भला बदला" देंगे। यीशु मसीह ने अपने दुख के बाद सचमुच वह भला बदला पाया, पुनरुत्थान और महिमा। परमेश्वर अपने लोगों के अपमान को भूलते नहीं, भले ही बदला तुरंत न आए।
For You
कभी कोई तुम्हें नाहक गाली देता है या तुम्हारे बारे में गलत बात फैलाता है, तो तुम्हारा मन भी बदला लेने को करता होगा, बिल्कुल अबीशै जैसा। दाऊद की तरह तुरंत पलटवार करना ज़रूरी नहीं है। दाऊद ने परमेश्वर पर भरोसा रखा, भले ही वह समझ नहीं पा रहा था कि यह सब क्यों हो रहा है। कभी-कभी हमें भी जवाब नहीं मिलता, सिर्फ भरोसा रखना पड़ता है कि परमेश्वर देख रहे हैं।
Talk About It
तुम्हें क्या लगता है, मपीबोशेत ने सच में दाऊद को धोखा दिया होगा, या सीबा झूठ बोल रहा था? पाठ हमें यह साफ क्यों नहीं बताता?
दाऊद ने शिमी को मारने से क्यों रोका? क्या तुम भी ऐसा कर पाते अगर कोई तुम्हें नाहक गाली दे?
Praying Together
प्रभु, जब कोई हमें नाहक दुख दे या गलत समझे, तब हमें सिखाइए कि आप पर भरोसा रखें। जैसे आपने दाऊद की सुनी, वैसे ही हमारी भी सुनिए। हमें धीरज दीजिए और विश्वास दीजिए कि आप हमारा हाल देख रहे हैं। आमीन।
2 शमूएल 16 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
2 शमूएल 16 किस विषय में है?
2 शमूएल 16 क्या कहता है?
2 शमूएल 16 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 2 शमूएल 16 से क्या सीख सकते हैं?
2 शमूएल 16 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
हूशै अबशालोम से कहता है, "फिर मैं किस की सेवा करूँ? क्या उसके पुत्र के सामने नहीं?" शब्द वफादारी के हैं, पर दिल दाऊद के पास ही है। और अबशालोम मान लेता है, क्योंकि जो सुनना चाहता था वही सुनाई दिया। यही ख़तरा है: चापलूसी हमें अंधा कर देती है। तेरे आसपास जो तुझे सबसे अच्छा लगता है बोलने वाला है, क्या वह सच भी बोलता है?
अबीशै का सवाल कितना अपना सा लगता है, "यह मरा हुआ कुत्ता मेरे प्रभु राजा को क्यों शाप देने पाए?" हमारे भीतर भी कोई है जो हर आलोचक का मुँह बंद करना चाहता है। पर दाऊद चुप रहा, भागते हुए, अपमान सहते हुए। कभी कभी परमेश्वर उस आवाज़ को भी काम में लेता है जिसे हम काट देना चाहते हैं। आज तेरे कानों में जो कड़वी बात पड़ी, क्या तू उसे सुनने का साहस रखेगा?
अबशालोम और सब इस्राएली पुरुष यरूशलेम में आए, और अहीतोपेल उसके संग था।" वही अहीतोपेल, जिसकी सलाह दाऊद परमेश्वर के वचन जैसी मानता था। जो कल तक साथ बैठकर योजना बनाता था, आज दूसरी ओर खड़ा है। कभी कभी सबसे गहरा घाव अजनबी नहीं, अपने ही देते हैं। पर ध्यान दे, अहीतोपेल की चतुर सलाह भी परमेश्वर की मर्जी के आगे नहीं टिकी। तेरे विरुद्ध जो बैठक हो रही है, वह उससे ऊपर नहीं जा सकती जो तेरे लिए बैठा है।
दाऊद के दाहिने और बाएँ शूरवीर खड़े थे, फिर भी पत्थर उस तक पहुँचे। "उसने दाऊद पर, और राजा दाऊद के सब कर्मचारियों पर पत्थर फेंके।" ताकत होते हुए भी उसने ढाल नहीं उठाई, चुप रहा। कभी कभी परमेश्वर हमें अपमान से बचाता नहीं, उसके बीच से ले जाता है। तेरे जीवन का कौन सा पत्थर तुझे अब तक चुभ रहा है?
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