3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

2 थिस्सलुनीकियों 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

चिट्ठी में क्या लिखा है

बहुत समय पहले की बात है। एक आदमी था। उसका नाम था पौलुस।

पौलुस एक मेज़ पर बैठा था। उसके पास कागज़ था। और स्याही थी, काली स्याही।

उसके साथ दो दोस्त थे। सिलवानुस और तीमुथियुस। वे तीनों मिलकर एक चिट्ठी लिख रहे थे।

चिट्ठी किसके लिए थी? दूर, बहुत दूर एक शहर था। वहाँ पौलुस के दोस्त रहते थे। शाम को वे एक घर में इकट्ठे होते थे। एक छोटा दीया जलता था। वे परमेश्वर के गीत गाते थे।

पर उन दोस्तों को दुख भी था। कुछ लोग उनसे बुरा बोलते थे। कुछ लोग उन्हें सताते थे। यह आसान नहीं था। बिल्कुल आसान नहीं।

पौलुस को यह पता था। इसलिए उसने चिट्ठी लिखी।

इसका क्या मतलब है

पौलुस ने क्या लिखा? सुनो।

"धन्यवाद, परमेश्वर!" उसने लिखा। "मेरे दोस्तों के लिए धन्यवाद!"

क्योंकि वे दोस्त परमेश्वर पर भरोसा करते रहे। हर दिन। और वे एक दूसरे से प्यार करते रहे। और भी ज़्यादा। और भी ज़्यादा।

पौलुस को उन पर गर्व था। वह सबको बताता था। "देखो मेरे दोस्तों को! वे डटे रहते हैं!"

बड़ी कहानी

और फिर पौलुस ने कुछ और लिखा। कुछ बहुत ख़ास।

"एक दिन प्रभु यीशु आएँगे," उसने लिखा।

सोचो ज़रा। आसमान खुल जाएगा। रोशनी होगी, बहुत तेज़ रोशनी। यीशु आएँगे। और उनके साथ स्वर्गदूत आएँगे, बहुत सारे।

तब सब ठीक हो जाएगा। जो गलत था, वह ठीक होगा। जो लोग रोते थे, वे चैन पाएँगे। थके हुए लोग आराम करेंगे।

और सब लोग यीशु को देखेंगे। और सब कहेंगे: "वाह! कितने सुंदर हैं यीशु!"

पौलुस ने लिखा: वह दिन ज़रूर आएगा।

तुम्हारे लिए

फिर पौलुस ने कलम रख दी। पर वह रुका नहीं।

पौलुस ने आँखें बंद कीं। और वह प्रार्थना करने लगा। अपने दोस्तों के लिए, जो बहुत दूर रहते थे।

"परमेश्वर, उनकी मदद कीजिए," उसने कहा। "उन्हें ताकत दीजिए। हर अच्छे काम में।"

पौलुस हर दिन ऐसा करता था। हर दिन।

क्या तुम भी किसी को जानते हो जो दूर रहता है? शायद दादी। शायद कोई दोस्त। तुम भी उसके लिए प्रार्थना कर सकते हो। आज ही।

और अगर तुम्हारा दिन कठिन हो? अगर कोई तुमसे बुरा बोले? तब याद रखना। यीशु आ रहे हैं। और वे सब कुछ ठीक कर देंगे।

बातचीत करें

तुम किसके लिए आज प्रार्थना करना चाहते हो?

यीशु आएँगे और सब ठीक कर देंगे। तुम्हें कैसा लगता है?

मिलकर प्रार्थना करें

प्यारे परमेश्वर,

धन्यवाद कि आप मेरी सुनते हैं।

मेरी मदद कीजिए, जब दिन कठिन हो।

और जल्दी आइए, प्रभु यीशु।

आमीन।

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2 थिस्सलुनीकियों 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 थिस्सलुनीकियों 1 किस विषय में है?
पौलुस एक मेज़ पर बैठा था। उसके पास कागज़ था। और स्याही थी, काली स्याही।
2 थिस्सलुनीकियों 1 क्या कहता है?
पर उन दोस्तों को दुख भी था। कुछ लोग उनसे बुरा बोलते थे। कुछ लोग उन्हें सताते थे। यह आसान नहीं था। बिल्कुल आसान नहीं।
2 थिस्सलुनीकियों 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस को उन पर गर्व था। वह सबको बताता था। "देखो मेरे दोस्तों को! वे डटे रहते हैं!"
नन्हे बच्चे 2 थिस्सलुनीकियों 1 से क्या सीख सकते हैं?
और सब लोग यीशु को देखेंगे। और सब कहेंगे: "वाह! कितने सुंदर हैं यीशु!"
2 थिस्सलुनीकियों 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम भी किसी को जानते हो जो दूर रहता है? शायद दादी। शायद कोई दोस्त। तुम भी उसके लिए प्रार्थना कर सकते हो। आज ही।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

क्योंकि परमेश्वर के निकट यह न्याय है कि जो तुम्हें क्लेश देते हैं, उन्हें बदले में क्लेश दे।" पौलुस सताए हुए विश्वासियों से यह नहीं कहता कि बदला लो। वह कहता है, हिसाब परमेश्वर के हाथ में है। तेरा आँसू भूला नहीं गया। जो घाव किसी ने तुझे दिया, उसका लेखा वही रखता है जो सच्चा न्यायी है। तू अपने कंधे से यह बोझ उतार दे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

पौलुस दो बातें अलग करता है, "जो परमेश्वर को नहीं पहचानते" और जो "सुसमाचार को नहीं मानते।" यानी सुसमाचार सिर्फ जानने की खबर नहीं, मानने की पुकार है। और याद रख, ये शब्द सताए हुए विश्वासियों को लिखे गए थे, उन्हें डराने नहीं, दिलासा देने। बदला लेना परमेश्वर का काम है, तेरा नहीं। पर एक सवाल तेरे लिए बचा रहता है, तूने सुसमाचार को सिर्फ सुना है, या उसकी मानी भी है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पौलुस उन लोगों को लिख रहा था जो सताए जा रहे थे, और उन्हें बताता है कि मसीह "अपने पवित्र लोगों में महिमा पाने" के लिये आएगा। ध्यान दे, उनके द्वारा नहीं, उनके भीतर। आज तेरा जीवन छोटा, थका और कुचला हुआ लग सकता है, फिर भी वही जगह है जहाँ वह अपनी महिमा चमकाने आ रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

तुम्हारा धीरज ही सबूत है। पौलुस उन सताए हुए विश्वासियों से कहता है, "यह परमेश्वर के सच्चे न्याय का स्पष्ट चिन्ह है, कि तुम उस राज्य के योग्य ठहरो, जिसके लिये तुम दुःख भी उठाते हो।" जो आग तुम्हें मिटाने आई थी, वही तुम्हारी पहचान बन गई। सोचो, आज तुम जो चुपचाप सह रहे हो, क्या वह परमेश्वर की नज़र में व्यर्थ है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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