3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 थिस्सलुनीकियों 5

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बहुत अँधेरा। सब लोग अपने घरों में सो रहे थे। पर देखो, एक चोर धीरे-धीरे आया। किसी ने उसे नहीं देखा। किसी ने नहीं सुना।

पौलुस नाम के एक अंकल ने अपने दोस्तों को एक चिट्ठी लिखी। वे बहुत दूर रहते थे। पौलुस ने लिखा, "सुनो! एक दिन प्रभु यीशु फिर से आएँगे। कब? यह हम नहीं जानते। बिलकुल जैसे चोर आता है, अचानक।"

पर पौलुस ने कहा, "डरो मत! तुम अँधेरे में नहीं रहते। तुम रोशनी के बच्चे हो!"

इसका क्या मतलब है?

सोचो, एक छोटा दीया जल रहा है। उसकी रोशनी गरम है। पीली है। सुंदर है।

परमेश्वर कहते हैं, "तुम भी ऐसे ही हो। तुम मेरी रोशनी हो।"

रोशनी के बच्चे सोते नहीं रहते। वे जागते हैं। वे देखते हैं। वे परमेश्वर के लिए तैयार रहते हैं।

पौलुस ने और भी अच्छी बातें लिखीं। सुनो: "हमेशा खुश रहो। हमेशा प्रार्थना करो। हमेशा धन्यवाद कहो।"

खुश रहो, जब सूरज निकले। खुश रहो, जब बारिश हो। खुश रहो, जब माँ रोटी बनाए। और परमेश्वर से बात करते रहो। छोटी बातों के लिए भी।

बड़ी कहानी से जोड़

क्या तुम्हें पता है? प्रभु यीशु ने हमसे बहुत प्यार किया। इतना प्यार, कि वे हमारे लिए मरे।

पौलुस ने लिखा, "प्रभु यीशु हमारे लिए मरे। इसलिए अब हम हमेशा उनके साथ रहेंगे।"

यीशु एक अच्छे चरवाहे की तरह हैं। वे अपनी भेड़ों को कभी नहीं भूलते। वे एक दिन फिर आएँगे। और तब बहुत सुंदर होगा।

तब तक हम इंतज़ार करते हैं। पर अकेले नहीं। यीशु हर दिन हमारे साथ हैं।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी एक मोमबत्ती देखी है? उसकी छोटी सी लौ चमकती है। अँधेरे में भी।

तुम भी ऐसे हो। एक छोटी सी रोशनी।

जब तुम माँ को गले लगाते हो, तुम रोशनी हो। जब तुम अपने भाई से कहते हो, "आओ, साथ खेलें," तुम रोशनी हो। जब तुम "धन्यवाद, परमेश्वर" कहते हो, तुम रोशनी हो।

पौलुस ने एक और बात लिखी: "बुराई के बदले बुराई मत करो।" अगर कोई तुम्हें धक्का दे, तो तुम धक्का मत दो। यह मुश्किल है। पर यीशु तुम्हारी मदद करेंगे।

बात करो

अगर आज तुम एक छोटी रोशनी हो, तो तुम किसे खुश करोगे?

तुम आज परमेश्वर को किस बात के लिए धन्यवाद कहना चाहते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

धन्यवाद कि आपने मुझे बनाया। धन्यवाद कि मैं आपकी छोटी रोशनी हूँ।

मुझे जागते रहना सिखाइए। मुझे खुश रहना सिखाइए। मुझे धन्यवाद कहना सिखाइए।

प्रभु यीशु, आप हमेशा मेरे पास हैं। मैं आपसे प्यार करता हूँ।

आमीन।

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1 थिस्सलुनीकियों 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 थिस्सलुनीकियों 5 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बहुत अँधेरा। सब लोग अपने घरों में सो रहे थे। पर देखो, एक चोर धीरे-धीरे आया। किसी ने उसे नहीं देखा। किसी ने नहीं सुना।
1 थिस्सलुनीकियों 5 क्या कहता है?
परमेश्वर कहते हैं, "तुम भी ऐसे ही हो। तुम मेरी रोशनी हो।"
1 थिस्सलुनीकियों 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
क्या तुम्हें पता है? प्रभु यीशु ने हमसे बहुत प्यार किया। इतना प्यार, कि वे हमारे लिए मरे।
नन्हे बच्चे 1 थिस्सलुनीकियों 5 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुमने कभी एक मोमबत्ती देखी है? उसकी छोटी सी लौ चमकती है। अँधेरे में भी।
1 थिस्सलुनीकियों 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
धन्यवाद कि आपने मुझे बनाया। धन्यवाद कि मैं आपकी छोटी रोशनी हूँ।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 26

पत्री के अंत में पौलुस बड़ी बातें नहीं, बल्कि एक छोटी सी बात कहता है: "सब भाइयों को पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो।" विश्वास सिर्फ मन में नहीं रहता, वह हाथ मिलाने, गले लगाने, नाम लेकर पुकारने तक उतरता है। सोचो, कलीसिया में कौन है जिससे तुम नज़रें चुराकर निकल जाते हो? शायद इस रविवार की सबसे बड़ी आज्ञा यही हो कि तुम उसके पास जाकर नमस्कार करो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 9

क्योंकि परमेश्वर ने हमें क्रोध के लिये नहीं, परन्तु इसलिये ठहराया कि हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा उद्धार प्राप्त करें।"

पौलुस यह उन लोगों से कह रहा है जो प्रभु के दिन से डर रहे थे। ध्यान दे, परमेश्वर ने तेरे लिए पहले से कुछ ठहराया है, और वह क्रोध नहीं है। तू जिस डर के साथ सोता है, वह परमेश्वर का मन नहीं है। उसका मन तेरा उद्धार है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

पर हे भाइयों, तुम तो अंधकार में नहीं हो कि वह दिन तुम पर चोर के समान आ पड़े।"

चोर उसी के घर में अचानक आता है जो सो रहा हो। पौलुस डराता नहीं, वह याद दिलाता है: तू अंधकार का नहीं है। मसीह का दिन तेरे लिए धक्का नहीं, मुलाक़ात है।

पर एक सवाल रह जाता है। तेरा दिल आज जाग रहा है, या बस व्यस्त है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

सदा आनन्दित रहो।" सिर्फ दो शब्द, पर पौलुस ने ये उन लोगों को लिखे जो सताए जा रहे थे और अपनों की कब्र पर रो चुके थे। यानी यह आनंद हालात से नहीं आता, मसीह से आता है। आज तेरी परिस्थिति शायद न बदले, पर क्या तू उस आनंद को ढूँढ़ेगा जो हालात के नीचे नहीं दबता?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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