फिलिप्पियों 4
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
समझाना
पौलुस एक छोटी सी जेल में बैठे थे। दीवारें ठंडी थीं। बाहर अंधेरा था। पर पौलुस के हाथ में एक पत्र था। वे फिलिप्पी के अपने दोस्तों को लिख रहे थे। दोस्त जो उन्हें बहुत प्यारे थे। पौलुस ने लिखा, "प्रभु में सदा आनन्दित रहो।" फिर उन्होंने फिर से लिखा, "मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो!" जेल में भी पौलुस खुश थे। क्योंकि प्रभु उनके पास था।
पौलुस ने लिखा, "किसी बात की चिन्ता मत करो।" जब कुछ डरावना लगे, तब क्या करें? प्रार्थना करो। परमेश्वर से बात करो। धन्यवाद भी दो। और फिर, फिर कुछ अच्छा होता है। परमेश्वर की शान्ति आती है। यह शान्ति दिल को गरम कंबल जैसे ढँक लेती है।
इसका मतलब क्या है?
पौलुस ने सोचा, कैसी बातों पर ध्यान लगाऊँ? जो सच्ची हैं। जो अच्छी हैं। जो सुहावनी हैं। जैसे फूल की खुशबू सुहावनी होती है। वैसे ही हमारा मन अच्छी बातों से भर सकता है। पौलुस ने अपने दोस्तों से यह भी सीखा। उन्होंने पैसे और खाना भेजा था। पौलुस को भूखे रहना भी आता था। भरपूर रहना भी आता था। दोनों में वे खुश रहते थे। क्योंकि कोई उन्हें ताकत देता था।
एक ही कड़ी
पौलुस ने लिखा, "जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ।" यह सामर्थ्य कौन देता है? यीशु मसीह। जैसे एक बच्चा अपने पापा का हाथ पकड़कर चलता है, वैसे ही पौलुस यीशु का हाथ पकड़े हुए थे। जेल में भी। भूखे रहने में भी। इसलिए वे डरे नहीं। परमेश्वर ने वादा भी किया, "तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा।" यह वादा आज भी सच है।
तेरे लिए
कभी तुझे भी डर लगता है? अंधेरे कमरे में, या नए जगह में? तब तू क्या कर सकता है, जैसे पौलुस? तू प्रार्थना कर सकता है। परमेश्वर से बात कर। और फिर अच्छी बातों को सोच। सूरज की रोशनी को, माँ की गोद को, गरम रोटी की खुशबू को। परमेश्वर तुझे भी ताकत देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे पौलुस को दी।
बातचीत के लिए:
जब तुझे कुछ चीज़ चिन्ता में डालती है, तू परमेश्वर से क्या कह सकता है?
कोई एक अच्छी और सुहावनी बात बता, जिसे तू अपने मन में रख सकता है।
साथ में प्रार्थना करना
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप मेरे पास हैं। जब मुझे डर लगे, मुझे याद दिलाना कि आप मुझे ताकत देते हैं। मुझे अच्छी बातों पर सोचना सिखाना। आमीन।
फिलिप्पियों 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
फिलिप्पियों 4 किस विषय में है?
फिलिप्पियों 4 क्या कहता है?
फिलिप्पियों 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे फिलिप्पियों 4 से क्या सीख सकते हैं?
फिलिप्पियों 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस ने दो बहनों का नाम चिट्ठी में लिख दिया, जो पूरी कलीसिया के सामने पढ़ी जानी थी: "मैं यूओदिया से विनती करता हूँ, और सुन्तुखे से भी विनती करता हूँ कि वे प्रभु में एक मन रहें।" ये दोनों सुसमाचार के काम में उसके साथ परिश्रम कर चुकी थीं। यानी सेवा करते हुए भी मन फट सकता है। सोचो, तुम्हारे और किसके बीच ऐसी दूरी है जिसे तुमने "छोटी बात" कहकर टाल रखा है?
पौलुस जेल में है, और लंबे समय बाद फिलिप्पी के विश्वासियों की मदद पहुँचती है। वह उलाहना नहीं देता। वह कहता है, "निश्चय तुम्हें आरम्भ में भी विचार था, पर तुम्हें अवसर न मिला।" देर के पीछे वह लापरवाही नहीं, बल्कि मजबूरी देखता है। सोचो, जो लोग तुमसे देर से मिले, क्या तुम उनके लिए भी ऐसी ही उदारता रख पाते हो?
पौलुस यह जेल से लिख रहा है, और फिर भी कहता है, "क्योंकि मैंने यह सीखा है कि जिस दशा में हूँ, उसी में सन्तोष करूँ।" ध्यान दो, उसने कहा सीखा है। संतोष उसके स्वभाव में नहीं था, वह सालों की तंगी और खाली हाथों में सीखा गया पाठ था। तो शायद तुम्हारी आज की कमी भी सज़ा नहीं, कक्षा है। तुम उसमें क्या सीख रहे हो?
पौलुस अपनी पत्री के अंत में लिखता है, "हर एक पवित्र जन को जो मसीह यीशु में हैं नमस्कार कहो। जो भाई मेरे साथ हैं, तुम्हें नमस्कार कहते हैं।"
एक जेल की कोठरी से लिखे इन शब्दों में कितनी गर्माहट है। पौलुस जंजीरों में है, फिर भी उसकी सोच अपने भाइयों बहनों पर टिकी है। वह हर एक को याद कर रहा है, कोई भी छूट न जाए।
क्या आज आप किसी एक विश्वासी का नाम लेकर उसे याद कर सकते हैं? नमस्कार भेजना छोटी बात लगती है, पर यही प्रेम की असली भाषा है।
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें