3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

प्रेरितों के काम 20

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

रात हो गई थी। बाहर अंधेरा था, गहरा अंधेरा। पर एक कमरे में बहुत दीये जल रहे थे। वहाँ बहुत लोग बैठे थे। पौलुस नाम का एक आदमी उनसे बातें कर रहा था। वह परमेश्वर की बातें बता रहा था। एक जवान लड़का भी वहाँ था। उसका नाम यूतुखुस था। वह खिड़की पर बैठा था।

पौलुस बहुत देर तक बोलता रहा। बहुत देर, आधी रात तक। यूतुखुस को नींद आने लगी। भारी नींद, गहरी नींद। उसकी आँखें बंद होने लगीं। और फिर… वह गिर गया! खिड़की से बाहर, नीचे, बहुत नीचे। लोग दौड़े। यूतुखुस हिलता नहीं था। लोग बहुत डर गए।

इसका अर्थ क्या है?

पौलुस नीचे गया। वह यूतुखुस के पास गया। उसने उसे गले लगाया। ऐसे जैसे कोई अपने बच्चे को गले लगाता है। पौलुस ने कहा, "घबराओ नहीं।" उसने कहा, "उसका प्राण उसी में है।" और सुनो, यूतुखुस जीवित था! सब लोग ऊपर गए। उन्होंने रोटी खाई। पौलुस फिर बातें करने लगा। सुबह हो गई, तब वह गया। सब लोग बहुत खुश हुए। बहुत शांति मिली।

पौलुस को सब लोग बहुत प्यारे थे। उसने रोते हुए उनकी सेवा की। वह डरा नहीं, थका नहीं। वह हर घर में जाकर उन्हें सिखाता था।

एक ही कहानी की कड़ी

पौलुस यीशु से बहुत प्यार करता था। इसलिए वह लोगों से भी प्यार करता था। वह रोता था, जैसे यीशु भी रोते थे। यीशु ने कहा था, "लेने से देना धन्य है।" पौलुस ने वैसा ही किया। उसने अपना सब कुछ दे दिया। परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। जैसे पौलुस ने यूतुखुस को गले लगाया, वैसे ही परमेश्वर हमें गले लगाते हैं।

तुम्हारे लिए

कभी तुम भी बहुत थक जाते हो, है ना? या डर जाते हो? पौलुस ने कहा, "घबराओ नहीं।" परमेश्वर भी तुमसे यही कहते हैं। जब तुम डरो, तो सोचो, परमेश्वर पास हैं। वे तुम्हें गले लगाना चाहते हैं। जैसे पौलुस ने यूतुखुस को लगाया।

बात करो

यूतुखुस को क्या हुआ, जब वह सो गया?

पौलुस ने यूतुखुस से क्या कहा, जब वह गले लगाया?

साथ प्रार्थना करें

प्यारे परमेश्वर, धन्यवाद, आप हमें गले लगाते हैं। जब हम डरें, हमें याद दिलाएँ, कि आप हमारे पास हैं। आमीन।

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प्रेरितों के काम 20 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

प्रेरितों के काम 20 किस विषय में है?
रात हो गई थी। बाहर अंधेरा था, गहरा अंधेरा। पर एक कमरे में बहुत दीये जल रहे थे। वहाँ बहुत लोग बैठे थे। पौलुस नाम का एक आदमी उनसे बातें कर रहा था। वह परमेश्वर की बातें बता रहा था। एक जवान लड़का भी वहाँ था। उसका नाम यूतुखुस था। वह खिड़की पर बैठा था।
प्रेरितों के काम 20 क्या कहता है?
पौलुस बहुत देर तक बोलता रहा। बहुत देर, आधी रात तक। यूतुखुस को नींद आने लगी। भारी नींद, गहरी नींद। उसकी आँखें बंद होने लगीं। और फिर... वह गिर गया! खिड़की से बाहर, नीचे, बहुत नीचे। लोग दौड़े। यूतुखुस हिलता नहीं था। लोग बहुत डर गए।
प्रेरितों के काम 20 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पौलुस नीचे गया। वह यूतुखुस के पास गया। उसने उसे गले लगाया। ऐसे जैसे कोई अपने बच्चे को गले लगाता है। पौलुस ने कहा, "घबराओ नहीं।" उसने कहा, "उसका प्राण उसी में है।" और सुनो, यूतुखुस जीवित था! सब लोग ऊपर गए। उन्होंने रोटी खाई। पौलुस फिर बातें करने लगा। सुबह हो गई, तब वह गया। सब लोग बहुत खुश हुए। बहुत शांति मिली।
नन्हे बच्चे प्रेरितों के काम 20 से क्या सीख सकते हैं?
पौलुस को सब लोग बहुत प्यारे थे। उसने रोते हुए उनकी सेवा की। वह डरा नहीं, थका नहीं। वह हर घर में जाकर उन्हें सिखाता था।
प्रेरितों के काम 20 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पौलुस यीशु से बहुत प्यार करता था। इसलिए वह लोगों से भी प्यार करता था। वह रोता था, जैसे यीशु भी रोते थे। यीशु ने कहा था, "लेने से देना धन्य है।" पौलुस ने वैसा ही किया। उसने अपना सब कुछ दे दिया। परमेश्वर हमेशा अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। जैसे पौलुस ने यूतुखुस को गले लगाया, वैसे ही परमेश्वर हमें गले लगाते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

पौलुस को जहाज़ से सीरिया जाना था, पर घात लगी और उसने रास्ता बदल दिया: "इसलिए उसने यह निश्चय किया कि मकिदुनिया होकर लौट जाए।" सुसमाचार का इतना बड़ा सेवक भी लंबा, घुमावदार रास्ता लेता है। हठ करना विश्वास नहीं होता। तेरी ज़िंदगी का जो मोड़ तुझे देर लगती दिख रही है, शायद वही परमेश्वर का सुरक्षित रास्ता है।

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