3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

व्यवस्थाविवरण 5

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक ऊँचा पहाड़ था। नाम था होरेब। पहाड़ पर आग जल रही थी। बड़ी, लाल आग। काला बादल भी था। और घना, गहरा अंधेरा भी था।

सब इस्राएली लोग पहाड़ के नीचे खड़े थे। वे डरे हुए थे। बहुत डरे हुए। फिर एक आवाज़ आई। आग के बीच से। बहुत ऊँची आवाज़। यह आवाज़ परमेश्वर की थी।

मूसा पहाड़ पर गया। लोग नीचे ही रहे। मूसा वहाँ खड़ा हुआ, बीच में। वह परमेश्वर की बात सुनता था। फिर नीचे आकर लोगों को बताता था।

इसका अर्थ क्या है?

परमेश्वर ने मूसा से कई बातें कहीं। छोटी छोटी बातें। पर बहुत ज़रूरी बातें।

"मुझे ही अपना परमेश्वर मानना," परमेश्वर ने कहा। "किसी मूरत के आगे झुकना मत।" "विश्राम के दिन को पवित्र रखना। छह दिन काम करना, सातवें दिन आराम करना।" "अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।" "खून मत करना। चोरी मत करना। झूठ मत बोलना। किसी की चीज़ का लालच मत करना।"

परमेश्वर ने ये सब बातें दो पत्थर की पटियों पर लिख दीं। अपने ही हाथ से। सारे पहाड़ पर आग थी, बादल था, अंधेरा था। और उसी में से परमेश्वर बोले।

मुख्य सूत्र

परमेश्वर ने पहले कहा, "मैं वही हूँ जो तुम्हें मिस्र से निकाल लाया।" देखो, परमेश्वर ने पहले उन्हें बचाया। फिर उन्हें रास्ता दिखाया। प्यार पहले आया। राह उसके बाद आई।

यीशु भी अपने पिता से ऐसे ही प्रेम करते थे। हर दिन, हर पल। वे अपने पिता की हर बात मानते थे। खुशी से मानते थे।

तुम्हारे लिए

तुम भी अपने माता पिता का आदर कर सकते हो। उनकी बात ध्यान से सुनकर। तुम भी किसी और की चीज़ नहीं लेना। अपनी ही चीज़ों से खेलना। और परमेश्वर से प्रेम करना। सुबह जागते ही, और रात को सोते समय भी।

परमेश्वर ने उस दिन पहाड़ पर ज़ोर से बोला। पर वह सब प्यार से बोला। वह चाहता था कि उसके लोग सुरक्षित रहें, और आनन्द से रहें।

बात करें

जब परमेश्वर पहाड़ पर आग के बीच से बोले, तो लोग कैसा महसूस कर रहे थे? तुम अपने पिता और अपनी माता का आदर कैसे कर सकते हो?

साथ प्रार्थना करें

प्रभु परमेश्वर, आप पहाड़ पर आग के बीच से बोले। धन्यवाद कि आप हमसे प्यार से बात करते हैं। हमें अपनी बातें मानने में मदद दें। आमीन।

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व्यवस्थाविवरण 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

व्यवस्थाविवरण 5 किस विषय में है?
एक ऊँचा पहाड़ था। नाम था होरेब। पहाड़ पर आग जल रही थी। बड़ी, लाल आग। काला बादल भी था। और घना, गहरा अंधेरा भी था।
व्यवस्थाविवरण 5 क्या कहता है?
मूसा पहाड़ पर गया। लोग नीचे ही रहे। मूसा वहाँ खड़ा हुआ, बीच में। वह परमेश्वर की बात सुनता था। फिर नीचे आकर लोगों को बताता था।
व्यवस्थाविवरण 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
"मुझे ही अपना परमेश्वर मानना," परमेश्वर ने कहा। "किसी मूरत के आगे झुकना मत।" "विश्राम के दिन को पवित्र रखना। छह दिन काम करना, सातवें दिन आराम करना।" "अपने पिता और अपनी माता का आदर करना।" "खून मत करना। चोरी मत करना। झूठ मत बोलना। किसी की चीज़ का लालच मत करना।"
नन्हे बच्चे व्यवस्थाविवरण 5 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने पहले कहा, "मैं वही हूँ जो तुम्हें मिस्र से निकाल लाया।" देखो, परमेश्वर ने पहले उन्हें बचाया। फिर उन्हें रास्ता दिखाया। प्यार पहले आया। राह उसके बाद आई।
व्यवस्थाविवरण 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम भी अपने माता पिता का आदर कर सकते हो। उनकी बात ध्यान से सुनकर। तुम भी किसी और की चीज़ नहीं लेना। अपनी ही चीज़ों से खेलना। और परमेश्वर से प्रेम करना। सुबह जागते ही, और रात को सोते समय भी।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

मूसा एक ही वाक्य में तीन सीढ़ियाँ रखता है: "उन्हें सुनो, ताकि उन्हें सीखो और चौकसी से उनका पालन करो।" सुनना आसान है, सीखना थोड़ा समय माँगता है, पर पालन करना जीवन बदल देता है। कई बार हम पहली सीढ़ी पर ही रुक जाते हैं और सोचते हैं कि काम पूरा हो गया। आज जो वचन तूने सुना, क्या वह तेरे कदमों तक पहुँचा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

सीनै पर लोगों ने कहा, "आज हमने देख लिया कि परमेश्वर मनुष्य से बातें करता है तौभी वह जीवित रहता है।" यह खोज उन्हें पास खींच सकती थी, पर वे पीछे हट गए और मूसा से कहा, तू ही सुन ले। सोचो, तुम भी कहीं ऐसा ही नहीं कर रहे? प्रचारक सुन ले, किताब सुन ले, मैं दूर से ही ठीक हूँ। परमेश्वर तुमसे बोलना चाहता है, और तुम जीते रहोगे।

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