सभोपदेशक 1
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक राजा था। उसका नाम सुलैमान था। वह यरूशलेम में रहता था। राजा के पास बहुत सी चीज़ें थीं। सोना था। बड़ा महल था। ढेर सारी किताबें थीं। पर राजा का दिल उदास था। बहुत उदास।
राजा हर सुबह सूरज को देखता था। सूरज ऊपर आता था। फिर नीचे चला जाता था। रोज़ रोज़ ऐसा ही होता था। राजा हवा को भी देखता था। हवा दक्षिण की ओर जाती थी। फिर उत्तर की ओर जाती थी। घूमती रहती थी, घूमती ही रहती थी।
राजा नदियों को भी देखता था। नदियाँ बहती थीं, समुद्र की ओर बहती थीं। पर समुद्र कभी नहीं भरता था। पानी फिर वापस चला जाता था। और फिर वही नदी बनकर बहता था।
राजा ने कहा, "मैंने सब कुछ देखा है।" उसने बहुत सोचा। उसने बहुत पढ़ा। उसने बहुत काम किया। पर उसका दिल फिर भी खाली रहा।
इसका क्या मतलब है?
राजा हवा को अपने हाथ से पकड़ना चाहता था। पर हवा को कोई नहीं पकड़ सकता, है ना? राजा ने कहा, हर चीज़ ऐसी ही है। सोना हाथ से फिसल जाता है। बड़ी बुद्धि भी फिसल जाती है। राजा थक गया था। बहुत थक गया था।
राजा को लगा, कुछ भी नया नहीं है। जो पहले हुआ, वही फिर होता है। सूरज वही है। हवा वही है। नदी वही है। राजा को कुछ ऐसा चाहिए था, जो कभी न बदले। कुछ ऐसा, जिस पर वह भरोसा कर सके।
समान सूत्र
पर एक बात कभी नहीं बदलती। परमेश्वर। सूरज उदय होता है और अस्त होता है, पर परमेश्वर सदा वही रहते हैं। वे कभी नहीं थकते। वे कभी नहीं बदलते।
बहुत साल बाद, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु हवा जैसे नहीं हैं। यीशु हाथ से फिसलते नहीं। जो यीशु के पास आता है, उसे वे कभी नहीं छोड़ते। यीशु ही वह हैं, जिन्हें राजा सुलैमान ढूंढ रहा था।
तुम्हारे लिए
तुम भी सूरज को देखो। सुबह वह ऊपर आता है। शाम वह नीचे जाता है। और परमेश्वर? वे हर दिन तुम्हारे साथ रहते हैं। सुबह भी। शाम भी।
जब तुम्हारा खिलौना टूट जाए, तो याद रखना। परमेश्वर नहीं टूटते। वे सदा तुम्हारे पास रहते हैं।
आपस में बात करें
तुम्हें सबसे ज़्यादा पसंद क्या चीज़ है? क्या वह चीज़ हमेशा रहेगी? सूरज हर दिन उगता है। इसे बनाने वाला कौन है?
आइए साथ में प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर, सूरज आपने बनाया। हवा भी आपने बनाई। आप कभी नहीं बदलते। आप हमेशा मेरे पास रहते हैं। धन्यवाद, प्रभु यीशु। आमीन।
सभोपदेशक 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
सभोपदेशक 1 किस विषय में है?
सभोपदेशक 1 क्या कहता है?
सभोपदेशक 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे सभोपदेशक 1 से क्या सीख सकते हैं?
सभोपदेशक 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
सूरज उदय होकर अस्त भी होता है, और अपने उदय की दिशा को वेग से चला जाता है।" सूरज हाँफता हुआ फिर वहीं लौट आता है जहाँ से चला था। तेरे दिन भी ऐसे ही लगते हैं न? वही उठना, वही काम, वही थकान। पर याद रख, सूरज बेमतलब नहीं दौड़ता, वह हर सुबह किसी और के हुक्म से निकलता है। तेरी दोहराव भरी ज़िंदगी भी उसी हाथ में है जिसने सूरज को उसका रास्ता दिया।
सुलैमान अपने ही मन से बात करता है: "मैंने अपने मन में कहा, 'देख, जितने यरूशलेम में मुझसे पहले थे, उन सबसे मैंने बड़ी और बहुत बुद्धि प्राप्त की है।'" सब कुछ पा लिया, फिर भी मन को समझाना पड़ रहा है। जो सचमुच भरा हो, उसे अपनी उपलब्धियाँ गिनकर खुद को तसल्ली नहीं देनी पड़ती। तू रात में अपने मन से क्या कहता है?
एक पीढ़ी जाती है, और दूसरी पीढ़ी आती है; परन्तु पृथ्वी बनी रहती है।" जिस मिट्टी पर तू आज चल रहा है, उस पर तेरे दादा भी चले थे। ज़मीन को तेरा नाम याद नहीं रहेगा, पर परमेश्वर को रहेगा। सोच, तू अपना छोटा सा जीवन किसके लिए खर्च कर रहा है, उसके लिए जो रह जाएगा या उसके लिए जो मिट जाएगा?
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