इफिसियों 3
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक छोटा, अंधेरा कमरा था। पत्थर की दीवारें थीं। ठंडी, सख्त ज़मीन थी। उस कमरे में पौलुस बैठा था। उसके पैरों में साँकल थी। वह बंदी था।
पर पौलुस डरा नहीं था। उसके मन में एक भेद था। एक बड़ा, अच्छा भेद। परमेश्वर ने उसे यह भेद बताया था।
भेद क्या था? सुनो। परमेश्वर सिर्फ एक ही देश के लोगों को नहीं चाहते। वे हर देश के लोगों को चाहते हैं। दूर देश के लोग भी, अनजाने लोग भी, अब यीशु मसीह में परिवार बन सकते हैं। सब मिलकर एक ही देह हैं। जैसे भाई-बहन एक ही घर में रहते हैं।
पौलुस को यह सुसमाचार सुनाने का काम मिला था। वह छोटे से भी छोटा था, उसने खुद यह कहा। पर परमेश्वर ने उसे चुना।
इसका क्या मतलब है?
इसका मतलब है, कोई बाहर नहीं रहता। हर एक को बुलाया गया है। दूर के लोग भी, अजनबी भी। जैसे कोई बड़ी मेज़ हो, और उस पर हर किसी के लिए जगह हो।
पौलुस कहता है, इसलिए हिम्मत मत हारो। कठिनाई में भी, यह भरोसा मत छोड़ो।
समान सूत्र
फिर पौलुस ने क्या किया? वह घुटनों पर बैठ गया। ज़मीन पर, पिता के सामने। हाथ जोड़कर।
उसने एक बड़ी प्रार्थना की। उसने कहा, परमेश्वर, इन्हें भीतर से मज़बूत करो। मसीह इनके हृदय में बस जाएँ, जैसे कोई घर में आकर रहता है।
फिर उसने कुछ माँगा, जो बहुत बड़ा है। उसने कहा, ये जानें कि मसीह का प्रेम कितना चौड़ा है, कितना लंबा, कितना ऊँचा, कितना गहरा। इतना बड़ा प्रेम, कि पूरी तरह समझा नहीं जा सकता।
यही यीशु मसीह हैं। उनके कारण हम बिना डरे, हिम्मत से, परमेश्वर के पास आ सकते हैं।
तुम्हारे लिए
तुम भी अपने दोनों हाथ खोलो। जितना चौड़ा हो सके, उतना खोलो।
देखो, कितना बड़ा! परमेश्वर का प्रेम इससे भी बड़ा है। ऊपर से भी ऊँचा। नीचे से भी गहरा।
तुम भी उसके परिवार में हो। दूर देश का बच्चा भी। पास वाला बच्चा भी। सब एक साथ।
आपस में बात करें
तुम्हें क्या लगता है, परमेश्वर का प्रेम कितना बड़ा है?
पौलुस घुटनों पर बैठकर प्रार्थना करता था। तुम कैसे प्रार्थना करते हो?
साथ में प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप मुझे प्यार करते हैं। आपका प्रेम इतना बड़ा है, इतना चौड़ा है। मुझे भी भीतर से मज़बूत बनाइए। यीशु, मेरे हृदय में आइए और रहिए। आमीन।
इफिसियों 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
इफिसियों 3 किस विषय में है?
इफिसियों 3 क्या कहता है?
इफिसियों 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे इफिसियों 3 से क्या सीख सकते हैं?
इफिसियों 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस यह बात जेल की जंजीरों में लिखता है, और फिर भी कहता है, "उस सनातन उद्देश्य के अनुसार जो उसने हमारे प्रभु मसीह यीशु में पूरा किया।" उसकी कैद परमेश्वर की योजना का टूटना नहीं थी। सोच, जो बात तुझे आज देर या चूक लगती है, वह भी शायद उसी अनन्त उद्देश्य का हिस्सा हो। परमेश्वर के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं, सिर्फ मसीह में एक ही योजना है, और तू उसमें छूटा हुआ नहीं है।
ताकि अब कलीसिया के द्वारा, स्वर्गीय स्थानों में प्रधानों और अधिकारियों पर परमेश्वर का विभिन्न प्रकार का ज्ञान प्रगट किया जाए।" सोचो, स्वर्ग के प्राणी परमेश्वर की बुद्धि देखने के लिए कहाँ ताक रहे हैं? तुम्हारी उस छोटी सी मंडली की ओर, जहाँ अलग अलग लोग एक साथ बैठते हैं। जिस भाई से मेल करना तुम्हें भारी लगता है, उसी मेल में परमेश्वर अपनी बुद्धि दिखाना चाहता है।
पौलुस ने यह नहीं कहा कि परमेश्वर की महिमा आकाश में या मन्दिर की भव्यता में हो, बल्कि लिखा, "उसी की महिमा कलीसिया में और मसीह यीशु में, सब पीढ़ियों में युगानुयुग होती रहे।" यानी उन थके, टूटे, आम लोगों के बीच जो रविवार को इकट्ठे होते हैं। तेरी वह छोटी मंडली, जिसे तू कभी कमज़ोर समझता है, परमेश्वर ने उसे ही अपनी महिमा दिखाने की जगह चुना है।
पौलुस यह नहीं कहता कि तुम अकेले मसीह के प्रेम को समझ लोगे। वह प्रार्थना करता है कि तुम "सब पवित्र लोगों के साथ भली भाँति समझने की शक्ति पाओ।" उस प्रेम की चौड़ाई, लम्बाई, ऊँचाई और गहराई इतनी बड़ी है कि एक जीवन उसे नाप नहीं सकता। इसलिए जिस भाई से तुम दूर हो गए हो, हो सकता है उसी के पास प्रेम का वह कोना हो जो तुमने अब तक नहीं देखा।
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