3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

गलातियों 3

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

एक बूढ़ा आदमी था। उसका नाम अब्राहम था। एक रात परमेश्वर ने उससे बात की। परमेश्वर ने कहा, "बाहर आ, आकाश की ओर देख।" अब्राहम बाहर गया। ऊपर देखा। बहुत सारे तारे थे। चमकते हुए तारे, इतने सारे कि गिने नहीं जा सकते थे। परमेश्वर ने कहा, "तेरे बच्चे भी इतने ही होंगे।" अब्राहम को यह अजीब लगा। वह तो बहुत बूढ़ा था। फिर भी अब्राहम ने परमेश्वर की बात मान ली। उसने कहा, "मुझे भरोसा है।" बस इतना ही। और परमेश्वर बहुत खुश हुए।

What Does This Mean?

अब्राहम ने कोई बड़ा काम नहीं किया। उसने कोई कठिन नियम नहीं निभाया। उसने बस भरोसा किया। परमेश्वर ने कहा, यही अच्छा है। यही काफी है। जो कोई परमेश्वर पर वैसे ही भरोसा करता है, वह भी अब्राहम जैसा बन जाता है। परमेश्वर ने वादा किया था, "तुझ में सब लोग आशीष पाएँगे।" यह वादा सिर्फ अब्राहम के लिए नहीं था। यह सबके लिए था। छोटे बच्चों के लिए भी।

The Common Thread

यह वादा किसी एक के बारे में था। उसका नाम यीशु था। बहुत साल बाद यीशु इस दुनिया में आए। फिर एक दिन कुछ बहुत दुखद हुआ। यीशु को एक लकड़ी के क्रूस पर लटकाया गया। वह बहुत दर्दनाक था। पर यीशु ने यह हमारे लिए सहा। ताकि परमेश्वर का वादा हम तक भी पहुँचे। ताकि सबको आशीष मिले, यहूदी हों या न हों, लड़का हो या लड़की। जो कोई यीशु पर भरोसा करता है, वह परमेश्वर का बच्चा बन जाता है। जैसे अब्राहम बना था।

For You

क्या तुम्हें पता है, परमेश्वर तुमसे भी बात करना चाहते हैं? जैसे उन्होंने अब्राहम से बात की। तुम्हें कोई बड़ा काम करने की ज़रूरत नहीं है। तुम बस उन पर भरोसा कर सकते हो। जैसे तुम अपने पापा का हाथ पकड़ते हो, अंधेरे में भी, क्योंकि तुम्हें पता है वे तुम्हें गिरने नहीं देंगे। ऐसे ही परमेश्वर पर भरोसा करना है। और जब तुम यीशु पर भरोसा करते हो, परमेश्वर तुम्हें अपना बच्चा बुलाते हैं। यह सुनने में कितना अच्छा लगता है, "मैं परमेश्वर का बच्चा हूँ।"

आज रात जब तारे दिखें, क्या तुम उन्हें गिन सकते हो, जैसे अब्राहम ने गिने थे?

परमेश्वर पर भरोसा करना कैसा लगता होगा, जैसे अब्राहम ने किया?

Praying Together

प्रिय परमेश्वर, आपने अब्राहम से बात की। आपने यीशु को हमारे लिए भेजा। मैं भी आप पर भरोसा करना चाहता हूँ। मुझे भी अपना बच्चा बनाइए। यीशु के नाम में, आमीन।

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गलातियों 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

गलातियों 3 किस विषय में है?
एक बूढ़ा आदमी था। उसका नाम अब्राहम था। एक रात परमेश्वर ने उससे बात की। परमेश्वर ने कहा, "बाहर आ, आकाश की ओर देख।" अब्राहम बाहर गया। ऊपर देखा। बहुत सारे तारे थे। चमकते हुए तारे, इतने सारे कि गिने नहीं जा सकते थे। परमेश्वर ने कहा, "तेरे बच्चे भी इतने ही होंगे।" अब्राहम को यह अजीब लगा। वह तो बहुत बूढ़ा था। फिर भी अब्राहम ने परमेश्वर की बात मान ली। उसने कहा, "मुझे भरोसा है।" बस इतना ही। और परमेश्वर बहुत खुश हुए।
गलातियों 3 क्या कहता है?
अब्राहम ने कोई बड़ा काम नहीं किया। उसने कोई कठिन नियम नहीं निभाया। उसने बस भरोसा किया। परमेश्वर ने कहा, यही अच्छा है। यही काफी है। जो कोई परमेश्वर पर वैसे ही भरोसा करता है, वह भी अब्राहम जैसा बन जाता है। परमेश्वर ने वादा किया था, "तुझ में सब लोग आशीष पाएँगे।" यह वादा सिर्फ अब्राहम के लिए नहीं था। यह सबके लिए था। छोटे बच्चों के लिए भी।
गलातियों 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह वादा किसी एक के बारे में था। उसका नाम यीशु था। बहुत साल बाद यीशु इस दुनिया में आए। फिर एक दिन कुछ बहुत दुखद हुआ। यीशु को एक लकड़ी के क्रूस पर लटकाया गया। वह बहुत दर्दनाक था। पर यीशु ने यह हमारे लिए सहा। ताकि परमेश्वर का वादा हम तक भी पहुँचे। ताकि सबको आशीष मिले, यहूदी हों या न हों, लड़का हो या लड़की। जो कोई यीशु पर भरोसा करता है, वह परमेश्वर का बच्चा बन जाता है। जैसे अब्राहम बना था।
नन्हे बच्चे गलातियों 3 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुम्हें पता है, परमेश्वर तुमसे भी बात करना चाहते हैं? जैसे उन्होंने अब्राहम से बात की। तुम्हें कोई बड़ा काम करने की ज़रूरत नहीं है। तुम बस उन पर भरोसा कर सकते हो। जैसे तुम अपने पापा का हाथ पकड़ते हो, अंधेरे में भी, क्योंकि तुम्हें पता है वे तुम्हें गिरने नहीं देंगे। ऐसे ही परमेश्वर पर भरोसा करना है। और जब तुम यीशु पर भरोसा करते हो, परमेश्वर तुम्हें अपना बच्चा बुलाते हैं। यह सुनने में कितना अच्छा लगता है, "मैं परमेश्वर का बच्चा हूँ।"
गलातियों 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
आज रात जब तारे दिखें, क्या तुम उन्हें गिन सकते हो, जैसे अब्राहम ने गिने थे?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

जो कोई व्यवस्था की पुस्तक में लिखी हुई सब बातों के करने में स्थिर नहीं रहता, वह श्रापित है।" ध्यान दे, शर्त "सब बातों" है, कुछ बातें नहीं। अपनी कोशिशों के भरोसे जीना ऐसा है जैसे टूटी डोर से लटकना। एक भी गाँठ खुली, तो सब खत्म। तू आज किस चीज़ पर टिका है, अपने अच्छे कामों की गिनती पर, या मसीह पर?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 29

और यदि तुम मसीह के हो, तो अब्राहम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।" ध्यान दो, पौलुस ने यह नहीं कहा कि तुम कितने अच्छे हो, किस घराने से हो, कितनी व्यवस्था निभाई। बस एक ही शर्त, तुम मसीह के हो। जिस विरासत के लिए अब्राहम ने वर्षों प्रतीक्षा की, वह तुम्हारे नाम लिख दी गई। तुम्हारी पहचान तुम्हारे अतीत से नहीं, उसके अपनेपन से बनी है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

वह अपराधों के कारण दी गई," पौलुस कहता है। व्यवस्था तुम्हें बुरा नहीं बनाती, वह सिर्फ नाम देती है उस बीमारी को जो पहले से भीतर है। और उसकी एक तारीख थी, "उस वंश के आने तक।" यानी वह हमेशा के लिए तुम्हारा न्यायी नहीं ठहरी। मसीह आ गया। अब जो दर्पण तुम्हें दोष दिखाता था, वह तुम्हें उसके पास ले जाता है जो धो देता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 20

व्यवस्था मूसा के हाथ से आई, बीच में एक मध्यस्थ खड़ा था। पर अब्राहम से की गई प्रतिज्ञा में कोई बिचौलिया नहीं था, परमेश्वर ने खुद कहा और खुद ही निभाया। "अब मध्यस्थ एक का नहीं होता, परन्तु परमेश्वर एक ही है।"

सोचो, तुम्हारे उद्धार का वादा किसी सौदे पर नहीं टिका, जिसमें तुम्हारा हिस्सा पूरा न हो तो सब टूट जाए। वह अकेले उसकी वफ़ादारी पर टिका है। तुम्हारे कमज़ोर दिनों में भी वह वादा हिलता नहीं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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