एस्तेर 1
छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
बहुत दूर, एक बड़े देश में, एक राजा रहता था। उसका नाम था क्षयर्ष। वह बहुत बड़ा राजा था। उसका महल शूशन नाम की जगह में था।
एक दिन राजा ने एक बड़ी दावत दी। बहुत बड़ी! उसने अपने सब हाकिमों को बुलाया। वे आए, और आए, और आए। दावत चली एक सौ अस्सी दिन तक। सोचो, इतने दिन!
फिर राजा ने और एक दावत दी। यह दावत बगीचे में थी। सफेद और नीले पर्दे हवा में हिल रहे थे। चांदी के छल्लों में बंधे हुए। फर्श लाल, सफेद और काले संगमरमर का था, चमकता हुआ।
सोने के कटोरों में दाखमधु भरा था। हर कटोरा अलग था। लोग पीते थे, जितना चाहें, जब चाहें। कोई किसी को जबरदस्ती नहीं कराता था।
रानी वशती भी पीछे नहीं रही। उसने भी स्त्रियों को भोज दिया, अपने महल में।
सातवें दिन राजा का मन दाखमधु से खुश था। उसने अपने सेवकों से कहा, "रानी वशती को यहाँ बुलाओ। वह बहुत सुंदर है। सब उसे देखें।"
सेवक दौड़े गए। पर रानी वशती ने कहा, "नहीं। मैं नहीं आऊँगी।"
राजा को बहुत गुस्सा आया। आग जैसा गुस्सा! उसका चेहरा लाल हो गया।
इसका क्या अर्थ है?
राजा ने अपने बुद्धिमान सलाहकारों को बुलाया। उनमें से एक का नाम था ममूकान। उसने कहा, "राजा, यह बात सिर्फ आपकी नहीं है। सब स्त्रियाँ यह सुनेंगी। वे भी अपने पतियों की बात नहीं मानेंगी।"
राजा ने यह बात मान ली। उसने एक नियम बनाया। एक चिट्ठी लिखी गई, हर भाषा में, हर देश में। चिट्ठी में लिखा था, रानी वशती फिर कभी राजा के सामने नहीं आएगी।
बड़ा राजा था, बड़ा महल था, सोने के कटोरे थे। पर राजा अपने ही गुस्से को नहीं रोक पाया। कितना बड़ा राजा था, पर वह भी एक छोटी बात पर इतना परेशान हो गया।
एक ही कहानी की कड़ी
इस कहानी में परमेश्वर का नाम कहीं नहीं लिखा है। पर परमेश्वर वहाँ थे। वे राजा को देख रहे थे। वे रानी वशती को भी देख रहे थे। वे महल के हर कोने में देख रहे थे।
जब कोई हमारा नाम न ले, तब भी परमेश्वर हमें देखते हैं। वे हर जगह होते हैं, हर दिन।
तुम्हारे लिए
कभी-कभी तुम्हें भी बहुत गुस्सा आता है, है ना? जैसे राजा को आया। पर परमेश्वर तब भी तुम्हें देखते हैं और तुमसे प्यार करते हैं।
जब गुस्सा आए, तो परमेश्वर से बात कर सकते हो। वे सुनते हैं।
बात करें
राजा को इतना गुस्सा क्यों आया? परमेश्वर उस महल में किसे-किसे देख रहे थे?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर, आप हर जगह हमें देखते हैं। जब हमें गुस्सा आए, हमारी मदद करें। हमें शांत रहना सिखाएं। आमीन।
एस्तेर 1 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एस्तेर 1 किस विषय में है?
एस्तेर 1 क्या कहता है?
एस्तेर 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे एस्तेर 1 से क्या सीख सकते हैं?
एस्तेर 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
राजा ने रानी को बुलाया, पर बातचीत के लिए नहीं। "कि देश-देश के लोगों और हाकिमों पर उसकी सुन्दरता प्रगट हो; क्योंकि वह देखने में सुन्दर थी।" वह एक व्यक्ति नहीं, एक प्रदर्शनी बन गई। सोचो, क्या तुम भी किसी को सिर्फ इसलिए पास रखते हो कि वह तुम्हारी शोभा बढ़ाता है? परमेश्वर कभी किसी को दिखावे की वस्तु नहीं बनाता।
यह बात राजा और हाकिमों को अच्छी लगी" और बस इतने से एक पूरे राज्य का कानून बन गया। ध्यान दे, सलाह सही थी या नहीं, यह किसी ने नहीं पूछा। बस अच्छी लगी। घायल अहंकार को जो बात सहलाती है, वह हमें हमेशा समझदारी जैसी लगती है। तेरे आसपास कौन तुझे वही कहता है जो तू सुनना चाहता है? और क्या तू उसी की सबसे ज़्यादा सुनता है?
एक राजा जिसके पास एक सौ सत्ताईस प्रान्त थे, और उसके सलाहकार एक स्त्री के "नहीं" से काँप उठे। मेमूकान कहता है, "रानी की यह बात सब स्त्रियों में फैल जाएगी।" डर ने कानून बनवा दिया। जो आदर जबरदस्ती माँगना पड़े, वह आदर नहीं, बस खौफ है। सोचो, अपने घर में तुम आदर कमाते हो या माँगते हो?
उन दिनों में जब राजा क्षयर्ष शूशन नामक राजगढ़ में अपने राज्य के सिंहासन पर विराजमान था," कहानी यहाँ से शुरू होती है, मगर एक सिंहासन पर नहीं। वह राजगढ़ आज खंडहर है, और परमेश्वर के लोग आज भी जीवित हैं। जो तुझे आज सबसे बड़ा और अटल दिखता है, वह भी एक दिन "उन दिनों में" बन जाएगा। तू अपना भरोसा किस सिंहासन पर रखे हुए है?
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