3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

रोमियों 10

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक आदमी था। उसका नाम पौलुस था। पौलुस को अपने भाई-बहन बहुत प्यारे थे। वह उनके लिए परमेश्वर से बात करता था। वह कहता था, "परमेश्वर, इन्हें बचा लीजिए।" पौलुस का मन बहुत भारी था। उसके भाई-बहन परमेश्वर को ढूँढ रहे थे, पर सही राह नहीं जानते थे।

कोई सोचता था, "क्या मुझे आकाश में चढ़ना पड़ेगा? तब मुझे यीशु मिलेंगे?" कोई सोचता था, "क्या मुझे गहरे में उतरना पड़ेगा?" पर परमेश्वर का वचन दूर नहीं है। वह पास है। बहुत पास। वह तुम्हारे मुँह में है। वह तुम्हारे मन में है।

इसका मतलब क्या है?

सुनो, यह सुन्दर बात है। अपने मुँह से कहो, "यीशु मसीह प्रभु हैं।" अपने मन से मानो, परमेश्वर ने उन्हें मरे हुओं में से जिलाया। तब तुम बच जाओगे। मन मानता है, मुँह कहता है। दोनों साथ चलते हैं, जैसे दो पैर साथ चलते हैं।

मुख्य सूत्र

यीशु मसीह ही रास्ता हैं। पहले लोग बहुत नियम रखते थे, पर नियम पूरे करना कठिन था। अब यीशु के पास आना आसान है। जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। यहूदी हो या यूनानी, कोई भेद नहीं। प्रभु सब का प्रभु है, और वे उदार हैं, सबके लिए बाहें खोले हुए।

पर एक बात और है। जिसने सुना ही नहीं, वह विश्वास कैसे करेगा? किसी को जाना होगा, बताना होगा। सोचो, कोई दौड़ रहा है। उसके पैरों में धूल है। वह हांफ रहा है। पर वह मुस्कुरा रहा है, क्योंकि उसके पास खुशखबरी है। लिखा है, "उनके पाँव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!" कैसे सुहावने पैर! धूल भरे, पर सुहावने।

तुम्हारे लिए

तुम भी कह सकते हो, "यीशु प्रभु हैं।" अभी, धीरे से बोलो। अपने मन में भी मानो, परमेश्वर ने उन्हें फिर से जिलाया। और कभी किसी को खुशखबरी बताओ। शायद अपनी छोटी बहन को। शायद अपने दोस्त को। अपने पैरों से जाओ, और मुँह से बताओ, यीशु प्रभु हैं।

बात करें

तुम अपने मुँह से क्या कह सकते हो, यीशु के बारे में?

तुम किसे खुशखबरी बता सकते हो, कि यीशु प्रभु हैं?

मिलकर प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, मेरे मुँह से मैं कहता हूँ, यीशु प्रभु हैं। मेरे मन से मैं मानता हूँ, आपने उन्हें जिलाया। मुझे भी खुशखबरी बताने वाले पैर दे दीजिए। आमीन।

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रोमियों 10 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

रोमियों 10 किस विषय में है?
एक आदमी था। उसका नाम पौलुस था। पौलुस को अपने भाई-बहन बहुत प्यारे थे। वह उनके लिए परमेश्वर से बात करता था। वह कहता था, "परमेश्वर, इन्हें बचा लीजिए।" पौलुस का मन बहुत भारी था। उसके भाई-बहन परमेश्वर को ढूँढ रहे थे, पर सही राह नहीं जानते थे।
रोमियों 10 क्या कहता है?
कोई सोचता था, "क्या मुझे आकाश में चढ़ना पड़ेगा? तब मुझे यीशु मिलेंगे?" कोई सोचता था, "क्या मुझे गहरे में उतरना पड़ेगा?" पर परमेश्वर का वचन दूर नहीं है। वह पास है। बहुत पास। वह तुम्हारे मुँह में है। वह तुम्हारे मन में है।
रोमियों 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सुनो, यह सुन्दर बात है। अपने मुँह से कहो, "यीशु मसीह प्रभु हैं।" अपने मन से मानो, परमेश्वर ने उन्हें मरे हुओं में से जिलाया। तब तुम बच जाओगे। मन मानता है, मुँह कहता है। दोनों साथ चलते हैं, जैसे दो पैर साथ चलते हैं।
नन्हे बच्चे रोमियों 10 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु मसीह ही रास्ता हैं। पहले लोग बहुत नियम रखते थे, पर नियम पूरे करना कठिन था। अब यीशु के पास आना आसान है। जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। यहूदी हो या यूनानी, कोई भेद नहीं। प्रभु सब का प्रभु है, और वे उदार हैं, सबके लिए बाहें खोले हुए।
रोमियों 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
पर एक बात और है। जिसने सुना ही नहीं, वह विश्वास कैसे करेगा? किसी को जाना होगा, बताना होगा। सोचो, कोई दौड़ रहा है। उसके पैरों में धूल है। वह हांफ रहा है। पर वह मुस्कुरा रहा है, क्योंकि उसके पास खुशखबरी है। लिखा है, "उनके पाँव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं!

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

वह सब का प्रभु है और अपने सब नाम लेनेवालों के लिये उदार है।" पौलुस यह उन लोगों से कह रहा था जो जाति और परंपरा के आधार पर खुद को दूसरों से ऊँचा समझते थे। परमेश्वर के पास कोई ऊँची पंक्ति नहीं है, कोई पिछड़ी कतार नहीं। तेरी जाति, तेरा गाँव, तेरा बीता हुआ जीवन उसकी उदारता की सीमा तय नहीं करते। तू पुकार, वह सुनता है। सवाल यह है कि जिन्हें तू अपने से छोटा मानता है, उनके लिए भी तेरा दिल इतना ही खुला है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 21

मैं सारे दिन अपने हाथ एक आज्ञा न माननेवाली और विवाद करनेवाली प्रजा की ओर बढ़ाए रहा।" सोचो, हाथ फैलाए रखना कितना थका देता है। परमेश्वर सारे दिन ऐसे ही खड़ा रहा, बुलाता रहा, और लोग मुँह फेरते रहे। तुम्हारी ओर भी वे हाथ अब तक फैले हैं। सवाल यह नहीं कि वह कब तक रुकेगा, सवाल यह है कि तुम कब तक टालोगे।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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