3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

यहेजकेल 34

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बार बहुत सारी भेड़-बकरियाँ थीं। छोटी-छोटी, सफेद-सफेद भेड़ें। उनके पास चरवाहे थे। चरवाहों को भेड़-बकरियों की रखवाली करनी थी। रोज़ सुबह उन्हें घास पर ले जाना था। रोज़ शाम उन्हें घर लाना था।

पर ये चरवाहे कैसे थे? ये चरवाहे केवल अपना पेट भरते थे। वे मोटा-मोटा दूध पीते थे। वे गरम-गरम ऊन पहनते थे। पर भेड़-बकरियों को वे कुछ नहीं देते थे।

बीमार भेड़ को किसी ने ठीक नहीं किया। घायल भेड़ का घाव किसी ने नहीं बाँधा। खोई हुई भेड़ को किसी ने नहीं खोजा।

तब भेड़-बकरियाँ इधर-उधर भटक गईं। पहाड़ों पर, ऊँचे टीलों पर। दूर, बहुत दूर। रात आई। ठंडी और काली रात। भेड़ें अकेली थीं। कोई उनकी सुधि नहीं लेता था। वे डरी हुई थीं। बहुत डरी हुई थीं।

इसका क्या अर्थ है?

तब परमेश्वर ने यह सब देखा। परमेश्वर को अपनी भेड़ों से बहुत प्यार है। परमेश्वर ने कहा, "मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों की सुधि लूँगा।" कितनी अच्छी बात!

परमेश्वर ने कहा, "मैं खोई हुई को ढूँढूँगा। भटकी हुई को लौटा लाऊँगा। घायल के घाव बाँधूँगा। बीमार को बलवान करूँगा।" कोई और चरवाहा नहीं, परमेश्वर खुद चरवाहा बनेंगे।

परमेश्वर ने कहा, "मैं उन्हें अच्छी चराई में चराऊँगा।" हरी-हरी घास, मुलायम-मुलायम। ठंडा, साफ पानी। भेड़ें वहाँ बैठेंगी, आराम से, बिना डर के।

एक ही कहानी की कड़ी

बहुत साल बाद, यीशु आए। यीशु ने कहा, वे ही अच्छे चरवाहे हैं। जैसे परमेश्वर ने वादा किया था, ठीक वैसे ही यीशु खोई हुई भेड़ को ढूँढ़ते हैं। यीशु हर एक बच्चे को जानते हैं। हर एक भेड़ को नाम से बुलाते हैं। कोई भी भेड़ इतनी छोटी नहीं, इतनी दूर नहीं, कि यीशु उसे ढूँढ़ न सकें।

आपके लिए

क्या तुम कभी खो गए हो? भीड़ में, या पार्क में? कैसा लगा वह? डर लगा, न? दिल तेज़-तेज़ धड़कता है, आँखों में आँसू आते हैं।

परमेश्वर कहते हैं, "तुम मेरी भेड़ हो, और मैं तुम्हारा परमेश्वर हूँ।" वे तुम्हें कभी नहीं भूलते। वे तुम्हें ढूँढ़ते हैं, जब तुम खो जाओ। वे तुम्हें अपनी गोद में उठा लेते हैं। तुम सुरक्षित हो, क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे चरवाहे हैं।

बात करें

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप मुझे ढूँढ़ते हैं। धन्यवाद कि आप मेरे चरवाहे हैं। मुझे अपनी हरी घास पर बैठा दें, आपके पास, बिना डर के। आमीन।

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यहेजकेल 34 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 34 किस विषय में है?
एक बार बहुत सारी भेड़-बकरियाँ थीं। छोटी-छोटी, सफेद-सफेद भेड़ें। उनके पास चरवाहे थे। चरवाहों को भेड़-बकरियों की रखवाली करनी थी। रोज़ सुबह उन्हें घास पर ले जाना था। रोज़ शाम उन्हें घर लाना था।
यहेजकेल 34 क्या कहता है?
बीमार भेड़ को किसी ने ठीक नहीं किया। घायल भेड़ का घाव किसी ने नहीं बाँधा। खोई हुई भेड़ को किसी ने नहीं खोजा।
यहेजकेल 34 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
तब परमेश्वर ने यह सब देखा। परमेश्वर को अपनी भेड़ों से बहुत प्यार है। परमेश्वर ने कहा, "मैं आप ही अपनी भेड़-बकरियों की सुधि लूँगा।" कितनी अच्छी बात!
नन्हे बच्चे यहेजकेल 34 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने कहा, "मैं उन्हें अच्छी चराई में चराऊँगा।" हरी-हरी घास, मुलायम-मुलायम। ठंडा, साफ पानी। भेड़ें वहाँ बैठेंगी, आराम से, बिना डर के।
यहेजकेल 34 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम कभी खो गए हो? भीड़ में, या पार्क में? कैसा लगा वह? डर लगा, न? दिल तेज़-तेज़ धड़कता है, आँखों में आँसू आते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

परमेश्वर अपनी भेड़ों से कहता है, "वे फिर जाति-जाति के लोगों के लिये लूट न बनेंगी, और न मैदान के जीवजन्तु उन्हें फाड़ खाएँगे; वे निडर रहेंगी और कोई उनको न डराएगा।" ध्यान दो, वादा यह नहीं कि भेड़ें ताकतवर हो जाएँगी, बल्कि यह कि चरवाहा पास है। तेरी सुरक्षा तेरी हिम्मत पर नहीं, उसकी उपस्थिति पर टिकी है। आज किस डर को तू अब भी खुद ही सँभाल रहा है?

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