3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

आमोस 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

आमोस एक चरवाहा था। हर दिन वह भेड़-बकरियों के पीछे चलता था। धूप उसकी पीठ पर गरम लगती थी। उसके पैर धूल से भरे थे। कभी वह पेड़ों की टहनियाँ छाँटता था।

एक दिन परमेश्वर ने आमोस से बात की। परमेश्वर ने कहा, "जा, मेरे लोगों से बात कर।" और आमोस चल पड़ा।

परमेश्वर ने आमोस को कुछ दिखाया। जैसे एक तस्वीर। आमोस ने बहुत सी टिड्डियाँ देखीं। हरी, छोटी, कूदती टिड्डियाँ। वे घास खाने लगीं। चट, चट, चट। सारी घास खा गईं।

आमोस डर गया। उसने कहा, "हे परमेश्वर, माफ कर दीजिए! ये लोग तो बहुत छोटे हैं।" और परमेश्वर ने सुना। परमेश्वर ने कहा, "अच्छा, ऐसा नहीं होगा।"

फिर परमेश्वर ने आमोस को और कुछ दिखाया। आग। बहुत बड़ी, बहुत गरम आग। आमोस ने फिर कहा, "हे परमेश्वर, रुक जाइए!" और परमेश्वर ने फिर सुना। परमेश्वर ने कहा, "ऐसा भी नहीं होगा।"

इसका क्या अर्थ है?

और तब आमोस ने कुछ और देखा। सुनो, यह खास था।

परमेश्वर एक दीवार के पास खड़े थे। उनके हाथ में एक डोरी थी। डोरी के नीचे एक भारी पत्थर लटका था। ऐसी डोरी हमेशा सीधी लटकती है। बिल्कुल सीधी।

परमेश्वर ने पूछा, "आमोस, तुझे क्या दिखता है?"

आमोस ने कहा, "एक डोरी।"

राजमिस्त्री ऐसी डोरी दीवार के पास रखता है। तब वह देख सकता है: क्या दीवार सीधी है? या टेढ़ी?

परमेश्वर ने कहा, "मैं अपने लोगों के पास यह डोरी रखूँगा।" परमेश्वर देखना चाहते थे: क्या मेरे लोग सीधे चल रहे हैं? पर लोग टेढ़े हो गए थे। वे परमेश्वर को भूल गए थे। यह परमेश्वर को बहुत दुख देता था।

जोड़ने वाला धागा

बेतेल में एक आदमी था। उसका नाम अमस्याह था। उसे आमोस की बातें अच्छी नहीं लगीं।

अमस्याह गुस्सा हुआ। उसने कहा, "आमोस, चले जाओ! यहाँ से भाग जाओ! यहाँ मत बोलो!"

आमोस चुप नहीं हुआ। आमोस ने कहा, "मैं तो बस एक चरवाहा था। मेरे पास गाय-बैल थे। पर परमेश्वर ने मुझे बुलाया। परमेश्वर ने कहा, जा और बोल। इसलिए मैं बोलता हूँ।"

देखो, आमोस बहादुर था। वह अकेला था, पर वह डरा नहीं। क्योंकि परमेश्वर उसके साथ थे।

और परमेश्वर आज भी बोलते हैं। वे अपने लोगों को नहीं छोड़ते। बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु टेढ़े दिलों को फिर सीधा करते हैं।

तुम्हारे लिए

परमेश्वर तुम्हें भी देखते हैं। हर दिन।

कभी तुम कुछ गलत करते हो। मैं भी करता हूँ। तब हम परमेश्वर से कह सकते हैं, "माफ कर दीजिए।" जैसे आमोस ने कहा।

और सुनो, परमेश्वर सुनते हैं। वे हमेशा सुनते हैं।

इस पर बात करें

अगर तुम कोई गलत काम करो, तो तुम परमेश्वर से क्या कह सकते हो?

आमोस कोई बड़ा आदमी नहीं था, वह चरवाहा था। क्या परमेश्वर तुम्हें भी बुला सकते हैं?

मिलकर प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, आप हमें देखते हैं। आप हमें सुनते हैं। जब मैं कुछ गलत करूँ, मुझे माफ कर दीजिए। मुझे सीधा चलना सिखाइए। धन्यवाद कि आप मुझसे प्यार करते हैं। आमीन।

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आमोस 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

आमोस 7 किस विषय में है?
आमोस एक चरवाहा था। हर दिन वह भेड़-बकरियों के पीछे चलता था। धूप उसकी पीठ पर गरम लगती थी। उसके पैर धूल से भरे थे। कभी वह पेड़ों की टहनियाँ छाँटता था।
आमोस 7 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर ने आमोस को और कुछ दिखाया। आग। बहुत बड़ी, बहुत गरम आग। आमोस ने फिर कहा, "हे परमेश्वर, रुक जाइए!" और परमेश्वर ने फिर सुना। परमेश्वर ने कहा, "ऐसा भी नहीं होगा।"
आमोस 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बेतेल में एक आदमी था। उसका नाम अमस्याह था। उसे आमोस की बातें अच्छी नहीं लगीं।
नन्हे बच्चे आमोस 7 से क्या सीख सकते हैं?
और परमेश्वर आज भी बोलते हैं। वे अपने लोगों को नहीं छोड़ते। बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु टेढ़े दिलों को फिर सीधा करते हैं।
आमोस 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु परमेश्वर, आप हमें देखते हैं। आप हमें सुनते हैं। जब मैं कुछ गलत करूँ, मुझे माफ कर दीजिए। मुझे सीधा चलना सिखाइए। धन्यवाद कि आप मुझसे प्यार करते हैं। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

अमस्याह ने आमोस के शब्द ठीक से दोहराए, "यारोबाम तलवार से मारा जाएगा, और इस्राएल अपनी भूमि पर से निश्चय बँधुआई में जाएगा।" पर उसने उन्हें चेतावनी नहीं, राजद्रोह समझा। परमेश्वर की बात सुनकर घुटने टेकने के बजाय उसने शिकायत दर्ज की। कभी सोचा है, जो वचन तुझे चुभता है, उसे तू सुधार मानता है या हमला?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

अमस्याह ने आमोस को दरबारी नबी समझकर भगाना चाहा, पर आमोस का जवाब सीधा था: "मैं न तो भविष्यद्वक्ता था, और न भविष्यद्वक्ता का बेटा; मैं तो गाय-बैल का चरवाहा, और गूलर के वृक्षों का सुधारनेवाला था।" उसके पास कोई पदवी नहीं थी, बस परमेश्वर की बुलाहट थी। तुम भी सोचते हो कि तुम काफी नहीं हो? परमेश्वर योग्य लोगों को नहीं बुलाता, वह बुलाए हुओं को योग्य बनाता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

प्रभु यहोवा ने मुझे यह दिखाया: और क्या देखता हूँ कि उसने पिछली घास के उगने के आरम्भ में टिड्डियाँ उत्पन्न कीं।" ध्यान दे, यह वह घास थी जो राजा की कटनी के बाद बची थी, यानी गरीब किसान की आखिरी उम्मीद। परमेश्वर आमोस को पहले दिखाता है, ताकि वह देखकर विनती करे। तुझे भी कोई बोझ दिखा है? शायद इसलिए, कि तू चुप न रहे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

अमस्याह याजक था, फिर भी उसने कहा, "इस्राएल के विरुद्ध भविष्यद्वाणी न कर।" उसे परमेश्वर का वचन नहीं, चुप्पी चाहिए थी। हम भी कभी ऐसे ही होते हैं। जो उपदेश चुभता है, उसे टाल देते हैं, और जो आयत सांत्वना देती है, उसे बार बार दोहराते हैं। सोच, आज तूने किस सच्चाई को सुनने से मन फेर लिया है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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