एज्रा 8
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एज्रा एक नदी के किनारे खड़ा था। नदी का नाम अहावा था। पानी धीरे धीरे बहता था। उसके साथ बहुत सारे लोग थे। माँ, पिता, बच्चे, सब। वे एक लंबी यात्रा पर जाने वाले थे। यरूशलेम तक, बहुत दूर। वहाँ परमेश्वर का भवन था। एज्रा के हाथ में एक बड़ा थैला था। उसमें चाँदी थी, चमकती हुई। सोना भी था, पीला और चमकदार। ये सब परमेश्वर के भवन के लिए थे। राजा ने दिया था, और लोगों ने भी दिया था। एज्रा ने थैला कसकर पकड़ा। बहुत कीमती था यह सामान।
इसका मतलब क्या है?
रास्ता लंबा था। रास्ते में बुरे लोग भी हो सकते थे। वे सोना चाँदी छीन सकते थे। एज्रा डर गया। बहुत डर गया। पर उसने सिपाही नहीं माँगे। उसने कुछ और किया। उसने सब लोगों को बुलाया। "आओ, हम परमेश्वर से माँगें," उसने कहा। सब लोग बैठ गए। उन्होंने खाना नहीं खाया। वे चुप रहे, और प्रार्थना की। "हमें रास्ते में बचा लीजिए," वे बोले। परमेश्वर ने सुना। हाँ, परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना सुनी।
एक ही कहानी की कड़ी
फिर वे चले। चलते रहे, दिन पर दिन। धूप तेज़ थी। पैर थक गए थे। पर कोई बुरा आदमी नहीं आया। कोई नहीं लूटा उन्हें। परमेश्वर ने उन्हें बचाया, जैसे उन्होंने माँगा था। आखिर में वे यरूशलेम पहुँचे। बहुत खुश हुए सब। उन्होंने सोना चाँदी याजकों को दिया। हर एक चीज़ गिनी गई, तौली गई। फिर उन्होंने बछड़े, मेढ़े और मेम्ने लाए। उन्होंने उन्हें आग पर चढ़ाया, परमेश्वर के लिए। धन्यवाद के लिए। परमेश्वर ने उनकी रक्षा की थी, इसलिए।
तुम्हारे लिए
तुम भी कभी डरते हो? अंधेरे में, या किसी नए रास्ते पर? एज्रा भी डरा था। पर उसने परमेश्वर से बात की। उसने नहीं छुपाया अपना डर। तुम भी परमेश्वर से बात कर सकते हो। जब डर लगे, तब कह सकते हो, "परमेश्वर, मेरे साथ रहिए।" परमेश्वर तुम्हारी भी सुनते हैं, जैसे उन्होंने एज्रा की सुनी।
आपस में बात करें
एज्रा डरा था, फिर उसने क्या किया?
तुम जब डरते हो, तब किससे बात कर सकते हो?
चलो मिलकर प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप एज्रा और सब लोगों के साथ रहे। जब मैं डरूँ, तब मेरे साथ भी रहिए। मुझे पता है, आप मेरी सुनते हैं। आमीन।
एज्रा 8 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
एज्रा 8 किस विषय में है?
एज्रा 8 क्या कहता है?
एज्रा 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे एज्रा 8 से क्या सीख सकते हैं?
एज्रा 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
बेबै के वंश में से बेबै का पुत्र जकर्याह, और उसके साथ अट्ठाईस पुरुष" (एज्रा 8:11). बस एक नाम और एक गिनती। न कोई चमत्कार, न कोई भाषण। फिर भी परमेश्वर ने इन अट्ठाईस को गिनवाकर लिखवा दिया।
तुम सोचते हो तुम्हारा साथ चलना किसी को दिखता नहीं। पर जो लौटने के लिए उठ खड़े होते हैं, उनका हिसाब स्वर्ग में रखा जाता है। तुम भीड़ नहीं हो, तुम गिने हुए हो।
यात्रा सुरक्षित पूरी हुई, खज़ाना गिनकर सौंप दिया गया, और तब सबसे पहले जो हुआ वह बलिदान था। ध्यान दो, "सारे इस्राएल के लिये बारह बछड़े" चढ़े, जबकि लौटे हुए लोग तो थोड़े से ही थे। जो भाई दूर छूट गए थे, उन्हें भी वे वेदी पर साथ लाए। और पापबलि भी चढ़ाई, क्योंकि बच जाना पवित्र हो जाना नहीं है। तेरी प्रार्थना में कौन छूट रहा है?
एज्रा ने गिनती की और पाया कि लेवियों की कमी है। उसने आदमी भेजे, इंतजार किया, और जब शेरेब्याह अपने अठारह लोगों के साथ आया तो एज्रा ने अपनी योजना की तारीफ नहीं की। उसने लिखा, "हमारे परमेश्वर की कृपादृष्टि हम पर थी।" जो कमी तुझे आज खल रही है, उसे परमेश्वर के सामने रख। और जब कोई आए, तो याद रखना कि उसे किसने भेजा।
अहवा नदी से यरूशलेम तक का रास्ता लम्बा था, और एज्रा ने राजा से सिपाही माँगने में शर्म महसूस की थी, क्योंकि उसने कहा था कि परमेश्वर का हाथ उसके खोजनेवालों पर रहता है। फिर लिखा है, "हमारे परमेश्वर का हाथ हम पर रहा; और उसने हमको शत्रुओं और मार्ग पर घात लगानेवालों के हाथ से बचाया।" तूने जो कहा है कि परमेश्वर पर भरोसा है, क्या तेरा असली सहारा भी वही है?
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