7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

एज्रा 8

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एज्रा एक याजक था। वह बाबेल में रहता था, पर उसका दिल यरूशलेम में था। राजा अर्तक्षत्र ने उसे इस्राएल के लोगों के साथ यरूशलेम जाने की आज्ञा दी। बहुत से लोग एज्रा के साथ चलने को तैयार हुए, परिवार दर परिवार, सैकड़ों पुरुष, अपने बाल-बच्चों के साथ। पर जब सब लोग नदी के पास इकट्ठे हुए, एज्रा ने कुछ देखा जो उसे चिंतित कर गया। एक भी लेवीय नहीं था। लेवीय वे लोग थे जो परमेश्वर के भवन में सेवा करते थे। बिना उनके यरूशलेम में मंदिर की सेवा कैसे चलती?

एज्रा ने बुद्धिमान पुरुषों को बुलाया और उन्हें एक जगह भेजा जहाँ लेवीय रहते थे। "जाओ, उनसे कहो कि हमारे साथ चलें," उसने कहा। परमेश्वर की कृपा से लेवीय और मंदिर के सेवक आ गए, पूरे दो सौ बीस लोग।

अब यात्रा की तैयारी थी। रास्ता लंबा और खतरनाक था। डाकू और शत्रु घात लगाए बैठे हो सकते थे। एज्रा राजा से सिपाही माँग सकता था, पर उसने ऐसा नहीं किया। उसे शर्म आती थी, क्योंकि उसने राजा से पहले ही कहा था, "हमारा परमेश्वर अपने खोजियों की रक्षा करते हैं।" तो अब सिपाही माँगना मानो परमेश्वर पर भरोसा न करना होता।

इसलिए एज्रा ने कुछ और किया। उसने सब लोगों से उपवास रखने को कहा, यानी कुछ समय भोजन न करना, ताकि वे परमेश्वर के सामने दीन हों और प्रार्थना करें। उन्होंने परमेश्वर से यात्रा की सुरक्षा माँगी। और परमेश्वर ने उनकी सुनी।

इसके बाद एज्रा ने बारह याजकों को चुना और उन्हें सोना, चाँदी और सुंदर पात्र सौंपे, जो राजा और लोगों ने परमेश्वर के भवन के लिये भेंट किए थे। यह बहुत बड़ी संपत्ति थी, सैकड़ों किक्कार चाँदी और सोना। एज्रा ने उनसे कहा, "तुम पवित्र हो, और ये वस्तुएँ भी पवित्र हैं। इन्हें ध्यान से सम्भालो जब तक यरूशलेम में न पहुँचा दो।"

फिर वे चल पड़े। पहले महीने की बारहवीं तारीख को उन्होंने कूच किया। रास्ते में परमेश्वर की कृपादृष्टि उन पर बनी रही। किसी शत्रु ने उन पर हमला नहीं किया। आखिरकार वे यरूशलेम पहुँचे और तीन दिन विश्राम किया। चौथे दिन उन्होंने सारा सोना-चाँदी तौलकर मंदिर के याजकों को सौंप दिया। सब कुछ ठीक-ठीक मिला, एक टुकड़ा भी कम नहीं हुआ। तब उन्होंने परमेश्वर के लिये बलिदान चढ़ाए और आभार प्रगट किया।

इसका अर्थ क्या है?

यह कहानी दिखाती है कि एज्रा परमेश्वर पर भरोसा करता था, सिपाहियों पर नहीं। जब खतरा सामने था, उसने तलवार नहीं माँगी, उसने प्रार्थना की। और परमेश्वर ने उसकी सुनी। यह हमें सिखाता है कि सबसे बड़ी सुरक्षा हथियारों में नहीं, परमेश्वर के हाथ में होती है।

समान सूत्र

परमेश्वर ने अपने लोगों की रक्षा हमेशा की है, चाहे मिस्र से निकलते समय हो या बाबेल से लौटते समय। यही परमेश्वर बाद में अपने पुत्र यीशु मसीह को भेजता है, जो अपने लोगों को पाप और मृत्यु के खतरे से बचाने आए। जैसे एज्रा ने प्रार्थना में भरोसा रखा, वैसे ही यीशु ने भी अपने पिता पर पूरा भरोसा रखा।

आपके लिए

जब तुम्हें किसी बात का डर लगे, स्कूल जाते समय या अंधेरे में, तुम भी प्रार्थना कर सकते हो। तुम्हें बड़ी सेना की ज़रूरत नहीं, परमेश्वर तुम्हारी सुनते हैं। और जैसे याजकों ने सोना-चाँदी सम्भालकर रखा, वैसे ही तुम भी जो कुछ परमेश्वर तुम्हें सौंपते हैं, उसे संभालकर रख सकते हो।

बात करें

अगर तुम एज्रा की जगह होते, क्या तुम भी सिपाही माँगे बिना यात्रा करते?

तुम किस बात से डरते हो, जिसके लिए तुम आज परमेश्वर से प्रार्थना कर सकते हो?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, जैसे आपने एज्रा और उसके साथियों की यात्रा में रक्षा की, वैसे ही हमारी भी रक्षा कीजिये। जब हम डरें, हमें याद दिलाइये कि आप हमारी सुनते हैं। आमीन।

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एज्रा 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

एज्रा 8 किस विषय में है?
एज्रा एक याजक था। वह बाबेल में रहता था, पर उसका दिल यरूशलेम में था। राजा अर्तक्षत्र ने उसे इस्राएल के लोगों के साथ यरूशलेम जाने की आज्ञा दी। बहुत से लोग एज्रा के साथ चलने को तैयार हुए, परिवार दर परिवार, सैकड़ों पुरुष, अपने बाल-बच्चों के साथ। पर जब सब लोग नदी के पास इकट्ठे हुए, एज्रा ने कुछ देखा जो उसे चिंतित कर गया। एक भी लेवीय नहीं था। लेवीय वे लोग थे जो परमेश्वर के भवन में सेवा करते थे। बिना उनके यरूशलेम में मंदिर
एज्रा 8 क्या कहता है?
अब यात्रा की तैयारी थी। रास्ता लंबा और खतरनाक था। डाकू और शत्रु घात लगाए बैठे हो सकते थे। एज्रा राजा से सिपाही माँग सकता था, पर उसने ऐसा नहीं किया। उसे शर्म आती थी, क्योंकि उसने राजा से पहले ही कहा था, "हमारा परमेश्वर अपने खोजियों की रक्षा करते हैं।" तो अब सिपाही माँगना मानो परमेश्वर पर भरोसा न करना होता।
एज्रा 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
इसके बाद एज्रा ने बारह याजकों को चुना और उन्हें सोना, चाँदी और सुंदर पात्र सौंपे, जो राजा और लोगों ने परमेश्वर के भवन के लिये भेंट किए थे। यह बहुत बड़ी संपत्ति थी, सैकड़ों किक्कार चाँदी और सोना। एज्रा ने उनसे कहा, "तुम पवित्र हो, और ये वस्तुएँ भी पवित्र हैं। इन्हें ध्यान से सम्भालो जब तक यरूशलेम में न पहुँचा दो।"
बच्चे एज्रा 8 से क्या सीख सकते हैं?
यह कहानी दिखाती है कि एज्रा परमेश्वर पर भरोसा करता था, सिपाहियों पर नहीं। जब खतरा सामने था, उसने तलवार नहीं माँगी, उसने प्रार्थना की। और परमेश्वर ने उसकी सुनी। यह हमें सिखाता है कि सबसे बड़ी सुरक्षा हथियारों में नहीं, परमेश्वर के हाथ में होती है।
एज्रा 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
जब तुम्हें किसी बात का डर लगे, स्कूल जाते समय या अंधेरे में, तुम भी प्रार्थना कर सकते हो। तुम्हें बड़ी सेना की ज़रूरत नहीं, परमेश्वर तुम्हारी सुनते हैं। और जैसे याजकों ने सोना-चाँदी सम्भालकर रखा, वैसे ही तुम भी जो कुछ परमेश्वर तुम्हें सौंपते हैं, उसे संभालकर रख सकते हो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

बेबै के वंश में से बेबै का पुत्र जकर्याह, और उसके साथ अट्ठाईस पुरुष" (एज्रा 8:11). बस एक नाम और एक गिनती। न कोई चमत्कार, न कोई भाषण। फिर भी परमेश्वर ने इन अट्ठाईस को गिनवाकर लिखवा दिया।

तुम सोचते हो तुम्हारा साथ चलना किसी को दिखता नहीं। पर जो लौटने के लिए उठ खड़े होते हैं, उनका हिसाब स्वर्ग में रखा जाता है। तुम भीड़ नहीं हो, तुम गिने हुए हो।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 35

यात्रा सुरक्षित पूरी हुई, खज़ाना गिनकर सौंप दिया गया, और तब सबसे पहले जो हुआ वह बलिदान था। ध्यान दो, "सारे इस्राएल के लिये बारह बछड़े" चढ़े, जबकि लौटे हुए लोग तो थोड़े से ही थे। जो भाई दूर छूट गए थे, उन्हें भी वे वेदी पर साथ लाए। और पापबलि भी चढ़ाई, क्योंकि बच जाना पवित्र हो जाना नहीं है। तेरी प्रार्थना में कौन छूट रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

एज्रा ने गिनती की और पाया कि लेवियों की कमी है। उसने आदमी भेजे, इंतजार किया, और जब शेरेब्याह अपने अठारह लोगों के साथ आया तो एज्रा ने अपनी योजना की तारीफ नहीं की। उसने लिखा, "हमारे परमेश्वर की कृपादृष्टि हम पर थी।" जो कमी तुझे आज खल रही है, उसे परमेश्वर के सामने रख। और जब कोई आए, तो याद रखना कि उसे किसने भेजा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 31

अहवा नदी से यरूशलेम तक का रास्ता लम्बा था, और एज्रा ने राजा से सिपाही माँगने में शर्म महसूस की थी, क्योंकि उसने कहा था कि परमेश्वर का हाथ उसके खोजनेवालों पर रहता है। फिर लिखा है, "हमारे परमेश्वर का हाथ हम पर रहा; और उसने हमको शत्रुओं और मार्ग पर घात लगानेवालों के हाथ से बचाया।" तूने जो कहा है कि परमेश्वर पर भरोसा है, क्या तेरा असली सहारा भी वही है?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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