हाग्गै 2
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
बहुत साल पहले की बात है। एक शहर था, यरूशलेम।
वहाँ धूल थी। बहुत सारी धूल।
और पत्थर थे। बड़े-बड़े टूटे पत्थर।
वहाँ लोग काम कर रहे थे। वे परमेश्वर का भवन बना रहे थे।
सूरज गरम था। हाथ मिट्टी से भरे थे।
एक पत्थर उठाओ। फिर दूसरा। फिर तीसरा।
काम बहुत था। और लोग बहुत थक गए थे।
वहाँ कुछ बूढ़े दादा-दादी खड़े थे। वे देख रहे थे।
वे बहुत चुप थे। फिर उनकी आँखों में आँसू आ गए।
क्योंकि उन्हें याद था। पहले यहाँ एक बहुत सुंदर भवन था।
चमकता हुआ। सोने जैसा। बहुत बड़ा।
और अब? अब सिर्फ धूल और पत्थर।
"यह तो कुछ भी नहीं है," लोग सोचने लगे।
उनके हाथ नीचे गिर गए। उनका मन उदास हो गया।
इसका क्या अर्थ है?
तभी वहाँ एक आदमी आया। उसका नाम था हाग्गै।
हाग्गै के पास परमेश्वर का एक संदेश था।
हाग्गै ने ज़ोर से कहा। सब लोग सुनने लगे।
"हियाव बाँधो!" हाग्गै ने कहा। इसका मतलब है: डरो मत।
"हियाव बाँधकर काम करो।"
और फिर हाग्गै ने सबसे सुंदर बात कही।
परमेश्वर कहते हैं: "मैं तुम्हारे संग हूँ।"
क्या तुमने सुना? परमेश्वर वहीं थे।
धूल में। पत्थरों के बीच। थके हुए लोगों के पास।
"मत डरो," परमेश्वर ने कहा।
जुड़ी हुई डोर
और परमेश्वर ने और भी कहा।
"चाँदी मेरी है। सोना भी मेरा है।"
सारा सोना परमेश्वर का है। सारी दुनिया उनकी है।
"मैं इस भवन को अपनी महिमा से भर दूँगा।"
"और इस जगह मैं शान्ति दूँगा।"
शान्ति। कितना अच्छा शब्द।
बहुत, बहुत साल बाद कुछ हुआ।
एक छोटा बच्चा उसी जगह आया। उसका नाम था यीशु।
यीशु ही परमेश्वर की शान्ति हैं।
परमेश्वर अपनी बात कभी नहीं भूलते।
तुम्हारे लिए
लोगों के पास और भी एक चिंता थी।
खेतों में कुछ नहीं उग रहा था।
अंगूर नहीं। अंजीर नहीं। अनार नहीं।
पेट खाली था। टोकरियाँ खाली थीं।
पर परमेश्वर ने कहा: "आज के दिन से मैं तुमको आशीष देता रहूँगा।"
आज से! अभी से!
और लोगों ने फिर से पत्थर उठाया।
एक। और फिर एक। और फिर एक।
अब वे थके थे, पर उदास नहीं।
क्योंकि परमेश्वर उनके संग थे।
क्या तुम कभी थक जाते हो?
क्या कभी कुछ बहुत मुश्किल लगता है?
परमेश्वर तुमसे भी यही कहते हैं।
"मत डरो। मैं तुम्हारे संग हूँ।"
वे तुम्हें रात में देखते हैं। और सुबह भी।
तुम कभी अकेले नहीं हो।
बात करो
तुम्हें कब डर लगता है? क्या तुम बता सकते हो?
परमेश्वर कहते हैं: "मैं तुम्हारे संग हूँ।" यह सुनकर तुम्हें कैसा लगता है?
मिलकर प्रार्थना
प्रभु यीशु, धन्यवाद।
आप मेरे संग हैं। हमेशा।
जब मैं डरता हूँ, तब भी।
जब मैं थक जाता हूँ, तब भी।
आप मुझसे प्यार करते हैं।
आमीन।
हाग्गै 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
हाग्गै 2 किस विषय में है?
हाग्गै 2 क्या कहता है?
दूसरों ने क्या पाया
मन्दिर की नई दीवारें देखकर लोगों की आँखें भर आई थीं, क्योंकि यह पुराने की छाया भी नहीं लगती थी। उसी निराशा के बीच परमेश्वर उन्हें मिस्र की याद दिलाता है: "मेरा आत्मा तुम्हारे बीच में बना है; तुम मत डरो।" वह उनकी इमारत की तारीफ नहीं करता, वह अपनी उपस्थिति का वादा दोहराता है। आज तेरा काम भी छोटा दिखे, तो याद रख, जो तेरे साथ है वह छोटा नहीं।
जब कोई बीस नपुए के ढेर पर आता, तब दस ही निकलते थे।" गिनती तो की थी बीस की, हाथ में आया दस। तुमने भी कभी ऐसा महसूस किया है? मेहनत पूरी, पर थैली में छेद। परमेश्वर यहाँ डाँट नहीं रहा, वह ध्यान खींच रहा है। उसका भवन उजाड़ पड़ा था और लोग अपने घर सजा रहे थे। आज अपनी कमी को गिनने से पहले पूछो, मैंने किसे पहला स्थान दिया है?
उसी महीने के चौबीसवें दिन को यहोवा का वचन दूसरी बार हाग्गै के पास पहुँचा।" उसी दिन, दूसरी बार। सुबह जो कहा गया था, वह काफी नहीं था। परमेश्वर के पास कहने को और बाकी था। कभी सोचा है कि उसने तुझसे बात करना बंद कर दिया? शायद वह आज ही फिर बोलने वाला है। सुनने को तैयार रह।
अब इस समय से आगे को सोचो," परमेश्वर कहते हैं। लोग बरसों से खाली खलिहानों और अधूरी दीवारों को देखते आ रहे थे। पर जिस दिन उन्होंने पत्थर पर पत्थर रखना शुरू किया, परमेश्वर ने कहा, अब से गिनना शुरू करो।
तेरी देर हुई शुरुआत भी उसके लिए बहुत है। आज जो एक छोटा कदम तू उठाएगा, वहीं से वह आशीष की गिनती शुरू कर देता है।
थोड़े बड़े बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास प्राथमिक आयु (7-12) और किशोरों (12 और उससे ऊपर) के लिए भी विशेष संस्करण हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें