हाग्गै 2
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
यह लगभग ढाई हज़ार साल पहले की बात है। परमेश्वर के लोग बंधुआई से लौटकर यरूशलेम में रहने लगे थे, और वहाँ मन्दिर खंडहर पड़ा था। अब वे उसे फिर बना रहे थे। सातवें महीने के इक्कीसवें दिन परमेश्वर का वचन हाग्गै भविष्यद्वक्ता के पास पहुँचा, और उसे अधिपति जरुब्बाबेल, महायाजक यहोशू और सब बचे हुए लोगों से बात करनी थी।
परमेश्वर एक ऐसा सवाल पूछते हैं जो चुभता है: "तुम में से कौन है, जिसने इस भवन की पहली महिमा देखी है? अब तुम इसे कैसी दशा में देखते हो?" वहाँ कुछ बूढ़े लोग थे जिन्हें सुलैमान का पुराना मन्दिर याद था, सोने से चमकता, विशाल। और अब? साधारण पत्थर, छोटा-सा काम। परमेश्वर यह दिखावा नहीं करते कि लोगों की निराशा झूठी है। वे उसे नाम देते हैं।
और फिर तीन बार वही शब्द आता है: "हियाव बाँध।" जरुब्बाबेल, हियाव बाँध। यहोशू, हियाव बाँध। देश के सब लोगों, हियाव बाँधकर काम करो। कारण एक ही है: "क्योंकि मैं तुम्हारे संग हूँ।" परमेश्वर उन्हें उस वाचा की याद दिलाते हैं जो उन्होंने मिस्र से निकलने के समय बाँधी थी। वाचा का मतलब है एक पक्का बन्धन, एक ऐसा वादा जिसे परमेश्वर तोड़ते नहीं। उनका आत्मा उनके बीच बना हुआ है, इसलिए डरने की जरूरत नहीं।
इसके बाद एक बहुत बड़ा वादा आता है। परमेश्वर कहते हैं कि थोड़ी ही देर बाकी है, और वे आकाश, पृथ्वी, समुद्र और स्थल, सब को कँपाएँगे। सारी जातियाँ हिलेंगी, और उनकी मनभावनी वस्तुएँ आएँगी। "चाँदी तो मेरी है, और सोना भी मेरा ही है।" इस भवन की पिछली महिमा पहली से बड़ी होगी, और इस स्थान में वे शान्ति देंगे।
दो महीने बाद, नौवें महीने के चौबीसवें दिन, परमेश्वर हाग्गै से याजकों को एक अजीब सवाल पूछने को कहते हैं। अगर कोई पवित्र माँस अपने कपड़े के आँचल में बाँधे और उसी आँचल से रोटी को छू ले, तो क्या रोटी पवित्र हो जाएगी? याजक कहते हैं: नहीं। और अगर कोई लोथ छूने से अशुद्ध हुआ हो और फिर किसी चीज़ को छूए? याजक कहते हैं: हाँ, वह अशुद्ध हो जाएगी। यानी पवित्रता छूने से नहीं फैलती, पर अशुद्धता फैलती है। परमेश्वर कहते हैं: मेरी दृष्टि में यह प्रजा वैसी ही है। जब उनका मन आधा-आधा था, तब उनकी भेंटें भी शुद्ध नहीं ठहरीं।
फिर परमेश्वर उन्हें सोचने को कहते हैं। पहले, जब मन्दिर की नींव तक नहीं पड़ी थी, फ़सल कम होती थी। बीस नपुओं की आशा में दस मिलते थे, पचास बर्तन दाखरस की जगह बीस। लू, गेरूई और ओले आए, "तो भी तुम मेरी ओर न फिरे।" पर अब? "आज के दिन से मैं तुम को आशीष देता रहूँगा।"
अंत में परमेश्वर जरुब्बाबेल से कहते हैं कि वे राज्यों की गद्दियाँ उलट देंगे, और उसे मुहर वाली अंगूठी के समान रखेंगे, क्योंकि उन्होंने उसे चुन लिया है।
इसका क्या अर्थ है?
यह अध्याय हमें दो सच्चाइयाँ एक साथ देता है। पहली: परमेश्वर छोटे और मामूली काम को तुच्छ नहीं समझते। लोग अपने मन्दिर को देखकर शर्मिंदा थे, पर परमेश्वर ने उसी इमारत के बारे में कहा कि उसकी महिमा पुरानी से बड़ी होगी। दूसरी: परमेश्वर मन की आधी-अधूरी भक्ति को गंभीरता से लेते हैं। अशुद्धता की बात सुनना अच्छा नहीं लगता, पर परमेश्वर इसे छिपाते नहीं, क्योंकि जो छिपा नहीं, वही ठीक हो सकता है।
और एक बात ईमानदारी से: वह "हिलाना" कब और कैसे हुआ, यह पाठ खुद खुला छोड़ देता है। हम पूरी तरह नहीं जानते। हम इतना जानते हैं कि जो सारी जातियों को हिला सकते हैं, वे अपने लोगों से कहते हैं: मत डरो।
बड़ी कहानी का सूत्र
मुहर वाली अंगूठी वह अंगूठी थी जिसे राजा गीली मिट्टी या मोम पर दबाता था। वह छाप कहती थी: यह आदेश असली है, राजा का है। जरुब्बाबेल दाऊद के घराने का था, और परमेश्वर ने उसे ऐसी अंगूठी की तरह चुना। उसी घराने से बहुत बाद में यीशु मसीह आए। और वह वादा, "इस स्थान में मैं शान्ति दूँगा"? यीशु मन्दिर के आँगनों में चले और लोगों को अपने साथ परमेश्वर से मेल दिया। जो अशुद्धता छूने से फैलती थी, उसे मसीह ने अपने ऊपर ले लिया।
तुम्हारे लिए
कभी तुम्हें लगेगा कि तुम्हारा काम बहुत छोटा है। तुम्हारी प्रार्थना कच्ची लगती है, तुम्हारी गाई हुई लाइन बेसुरी, तुम्हारी मदद अधूरी। किसी और की चीज़ हमेशा बड़ी दिखती है। हाग्गै 2 कहता है कि परमेश्वर छोटी शुरुआत के सामने खड़े होकर कहते हैं: हियाव बाँधकर काम करो, मैं तुम्हारे संग हूँ।
और दूसरी बात: परमेश्वर के पास आना केवल बाहर से ठीक दिखना नहीं है। तुम रविवार को गिरजाघर में बैठ सकते हो और भीतर पूरी तरह कहीं और हो सकते हो। परमेश्वर से यह कहना कठिन लगता है, पर वे ऐसी बातें सुनने से थकते नहीं। आज से आशीष देने वाला परमेश्वर आज भी वही हैं।
इस पर बात करो
तुम्हें कब लगा कि तुम जो कर रहे हो वह बहुत छोटा या मामूली है? परमेश्वर का "हियाव बाँध" उस जगह पर कैसा सुनाई देता?
परमेश्वर ने लोगों से ईमानदारी से कहा कि उनका मन आधा है। तुम परमेश्वर से किस बारे में ईमानदारी से बात करना चाहते हो?
मिलकर प्रार्थना
परमेश्वर, आप कहते हैं कि आप हमारे संग हैं, और यह हमारे छोटे कामों के लिए भी सच है। जहाँ हमारा मन आधा है, वहाँ हमें ईमानदार बनाइए। यीशु मसीह के कारण हमें अपनी शान्ति दीजिए। आमीन।
हाग्गै 2 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
हाग्गै 2 किस विषय में है?
हाग्गै 2 क्या कहता है?
हाग्गै 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे हाग्गै 2 से क्या सीख सकते हैं?
हाग्गै 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
मन्दिर की नई दीवारें देखकर लोगों की आँखें भर आई थीं, क्योंकि यह पुराने की छाया भी नहीं लगती थी। उसी निराशा के बीच परमेश्वर उन्हें मिस्र की याद दिलाता है: "मेरा आत्मा तुम्हारे बीच में बना है; तुम मत डरो।" वह उनकी इमारत की तारीफ नहीं करता, वह अपनी उपस्थिति का वादा दोहराता है। आज तेरा काम भी छोटा दिखे, तो याद रख, जो तेरे साथ है वह छोटा नहीं।
जब कोई बीस नपुए के ढेर पर आता, तब दस ही निकलते थे।" गिनती तो की थी बीस की, हाथ में आया दस। तुमने भी कभी ऐसा महसूस किया है? मेहनत पूरी, पर थैली में छेद। परमेश्वर यहाँ डाँट नहीं रहा, वह ध्यान खींच रहा है। उसका भवन उजाड़ पड़ा था और लोग अपने घर सजा रहे थे। आज अपनी कमी को गिनने से पहले पूछो, मैंने किसे पहला स्थान दिया है?
उसी महीने के चौबीसवें दिन को यहोवा का वचन दूसरी बार हाग्गै के पास पहुँचा।" उसी दिन, दूसरी बार। सुबह जो कहा गया था, वह काफी नहीं था। परमेश्वर के पास कहने को और बाकी था। कभी सोचा है कि उसने तुझसे बात करना बंद कर दिया? शायद वह आज ही फिर बोलने वाला है। सुनने को तैयार रह।
अब इस समय से आगे को सोचो," परमेश्वर कहते हैं। लोग बरसों से खाली खलिहानों और अधूरी दीवारों को देखते आ रहे थे। पर जिस दिन उन्होंने पत्थर पर पत्थर रखना शुरू किया, परमेश्वर ने कहा, अब से गिनना शुरू करो।
तेरी देर हुई शुरुआत भी उसके लिए बहुत है। आज जो एक छोटा कदम तू उठाएगा, वहीं से वह आशीष की गिनती शुरू कर देता है।
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