3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

इब्रानियों 7

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत समय पहले, एक राजा था। उसका नाम था मलिकिसिदक। वह शालेम शहर का राजा था। वह राजा भी था, और याजक भी।

याजक वह होता है, जो परमेश्वर से बात करता है। वह लोगों के लिए प्रार्थना करता है।

एक दिन अब्राहम युद्ध से लौट रहा था। धूल भरी सड़क पर, धीरे धीरे। वह थका हुआ था। बहुत थका हुआ। तभी मलिकिसिदक उससे मिला। उसने रोटी और दाखरस लाया। उसने अब्राहम को आशीष दी। अब्राहम ने उसे बहुत सी चीज़ें दी, धन्यवाद के रूप में।

मलिकिसिदक बहुत खास था। उसके बारे में कोई नहीं जानता, उसका पिता कौन था, उसकी माता कौन थी। बस, वह याजक था। सदा के लिए।

फिर और याजक आए। वे मंदिर में सेवा करते थे। हर सुबह, हर शाम, वे परमेश्वर के लिए भेंट चढ़ाते थे। धूप उठती थी, ऊँची, ऊँची। पर हर याजक बूढ़ा होता, और फिर मर जाता। एक मरता, दूसरा आता। फिर वह भी मर जाता। ऐसा बहुत बार हुआ।

पर एक याजक है, जो कभी नहीं मरता। कभी नहीं। उसका नाम है यीशु। वे हमेशा जीवित रहते हैं। हमेशा और हमेशा।

इसका मतलब क्या है?

यीशु परमेश्वर के पास हैं, अभी इस पल भी। वे हमारे लिए बात करते हैं। हर दिन, हर रात, वे कभी नहीं थकते। कभी नहीं सोते। कभी दूर नहीं जाते।

पुराने याजक हर दिन भेंट चढ़ाते थे, फिर भी, फिर भी, कभी खत्म नहीं होता था। हर दिन वही काम, फिर से, फिर से। पर यीशु ने अपने आपको एक ही बार दिया। बस एक बार। और यह काफी था। पूरी तरह काफी। अब और भेंट की ज़रूरत नहीं।

बड़ी कहानी से जुड़ाव

परमेश्वर ने एक शपथ खाई। सुनो, परमेश्वर ने क्या कहा: "तू युगानुयुग याजक है।" युगानुयुग मतलब हमेशा हमेशा के लिए।

परमेश्वर ने वादा किया, और परमेश्वर अपना वादा कभी नहीं तोड़ते। कभी नहीं।

यीशु पवित्र हैं। निष्कपट हैं। निर्मल हैं। वे अभी स्वर्ग में हैं, परमेश्वर के पास बैठे हैं, ऊँचे, ऊँचे स्वर्ग में। वहाँ से वे हमारे लिए बोलते हैं।

तुम्हारे लिए

जब तुम डरते हो, तुम रो सकते हो। जब तुम खुश होते हो, तुम हँस सकते हो। यीशु सुनते हैं। वे हमेशा सुनते हैं।

तुम उनसे कभी भी बात कर सकते हो। सुबह में, दोपहर में, रात में, जब अंधेरा होता है और तुम सो नहीं पाते। वे कभी सोते नहीं। वे कभी दूर नहीं जाते। वे हमेशा वहाँ हैं, तुम्हारे लिए बात करते हुए।

बात करें

यीशु के पास हम कब बात कर सकते हैं?

तुम्हें कैसा लगता है, जब कोई तुम्हारी बात हमेशा सुनता है?

साथ में प्रार्थना करें

प्रिय यीशु, आप हमेशा जीवित हैं। आप मेरे लिए बात करते हैं, हर दिन। धन्यवाद, कि आप कभी नहीं जाते। मुझे आप पर भरोसा है। आमीन।

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इब्रानियों 7 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

इब्रानियों 7 किस विषय में है?
बहुत समय पहले, एक राजा था। उसका नाम था मलिकिसिदक। वह शालेम शहर का राजा था। वह राजा भी था, और याजक भी।
इब्रानियों 7 क्या कहता है?
मलिकिसिदक बहुत खास था। उसके बारे में कोई नहीं जानता, उसका पिता कौन था, उसकी माता कौन थी। बस, वह याजक था। सदा के लिए।
इब्रानियों 7 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यीशु परमेश्वर के पास हैं, अभी इस पल भी। वे हमारे लिए बात करते हैं। हर दिन, हर रात, वे कभी नहीं थकते। कभी नहीं सोते। कभी दूर नहीं जाते।
नन्हे बच्चे इब्रानियों 7 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर ने वादा किया, और परमेश्वर अपना वादा कभी नहीं तोड़ते। कभी नहीं।
इब्रानियों 7 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम उनसे कभी भी बात कर सकते हो। सुबह में, दोपहर में, रात में, जब अंधेरा होता है और तुम सो नहीं पाते। वे कभी सोते नहीं। वे कभी दूर नहीं जाते। वे हमेशा वहाँ हैं, तुम्हारे लिए बात करते हुए।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

मलिकिसिदक के समान एक और याजक" उठा, यानी वंशावली की सूची से नहीं, बल्कि उस जीवन से जो कभी मिट नहीं सकता। पुराने याजक मरते रहे, नए आते रहे, हर बार सब अधूरा छूट गया। पर तुम्हारा याजक जीवित है। जिस बोझ को तुम आज उसके सामने रख रहे हो, वह कल किसी और के हाथ में नहीं जाएगा। वही सुनता रहेगा, हमेशा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 28

व्यवस्था ऐसे याजक देती रही जो खुद टूटे हुए थे, अपने ही पापों के लिए बलि चढ़ाते थे, और एक दिन मर जाते थे। पर लिखा है, "उस शपथ का वचन जो व्यवस्था के बाद खाई गई, उस पुत्र को नियुक्त करता है जो युगानुयुग के लिए सिद्ध किया गया है।" सोचो, तुम्हारे लिए प्रार्थना करने वाला कभी थकता नहीं, कभी बदलता नहीं, कभी मरता नहीं। तुम्हारा नाम आज भी उसके होंठों पर है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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