3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

होशे 12

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बार याकूब नाम का एक आदमी था। वह छोटा था, तब भी वह लड़ता था। बड़ा हुआ, तब भी वह लड़ा।

एक रात याकूब एक दूत से लड़ा। पूरी रात। अंधेरे में। याकूब हार नहीं माना।

फिर याकूब रोया। उसने कहा, "मुझे आशीष दीजिए।" वह गिड़गिड़ाया।

और जानते हैं क्या हुआ? परमेश्वर मिले उससे। बेतेल में। वहाँ परमेश्वर ने उससे बात की। बहुत प्यार से।

इसका अर्थ क्या है?

याकूब के बहुत बच्चे हुए। उनका नाम पड़ा एप्रैम और यहूदा। वे भी बड़े हुए।

पर वे भूल गए। वे परमेश्वर को भूल गए।

एप्रैम कहता था, "मैं धनी हो गया हूँ! मैंने बहुत पैसा कमाया है।" वह घमंड करता था।

एप्रैम के हाथ में तराजू था। एक टेढ़ा तराजू। उससे वह लोगों को धोखा देता था। यह ठीक नहीं था।

परमेश्वर को यह बुरा लगा। बहुत बुरा लगा।

समान सूत्र

पर परमेश्वर ने एप्रैम को नहीं छोड़ा।

परमेश्वर ने कहा, "मैं यहोवा, मिस्र देश से तेरा परमेश्वर हूँ।"

याद है? परमेश्वर ने अपने लोगों को मिस्र से निकाला था। एक भविष्यवक्ता के द्वारा। उन्होंने रास्ता दिखाया। उन्होंने बचाया।

परमेश्वर हमेशा बोलते हैं। भविष्यवक्ताओं के द्वारा। कहानियों के द्वारा। दर्शनों के द्वारा।

परमेश्वर चुप नहीं रहते। वे बोलते हैं, क्योंकि वे प्यार करते हैं।

और बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। सबसे बड़ी बात कहने के लिए।

तुम्हारे लिए

तुम भी परमेश्वर से बात कर सकते हो। जैसे याकूब ने की।

रोते हुए भी। डरते हुए भी। बस बात करो।

परमेश्वर कहते हैं, "तू अपने परमेश्वर की ओर फिर।"

फिर आना मतलब पास आना। जैसे तुम अपनी माँ के पास दौड़ते हो।

परमेश्वर तुमसे प्यार करते हैं। सच में। बहुत।

चर्चा के लिए:

याकूब रात में क्यों रोया?

तुम परमेश्वर से क्या बात करना चाहते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप याकूब से मिले।

आप मुझसे भी मिलिए।

मैं आपके पास आता हूँ।

मुझे प्यार से थामिए।

आमीन।

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होशे 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

होशे 12 किस विषय में है?
एक बार याकूब नाम का एक आदमी था। वह छोटा था, तब भी वह लड़ता था। बड़ा हुआ, तब भी वह लड़ा।
होशे 12 क्या कहता है?
और जानते हैं क्या हुआ? परमेश्वर मिले उससे। बेतेल में। वहाँ परमेश्वर ने उससे बात की। बहुत प्यार से।
होशे 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
एप्रैम के हाथ में तराजू था। एक टेढ़ा तराजू। उससे वह लोगों को धोखा देता था। यह ठीक नहीं था।
नन्हे बच्चे होशे 12 से क्या सीख सकते हैं?
परमेश्वर हमेशा बोलते हैं। भविष्यवक्ताओं के द्वारा। कहानियों के द्वारा। दर्शनों के द्वारा।
होशे 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
फिर आना मतलब पास आना। जैसे तुम अपनी माँ के पास दौड़ते हो।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

याकूब जीता, पर किस तरह? "वह दूत से लड़कर जयवन्त हुआ, वह रोया और उसने गिड़गिड़ाकर विनती की।" उसकी जीत उसकी पकड़ में नहीं, उसके आँसुओं में थी। होशे यही बात उस इस्राएल को याद दिला रहा है जो अपनी चतुराई पर भरोसा कर रहा था। सोच, तेरी असली ताकत कहाँ है, तेरी योजनाओं में या परमेश्वर के सामने बहते तेरे आँसुओं में?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

गिलगाल में बलियों की कमी न थी। बैल चढ़ते रहे, वेदियाँ बढ़ती गईं, पर परमेश्वर उन्हें "जोते हुए खेत की रेखाओं में पत्थरों के ढेर के समान" देखता है। यानी खेत में पड़े बेकार पत्थर, जिन्हें किसान हटा देता है। सोच, तेरी सेवा, तेरा चढ़ावा, तेरा हर रविवार का आना, इनके पीछे क्या सचमुच खरा मन है? वह गिनती नहीं, हृदय देखता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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