3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

योएल 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक आदमी था। उसका नाम था योएल। परमेश्वर ने उससे बात की। परमेश्वर ने कहा, "सुनो!" योएल ने ध्यान से सुना। वह थोड़ा डर गया। क्योंकि परमेश्वर ने कुछ उदास बताया।

खेतों में कीड़े आए। बहुत सारे कीड़े। टिड्डियाँ। उनके पंख सरसराते थे, हवा में। पहले एक तरह की टिड्डी आई। उसने पत्ते खा लिए। फिर दूसरी टिड्डी आई। उसने बचे हुए पत्ते खा लिए। फिर तीसरी आई। फिर चौथी आई। हर बार, जो बचा था, वह भी खा लिया गया। कुछ भी नहीं बचा। अंगूर की बेल सूख गई। अंजीर का पेड़ टूट गया। उसकी छाल सफेद हो गई, जैसे किसी ने उसे छील दिया हो।

खेत खाली था। रोटी नहीं थी। दाखमधु नहीं था। तेल भी नहीं था। लोग भूखे थे। पशु भी भूखे थे। गाय-बैल कराह रहे थे। भेड़-बकरियाँ इधर-उधर भटक रही थीं, चराई ढूंढ़ते हुए। पर कहीं घास नहीं थी। सब कुछ सूखा और चुप था।

इसका मतलब क्या है?

जब कुछ प्यारा टूट जाता है, तो हम रोते हैं। लोग रो रहे थे। याजक भी रो रहे थे। उन्होंने टाट के कपड़े पहने, मोटे और खुरदुरे कपड़े, दुःख के कपड़े। वे परमेश्वर के घर गए। पर वहाँ देने के लिए रोटी नहीं थी। सब उदास थे।

योएल ने कहा, "यह बात अपने बच्चों को बताओ। और वे अपने बच्चों को बताएं।" यह बात भूलनी नहीं थी। फिर योएल ने कहा, "इकट्ठे हो जाओ।" उसने कहा, "परमेश्वर को पुकारो।" सबको मिलकर परमेश्वर से बात करनी थी। अकेले नहीं। साथ में।

एक जुड़ी हुई कड़ी

परमेश्वर ने यह सब देखा। खेत खाली, पशु भूखे, लोग उदास। परमेश्वर से दूर होना दुःख लाता है। पर परमेश्वर ने अपने लोगों को नहीं छोड़ा। उन्होंने उनकी पुकार सुनी। बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु भूखों को रोटी देते थे। यीशु रोते हुओं के पास बैठते थे। यीशु के पास हमेशा कुछ न कुछ होता है, देने के लिए।

तुम्हारे लिए

जब तुम उदास हो, तो तुम भी परमेश्वर को पुकार सकते हो। जैसे योएल ने लोगों से कहा। तुम अकेले मत रहो। अपनी माँ या अपने पापा को बताओ। और परमेश्वर से भी बात करो। वे सुनते हैं।

बात करें

टिड्डियों ने खेत में क्या-क्या खा लिया? जब तुम उदास होते हो, तुम किससे बात करते हो?

साथ प्रार्थना करें

प्रभु, आप सुनते हैं जब हम रोते हैं। कीड़ों ने खेत खा लिया था, पर आप हमेशा पास रहते हैं। हमें भूखा मत रहने दें। हमें उदास मत छोड़ें। आप हमारी सुनें। आमेन।

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योएल 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

योएल 1 किस विषय में है?
एक आदमी था। उसका नाम था योएल। परमेश्वर ने उससे बात की। परमेश्वर ने कहा, "सुनो!" योएल ने ध्यान से सुना। वह थोड़ा डर गया। क्योंकि परमेश्वर ने कुछ उदास बताया।
योएल 1 क्या कहता है?
खेत खाली था। रोटी नहीं थी। दाखमधु नहीं था। तेल भी नहीं था। लोग भूखे थे। पशु भी भूखे थे। गाय-बैल कराह रहे थे। भेड़-बकरियाँ इधर-उधर भटक रही थीं, चराई ढूंढ़ते हुए। पर कहीं घास नहीं थी। सब कुछ सूखा और चुप था।
योएल 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
योएल ने कहा, "यह बात अपने बच्चों को बताओ। और वे अपने बच्चों को बताएं।" यह बात भूलनी नहीं थी। फिर योएल ने कहा, "इकट्ठे हो जाओ।" उसने कहा, "परमेश्वर को पुकारो।" सबको मिलकर परमेश्वर से बात करनी थी। अकेले नहीं। साथ में।
नन्हे बच्चे योएल 1 से क्या सीख सकते हैं?
जब तुम उदास हो, तो तुम भी परमेश्वर को पुकार सकते हो। जैसे योएल ने लोगों से कहा। तुम अकेले मत रहो। अपनी माँ या अपने पापा को बताओ। और परमेश्वर से भी बात करो। वे सुनते हैं।
योएल 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु, आप सुनते हैं जब हम रोते हैं। कीड़ों ने खेत खा लिया था, पर आप हमेशा पास रहते हैं। हमें भूखा मत रहने दें। हमें उदास मत छोड़ें। आप हमारी सुनें। आमेन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 4

जो कुछ गाजाम नामक टिड्डी से बचा, उसे अर्बे नामक टिड्डी ने खा लिया; और जो कुछ अर्बे नामक टिड्डी से बचा, उसे येलेक नामक टिड्डी ने खा लिया।" चार लहरें, और खेत बिलकुल खाली। दुख कभी ऐसे ही आता है, एक के बाद एक, जब तक कुछ बचता ही नहीं। योएल इसे छिपाता नहीं, वह गिनता है। तेरा नुकसान भी गिना गया है, और परमेश्वर ने बात इसी खाली खेत से शुरू की।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

खेत उजड़ गया, भूमि विलाप करती है; क्योंकि अन्न नाश हो गया, नया दाखमधु सूख गया, तेल भी जाता रहा।" ध्यान दो, ये तीनों वही चीज़ें थीं जो मन्दिर में चढ़ाई जाती थीं। टिड्डियों ने सिर्फ़ रोटी नहीं छीनी, उपासना का हाथ भी खाली कर दिया। कभी कभी खालीपन ही परमेश्वर की पुकार होती है। तुम्हारे जीवन का सूखा तुम्हें किस ओर मोड़ रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

टिड्डियों ने खेत उजाड़ दिए, और योएल का पहला आदेश खेत बचाना नहीं था। वह कहता है, "उपवास का दिन ठहराओ, महासभा का प्रचार करो।" और बुलावा सिर्फ याजकों को नहीं, "देश के सब रहनेवालों को" है। दुख हमें अकेला कर देता है, हम अपने कमरे में बंद होकर रोते हैं। पर परमेश्वर कहता है, साथ आओ, मिलकर दुहाई दो। तेरा टूटा हुआ मन किसके साथ बाँटा गया है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

बीज ढेलों के नीचे झुलस गए, भण्डार सूने पड़े हैं; खत्ते गिर पड़े हैं, क्योंकि अनाज सूख गया।" सबसे पहले जो मरा, वह किसी को दिखा भी नहीं। मिट्टी के नीचे, चुपचाप। नुकसान अक्सर ऐसे ही शुरू होता है, खाली भण्डार से नहीं, बल्कि उस उम्मीद से जो भीतर ही सूख गई। योएल इसी सूखी जगह पर परमेश्वर को पुकारने बुलाता है। तेरे भीतर कौन सा बीज चुपचाप झुलस रहा है?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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