3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

यिर्मयाह 17

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक पेड़ की कल्पना करो। वह नदी के किनारे खड़ा है। उसकी जड़ें पानी तक पहुँचती हैं।

गर्मी आती है। बहुत तेज़ धूप। पर पेड़ को डर नहीं। उसके पत्ते हरे रहते हैं। क्योंकि उसकी जड़ें पानी पी रही हैं।

अब एक दूसरा पेड़ सोचो। वह रेगिस्तान में है। सूखी, सूखी ज़मीन में। वहाँ पानी नहीं। उसके पत्ते मुरझा जाते हैं। वह पेड़ उदास दिखता है।

यिर्मयाह नबी ने यही सुनाया। परमेश्वर ने कहा, "जो मनुष्य मुझ पर भरोसा रखता है, वह नदी किनारे के पेड़ जैसा है।" और जो मनुष्य परमेश्वर को छोड़कर कहीं और भरोसा रखता है, वह सूखे पेड़ जैसा है।

इसका क्या अर्थ है?

यहूदा के लोग परमेश्वर को भूल गए थे। उन्होंने दूसरी जगह भरोसा रखा। परमेश्वर उदास हुए। बहुत उदास।

पर परमेश्वर ने कहा, मैं हृदय को जानता हूँ। मैं देखता हूँ कि कौन मुझसे प्रेम करता है।

फिर यिर्मयाह ने परमेश्वर से बात की। उसने कहा, "हे यहोवा, मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊँगा। मुझे बचा, तब मैं बच जाऊँगा।" यिर्मयाह ने परमेश्वर पर भरोसा रखा। जैसे वह नदी किनारे का पेड़।

फिर परमेश्वर ने एक और बात कही। उन्होंने कहा, विश्राम के दिन को पवित्र रखो। उस दिन काम मत करो। उस दिन आराम करो, क्योंकि मैंने वह दिन तुम्हें दिया है।

सूत्र

परमेश्वर चाहते थे कि उनके लोग उन पर भरोसा रखें। जैसे पेड़ अपनी जड़ों से पानी तक पहुँचता है, वैसे ही हम परमेश्वर तक पहुँच सकते हैं।

प्रभु यीशु मसीह ने भी कहा कि वे ही जीवन का जल देते हैं। जो उन पर भरोसा रखता है, वह कभी नहीं मुरझाएगा। उसके पत्ते सदा हरे रहेंगे, क्योंकि यीशु उसे पानी देते रहते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम भी एक छोटा पेड़ हो। परमेश्वर चाहते हैं कि तुम उन पर भरोसा रखो। जब तुम डरते हो, तुम परमेश्वर से बात कर सकते हो। जब तुम उदास हो, तुम उनके पास जा सकते हो। वे तुम्हें पानी देंगे। वे तुम्हारी जड़ों को सींचेंगे।

बात करें

तुम्हें क्या अच्छा लगता है, नदी किनारे का हरा पेड़ या सूखे रेगिस्तान का मुरझाया पेड़?

जब तुम डरते हो, तुम किससे बात कर सकते हो?

संग साथ प्रार्थना

हे परमेश्वर, आप पानी जैसे हैं। हमें अपनी जड़ों से आप तक पहुँचने दीजिए। हमें हरा-भरा रखिए। आमीन।

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यिर्मयाह 17 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यिर्मयाह 17 किस विषय में है?
एक पेड़ की कल्पना करो। वह नदी के किनारे खड़ा है। उसकी जड़ें पानी तक पहुँचती हैं।
यिर्मयाह 17 क्या कहता है?
यिर्मयाह नबी ने यही सुनाया। परमेश्वर ने कहा, "जो मनुष्य मुझ पर भरोसा रखता है, वह नदी किनारे के पेड़ जैसा है।" और जो मनुष्य परमेश्वर को छोड़कर कहीं और भरोसा रखता है, वह सूखे पेड़ जैसा है।
यिर्मयाह 17 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर यिर्मयाह ने परमेश्वर से बात की। उसने कहा, "हे यहोवा, मुझे चंगा कर, तब मैं चंगा हो जाऊँगा। मुझे बचा, तब मैं बच जाऊँगा।" यिर्मयाह ने परमेश्वर पर भरोसा रखा। जैसे वह नदी किनारे का पेड़।
नन्हे बच्चे यिर्मयाह 17 से क्या सीख सकते हैं?
प्रभु यीशु मसीह ने भी कहा कि वे ही जीवन का जल देते हैं। जो उन पर भरोसा रखता है, वह कभी नहीं मुरझाएगा। उसके पत्ते सदा हरे रहेंगे, क्योंकि यीशु उसे पानी देते रहते हैं।
यिर्मयाह 17 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
हे परमेश्वर, आप पानी जैसे हैं। हमें अपनी जड़ों से आप तक पहुँचने दीजिए। हमें हरा-भरा रखिए। आमीन।

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