3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

अय्यूब 23

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

कहानी क्या कहती है

रात हो चुकी थी। बहुत अँधेरी रात।

राख के एक ढेर पर एक आदमी बैठा था। उसका नाम अय्यूब था।

अय्यूब बहुत उदास था। उसके कपड़े फटे थे। उसका शरीर दुखता था।

पहले अय्यूब के पास बहुत कुछ था। भेड़ें, ऊँट, एक बड़ा घर। और बच्चे भी।

अब कुछ नहीं बचा था। सब चला गया था।

अय्यूब ने अपने घुटनों पर सिर रखा। और वह रोने लगा।

"आह," अय्यूब ने कहा। "मुझे बहुत दर्द है।"

फिर अय्यूब ने ऊपर देखा। आसमान अँधेरा था। तारे भी छिपे थे।

अय्यूब परमेश्वर को ढूँढ़ रहा था।

"परमेश्वर, आप कहाँ हैं?" उसने पुकारा। "मैं आपके पास आना चाहता हूँ।"

अय्यूब आगे गया। वहाँ कोई नहीं था।

अय्यूब पीछे गया। वहाँ भी कोई नहीं था।

अय्यूब ने बाईं ओर देखा। कुछ नहीं।

अय्यूब ने दाईं ओर देखा। कुछ नहीं।

चारों ओर बस अँधेरा। और चुप्पी।

इसका मतलब क्या है

अय्यूब बहुत थक गया था। उसके पैर धूल में थे।

वह चुपचाप बैठ गया। और सोचने लगा।

अय्यूब को परमेश्वर दिखाई नहीं दे रहे थे।

पर तभी अय्यूब के मन में एक बात आई।

एक बहुत सुंदर बात।

"मैं परमेश्वर को नहीं देख पाता," अय्यूब ने कहा। "पर परमेश्वर मुझे देखते हैं!"

"वे जानते हैं कि मैं कहाँ चलता हूँ। वे मुझे जानते हैं।"

अय्यूब ने सोने के बारे में सोचा। चमकता हुआ सोना।

सोना आग में डाला जाता है। और फिर वह और भी चमकता है।

"एक दिन मैं भी सोने जैसा निकलूँगा," अय्यूब ने कहा।

फिर भी अय्यूब का दिल काँप रहा था। वह डरा हुआ था।

पर उसने परमेश्वर का हाथ नहीं छोड़ा।

एक ही धागा

बहुत, बहुत साल बाद एक और रात आई।

फिर से अँधेरी रात। फिर से एक बगीचा।

वहाँ यीशु घुटनों पर बैठे थे। वे बहुत उदास थे।

यीशु को भी दर्द हुआ। यीशु भी अकेले लगे।

पर परमेश्वर ने यीशु को कभी नहीं भुलाया।

और यीशु ने कभी हमें नहीं भुलाया।

यीशु जानते हैं कि उदास होना कैसा लगता है।

इसलिए यीशु समझते हैं, जब तुम रोते हो।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी रात को अँधेरा होता है।

तुम्हें कुछ दिखाई नहीं देता। कोई आवाज़ नहीं।

पर परमेश्वर तुम्हें देख सकते हैं।

वे तुम्हारा नाम जानते हैं। वे तुम्हारे बिस्तर के पास हैं।

जब तुम्हें दुख हो, तो अय्यूब की तरह करो।

बस बोलो: "परमेश्वर, मैं यहाँ हूँ।"

परमेश्वर सुनते हैं। हमेशा।

आपस में बात करें

जब तुम्हें डर लगता है, तब तुम क्या करते हो?

क्या तुम्हें पता है कि परमेश्वर तुम्हें कहाँ-कहाँ देख सकते हैं?

मिलकर प्रार्थना करें

प्यारे परमेश्वर,

कभी-कभी मैं उदास होता हूँ।

कभी-कभी अँधेरा लगता है।

पर आप मुझे देखते हैं।

आप मेरा नाम जानते हैं।

धन्यवाद कि आप पास हैं।

आमीन।

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अय्यूब 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

अय्यूब 23 किस विषय में है?
पहले अय्यूब के पास बहुत कुछ था। भेड़ें, ऊँट, एक बड़ा घर। और बच्चे भी।
अय्यूब 23 क्या कहता है?
फिर अय्यूब ने ऊपर देखा। आसमान अँधेरा था। तारे भी छिपे थे।
अय्यूब 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
"परमेश्वर, आप कहाँ हैं?" उसने पुकारा। "मैं आपके पास आना चाहता हूँ।"
नन्हे बच्चे अय्यूब 23 से क्या सीख सकते हैं?
"मैं परमेश्वर को नहीं देख पाता," अय्यूब ने कहा। "पर परमेश्वर मुझे देखते हैं!"
अय्यूब 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
वे तुम्हारा नाम जानते हैं। वे तुम्हारे बिस्तर के पास हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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