3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

विलापगीत 5

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

शाम हो गई थी। शहर बहुत शांत था। पहले यहाँ शोर होता था। बच्चे खेलते थे। लोग गाना गाते थे।

पर अब कोई नहीं गाता।

देखो, वहाँ एक छोटा बच्चा बैठा है। उसका नाम हम नहीं जानते। उसके कपड़े फटे हैं। उसका पेट खाली है।

उसे भूख लगी है। बहुत भूख।

पहले उसका एक घर था। एक अच्छा घर। पर अब उस घर में कोई और रहता है। बच्चा अंदर नहीं जा सकता।

पानी भी मिलना कठिन है। लकड़ी भी मिलना कठिन है।

बच्चा थक गया है। बहुत थक गया है। उसे आराम नहीं मिलता।

उसके पास उसकी माँ बैठी है। माँ के आँसू बहते हैं। उसकी आँखें धुंधली हो गई हैं, इतना वह रोई है।

चारों तरफ सब टूटा हुआ है। दीवारें गिरी हुई हैं। रात को वहाँ जंगली जानवर घूमते हैं।

यह एक दुखी कहानी है। पर यह सच है। और परमेश्वर सच सुनना चाहते हैं।

इसका क्या अर्थ है?

क्या तुम जानते हो, उस बच्चे ने क्या किया?

वह चुप नहीं रहा।

उसने ऊपर देखा। आकाश की ओर। और उसने कहा, "हे यहोवा, स्मरण कर कि हम पर क्या-क्या बिता है!"

यानी: परमेश्वर, देखिए! हमें देखिए! हमें भूल न जाइए!

और फिर उसने कुछ और कहा। कुछ बहुत सुंदर।

उसने कहा: "हे यहोवा, तू तो सदा तक विराजमान रहेगा।"

घर टूट गए। दीवारें गिर गईं। पर परमेश्वर नहीं गिरे।

परमेश्वर आज भी वहीं हैं। कल भी वहीं होंगे। सदा, सदा, सदा।

जुड़ी हुई कहानी

वह बच्चा रोया, और उसने कहा: "हे यहोवा, हमको अपनी ओर फेर।"

यानी: हमें अपने पास ले लीजिए। हमें फिर से खुश कर दीजिए।

और जानते हो क्या? परमेश्वर ने सुना।

बहुत, बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने बेटे को भेजा। यीशु मसीह को।

यीशु उन लोगों के पास गए जो रो रहे थे। जो भूखे थे। जो थके हुए थे।

यीशु ने कहा: मेरे पास आओ। मैं तुम्हें आराम दूँगा।

यीशु किसी को नहीं भूलते। कभी नहीं।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी तुम भी दुखी होते हो, न?

कभी तुम्हें डर लगता है। कभी तुम बहुत थक जाते हो। कभी तुम रोते हो, और तुम्हें पता नहीं क्यों।

तब तुम्हें चुप नहीं रहना है।

तुम परमेश्वर से कह सकते हो। बिल्कुल उस बच्चे की तरह।

तुम कह सकते हो: "परमेश्वर, मुझे देखिए। मैं दुखी हूँ।"

और परमेश्वर सुनते हैं। वे बहुत पास हैं। इतने पास, जितना तुम्हारी साँस।

बातचीत करें

तुम कब दुखी होते हो? क्या तुम परमेश्वर को बता सकते हो?

घर टूट गया, दीवार गिर गई। पर कौन कभी नहीं गिरते?

मिलकर प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप हमें देखते हैं। हमेशा।

जब मैं दुखी हूँ, आप सुनते हैं।

जब मैं रोता हूँ, आप पास हैं।

आप सदा रहते हैं। कभी नहीं जाते।

धन्यवाद, परमेश्वर।

आमीन।

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विलापगीत 5 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

विलापगीत 5 किस विषय में है?
शाम हो गई थी। शहर बहुत शांत था। पहले यहाँ शोर होता था। बच्चे खेलते थे। लोग गाना गाते थे।
विलापगीत 5 क्या कहता है?
पहले उसका एक घर था। एक अच्छा घर। पर अब उस घर में कोई और रहता है। बच्चा अंदर नहीं जा सकता।
विलापगीत 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
चारों तरफ सब टूटा हुआ है। दीवारें गिरी हुई हैं। रात को वहाँ जंगली जानवर घूमते हैं।
नन्हे बच्चे विलापगीत 5 से क्या सीख सकते हैं?
उसने ऊपर देखा। आकाश की ओर। और उसने कहा, "हे यहोवा, स्मरण कर कि हम पर क्या-क्या बिता है!"
विलापगीत 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
बहुत, बहुत साल बाद परमेश्वर ने अपने बेटे को भेजा। यीशु मसीह को।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

इस कारण हमारा हृदय निर्बल हो गया है, और इन्हीं बातों से हमारी आँखें धुँधली पड़ गई हैं।" यिर्मयाह अपना दुख छिपाता नहीं। वह परमेश्वर के सामने कहता है, हाँ, मन टूट चुका है, हाँ, रोते रोते आँखें धुँधली हो गई हैं। ऐसी ईमानदारी भी प्रार्थना है। तुम्हें उसके सामने मजबूत होने का नाटक नहीं करना पड़ता।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

पेट भरने के लिए हमने मिस्र और अश्शूर के आगे हाथ फैलाए।" जिस मिस्र से परमेश्वर ने उन्हें निकाला था, भूख ने उन्हें वहीं लौटा दिया। खालीपन आदमी को उसी दरवाज़े पर ले जाता है जो कभी उसकी ज़ंजीर था। सोचो, जब तुम्हारे भीतर कमी होती है, तुम्हारे कदम किसकी ओर मुड़ते हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 14

वृद्ध लोग फाटक के पास बैठना छोड़ गए, और जवानों ने गाना बजाना छोड़ दिया है।" शहर गिरा तो सिर्फ दीवारें नहीं गिरीं। बुज़ुर्गों की सलाह बंद हो गई, जवानों के गीत थम गए। दुख की सबसे गहरी पहचान यही है, जब घर में आवाज़ें खामोश हो जाती हैं। क्या तेरे भीतर भी कोई गीत चुप पड़ा है? परमेश्वर उस खामोशी को भी सुनता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

हमारे सिर पर का मुकुट गिर पड़ा है; हम पर हाय, क्योंकि हमने पाप किया है!"

मुकुट गिरा, और लोगों ने बाबेल को दोष नहीं दिया। उन्होंने अपने ही हृदय की ओर उँगली उठाई। यही सबसे कठिन प्रार्थना है। जब आपके जीवन में कुछ टूटता है, आप किसे दोषी ठहराते हैं? कभी कभी चंगाई वहीं से शुरू होती है जहाँ हम बहाना बनाना छोड़ देते हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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