3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

अय्यूब 12

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

अय्यूब की कहानी

व्याख्या

अय्यूब बहुत दुखी था। उसका पेट दुखता था। उसका शरीर दुखता था। उसके दोस्त आए। पर वे उस पर हँसे। अय्यूब को बुरा लगा।

अय्यूब ने कहा, "मैं भी जानता हूँ। मैं भी समझता हूँ।" वह अपने दोस्तों से बात कर रहा था। धीरे से, दुखी होकर।

फिर अय्यूब ने आसमान की तरफ देखा। वहाँ पक्षी उड़ रहे थे। "पक्षियों से पूछो," अय्यूब ने कहा। "वे भी जानते हैं।"

फिर उसने ज़मीन की तरफ देखा। "ज़मीन को देखो," उसने कहा। मछलियाँ पानी में तैर रही थीं। सब कुछ, सब जगह, एक बात जानते थे। कौन सी बात? यह कि परमेश्वर ने सब कुछ बनाया। पेड़, पक्षी, मछली, पहाड़, सब कुछ।

इसका क्या मतलब है?

अय्यूब ने कहा, परमेश्वर के हाथ में हर एक जीव की साँस है। हर पक्षी की, हर मछली की, हर आदमी की। परमेश्वर सबसे ताकतवर हैं। वे बारिश रोक सकते हैं। तब ज़मीन सूख जाती है। वे बारिश भेज सकते हैं। तब पानी बह निकलता है।

अय्यूब बहुत दुखी था। पर वह जानता था, परमेश्वर अभी भी राजा हैं। परमेश्वर बड़े राजाओं को भी नीचे कर सकते हैं। परमेश्वर अंधेरे में छिपी बातें भी उजाले में ला सकते हैं।

अय्यूब का दिल दुखता था। पर उसकी आँखें ऊपर देखती थीं। परमेश्वर की तरफ।

समान सूत्र

बहुत साल बाद, यीशु भी दुखी हुए। लोग उन पर भी हँसे। उन्हें भी दर्द हुआ। पर परमेश्वर पिता ने उन्हें फिर से जिलाया। जैसे अय्यूब ने कहा, परमेश्वर अंधेरे को उजाले में बदल सकते हैं। परमेश्वर ने यीशु के साथ भी यही किया। सूली का अंधेरा। और फिर, ईस्टर की सुबह का उजाला।

तुम्हारे लिए

कभी तुम भी दुखी होते हो। शायद पेट दुखता है। शायद कोई तुम पर हँसता है। तब तुम क्या करते हो?

अय्यूब ने ऊपर देखा। आसमान की तरफ। पक्षियों की तरफ। परमेश्वर की तरफ। तुम भी ऐसा कर सकते हो। परमेश्वर पक्षियों को जानते हैं। परमेश्वर तुम्हें भी जानते हैं।

बात करें

जब तुम दुखी होते हो, तब तुम किससे बात करते हो?

अय्यूब ने पक्षियों और मछलियों को देखा। तुम्हें कौन सा जानवर परमेश्वर की याद दिलाता है?

साथ में प्रार्थना

हे परमेश्वर, आपने पक्षी बनाए। आपने मछली बनाई। आपने मुझे भी बनाया। जब मैं दुखी होता हूँ, मेरे पास आइए। आमीन।

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अय्यूब 12 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

अय्यूब 12 किस विषय में है?
अय्यूब बहुत दुखी था। उसका पेट दुखता था। उसका शरीर दुखता था। उसके दोस्त आए। पर वे उस पर हँसे। अय्यूब को बुरा लगा।
अय्यूब 12 क्या कहता है?
फिर अय्यूब ने आसमान की तरफ देखा। वहाँ पक्षी उड़ रहे थे। "पक्षियों से पूछो," अय्यूब ने कहा। "वे भी जानते हैं।"
अय्यूब 12 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अय्यूब ने कहा, परमेश्वर के हाथ में हर एक जीव की साँस है। हर पक्षी की, हर मछली की, हर आदमी की। परमेश्वर सबसे ताकतवर हैं। वे बारिश रोक सकते हैं। तब ज़मीन सूख जाती है। वे बारिश भेज सकते हैं। तब पानी बह निकलता है।
नन्हे बच्चे अय्यूब 12 से क्या सीख सकते हैं?
अय्यूब का दिल दुखता था। पर उसकी आँखें ऊपर देखती थीं। परमेश्वर की तरफ।
अय्यूब 12 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
कभी तुम भी दुखी होते हो। शायद पेट दुखता है। शायद कोई तुम पर हँसता है। तब तुम क्या करते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

अय्यूब अपने मित्रों के बीच बैठा है, जो उसे समझे बिना उसका न्याय कर रहे थे, और वह कहता है, "बल और खरी बुद्धि उसी के हैं; धोखा देनेवाला और धोखा खानेवाला दोनों उसी के वश में हैं।" जिसने तुझे ठगा, वह भी परमेश्वर के हाथ से बाहर नहीं। यह बात डराती भी है और चैन भी देती है। तुझे बदला लेने की ज़रूरत नहीं, हिसाब उसके पास सुरक्षित है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 15

अय्यूब अपने दोस्तों को याद दिला रहा है कि परमेश्वर की सामर्थ्य उसके लिए कोई नई खबर नहीं है: "जब वह जल को रोक रखता है, तब सब कुछ सूख जाता है; फिर जब उसे छोड़ देता है, तब उससे पृथ्वी उलट जाती है।"

सोच, वही हाथ सूखा भी देता है और बाढ़ भी। तेरे जीवन का सूखा मौसम किसी और के वश में नहीं है। जो रोक रखता है, वही सही समय पर खोल भी सकता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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