3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

जकर्याह 8

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

बहुत पहले एक शहर था। उसका नाम यरूशलेम था।

वह शहर टूटा हुआ था। दीवारें गिरी पड़ी थीं। चौक में धूल उड़ती थी। और चुप्पी थी। बहुत ज़्यादा चुप्पी।

वहाँ कोई बच्चा नहीं खेलता था।

उस शहर में जकर्याह नाम का एक आदमी रहता था। जकर्याह ने कान लगाकर सुना। और परमेश्वर बोले।

परमेश्वर ने कहा, "मैं लौट आया हूँ। मैं यरूशलेम के बीच में रहूँगा।"

फिर परमेश्वर ने कहा, "देखो, मैं तुम्हें कुछ दिखाता हूँ।"

और जकर्याह ने देखा। चौक में एक बूढ़े दादा बैठे थे। हाथ में लाठी। धूप गरम और अच्छी। उनके पास एक बूढ़ी दादी बैठी थीं। वे मुस्कुरा रही थीं।

और चारों तरफ़? बच्चे! बहुत सारे बच्चे! लड़के और लड़कियाँ। दौड़ते, हँसते, खेलते। चौक बच्चों से भरा हुआ था।

अब वहाँ चुप्पी नहीं थी। वहाँ हँसी थी।

इसका क्या अर्थ है?

लोगों ने यह सुना और सोचा, "यह तो हो ही नहीं सकता।"

परमेश्वर ने कहा, "मेरे लिए यह मुश्किल नहीं है।"

परमेश्वर ने और भी कहा। अंगूर की डालियों पर अंगूर लगेंगे। ज़मीन से अनाज उगेगा। सुबह घास पर ओस चमकेगी।

और परमेश्वर ने कहा, "मत डरो।"

उन्होंने यह दो बार कहा। "मत डरो। तुम्हारे हाथ ढीले न पड़ें।"

लोग बहुत रोए थे। उनके रोने के दिन थे। परमेश्वर ने कहा, "वे दिन खुशी के दिन बन जाएँगे।"

रोने की जगह गाना। धूल की जगह खेल। परमेश्वर ऐसा ही करते हैं।

एक ही कहानी की डोर

परमेश्वर ने कहा था, "मैं लोगों के बीच में रहूँगा।"

और परमेश्वर ने ऐसा किया।

एक दिन वे सच में आए। एक छोटे बच्चे के रूप में। उसका नाम यीशु था।

यीशु लोगों के बीच में रहे। यीशु ने बच्चों को अपने पास बुलाया। उन्होंने बच्चों पर हाथ रखा।

जकर्याह ने यह भी सुना। दूर-दूर से लोग आएँगे। वे किसी का कपड़ा पकड़ेंगे और कहेंगे, "हम तुम्हारे संग चलेंगे। क्योंकि परमेश्वर तुम्हारे साथ है।"

क्या तुम सुनते हो? सब लोग परमेश्वर के पास आना चाहते हैं।

तुम्हारे लिए

तुम खेल सकते हो। तुम दौड़ सकते हो और हँस सकते हो।

परमेश्वर तुम्हें खेलते हुए देखते हैं। और उन्हें यह अच्छा लगता है।

परमेश्वर ने एक और बात कही। "एक दूसरे के साथ सच बोलो।"

सच बोलना कभी मुश्किल होता है। जैसे जब कप गिरकर टूट जाता है। तब भी सच बोलो।

और जब तुम डरते हो? तब याद रखो कि परमेश्वर क्या कहते हैं।

"मत डरो। मैं तुम्हारे साथ हूँ।"

बातें करें

जब तुम बाहर खेलते हो, तो तुम्हें सबसे अच्छा क्या लगता है?

तुम कब डरते हो? और तब परमेश्वर कहाँ होते हैं?

मिलकर प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर,

आप हमारे साथ हैं। मुझे यह अच्छा लगता है।

धन्यवाद कि मैं खेल सकता हूँ।

मुझे सच बोलना सिखाइए।

और जब मैं डरूँ, तो मेरे पास रहिए।

आमीन।

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जकर्याह 8 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

जकर्याह 8 किस विषय में है?
वह शहर टूटा हुआ था। दीवारें गिरी पड़ी थीं। चौक में धूल उड़ती थी। और चुप्पी थी। बहुत ज़्यादा चुप्पी।
जकर्याह 8 क्या कहता है?
फिर परमेश्वर ने कहा, "देखो, मैं तुम्हें कुछ दिखाता हूँ।"
जकर्याह 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर ने और भी कहा। अंगूर की डालियों पर अंगूर लगेंगे। ज़मीन से अनाज उगेगा। सुबह घास पर ओस चमकेगी।
नन्हे बच्चे जकर्याह 8 से क्या सीख सकते हैं?
एक दिन वे सच में आए। एक छोटे बच्चे के रूप में। उसका नाम यीशु था।
जकर्याह 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम सुनते हो? सब लोग परमेश्वर के पास आना चाहते हैं।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

मैं उनको ले आऊँगा, और वे यरूशलेम के बीच में बसेंगे; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं सच्चाई और धर्म से उनका परमेश्वर ठहरूँगा।" गौर करो, लौटने का काम परमेश्वर अपने ज़िम्मे लेता है। बिखरे हुए लोग खुद रास्ता नहीं खोज पाए थे, वही उन्हें ले आया। और रिश्ता आधा अधूरा नहीं, सच्चाई का। तुम जहाँ भटक गए हो, वहाँ से तुम्हें कौन ले आएगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

मुझे सिय्योन के लिये बड़ी जलन हुई है, हाँ, बड़ी जलजलाहट के साथ जलन।" यह उन लोगों से कहा गया जो खँडहरों के बीच खड़े थे और सोचते थे कि परमेश्वर उन्हें भूल गया। पर वह ठंडा नहीं पड़ा था, वह जल रहा था, तुम्हारे लिये। क्या तुम मान सकते हो कि तुम्हारे टूटे हुए हाल पर भी उसका प्रेम इतना गहरा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

ज़करयाह 8:7 में परमेश्वर कहते हैं, "सेनाओं का यहोवा यों कहता है, देखो, मैं अपनी प्रजा का पूर्व और पश्चिम के देशों से उद्धार करके ले आऊँगा।"

बंधुआई में बिखरे हुए लोगों से यह वादा किया गया था। वे सोच रहे थे कि क्या परमेश्वर उन्हें भूल गए। पर परमेश्वर कहते हैं, "मैं ले आऊँगा।" दूरी कोई बाधा नहीं, दिशा कोई सीमा नहीं।

तू आज जहाँ भी है, चाहे कितना ही दूर महसूस करता हो, वह तुझे ढूँढ निकालने वाला परमेश्वर है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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