3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लैव्यव्यवस्था 1

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक बड़ा तम्बू था। उसका नाम था मिलापवाला तम्बू। वहाँ परमेश्वर रहते थे। तम्बू के भीतर सब शांत था। एक दिन परमेश्वर ने मूसा को बुलाया। मूसा तुरन्त दौड़कर आया। परमेश्वर ने धीरे से कहा, "सुनो, मूसा।" "इस्राएल के लोगों से कहो," परमेश्वर बोले। "कोई मुझे भेंट देना चाहे तो सुनो।" "वह अपना सबसे अच्छा पशु लाए।" "गाय, या बैल, या भेड़, या बकरी।" "या फिर एक छोटा पक्षी भी ला सकता है।"

सोचो, एक आदमी अपनी भेड़ लाता है। भेड़ का ऊन नरम और सफेद है। उसकी आँखें बड़ी और चमकीली हैं। आदमी उसे तम्बू के द्वार तक लाता है। वहाँ हवा में धुएँ की गंध है। आदमी अपना हाथ भेड़ के सिर पर रखता है। बहुत धीरे से, जैसे कुछ दे रहा हो।

तब याजक आगे आते हैं। वे हारून के बेटे हैं। वे वेदी पर लकड़ी सजाते हैं। फिर वे आग जलाते हैं। लकड़ी चटकती है, आग भड़कती है। आग की गर्मी चेहरे पर लगती है।

याजक भेंट को साफ पानी से धोते हैं। वे उसका खून वेदी के चारों ओर छिड़कते हैं। फिर वे उसे आग पर रखते हैं। आग धीरे-धीरे भेंट को जला देती है। धुआँ ऊपर उठता है, और ऊपर, और ऊपर। धुआँ आसमान की ओर जाता है, परमेश्वर के पास।

अगर किसी के पास भेड़ नहीं थी, कोई बात नहीं। वह एक छोटा पंडुक या कबूतर ला सकता था। परमेश्वर छोटी भेंट को भी उतना ही चाहते थे।

इसका क्या मतलब है?

यह भेंट परमेश्वर के लिए एक उपहार थी। सबसे अच्छा पशु दिया जाता था। टूटा हुआ या बीमार पशु नहीं दिया जाता। परमेश्वर को अच्छी और सच्ची चीज़ पसंद थी। जब धुआँ ऊपर उठता, वह परमेश्वर के पास जाता। यह जैसे एक मीठी खुशबू थी। पाठ कहता है, "सुखदायक सुगन्धवाला हवन।" परमेश्वर उस भेंट को खुशी से ग्रहण करते थे। भेंट लाने वाला जानता था, परमेश्वर उसे देख रहे हैं।

समान सूत्र

बहुत साल बाद, परमेश्वर ने कुछ और भेजा। इस बार पशु नहीं, बल्कि अपना बेटा भेजा। उनका नाम था यीशु। यीशु ने अपना जीवन दिया, हम सबके लिए। जैसे वह भेंट आग पर जलती थी, वैसे यीशु हमारे लिए अपने आप को दे दिया। एक बार, और वह हमेशा के लिए काफी था। अब हमें बार-बार पशु लाने की ज़रूरत नहीं। यीशु ने सब कुछ पूरा कर दिया।

तुम्हारे लिए

तुम भी परमेश्वर को कुछ दे सकते हो। तुम्हारा सबसे अच्छा गाना दे सकते हो। तुम्हारी सबसे प्यारी प्रार्थना दे सकते हो। तुम अपना खिलौना किसी दोस्त को दे सकते हो। परमेश्वर को सबसे ज्यादा तुम्हारा दिल चाहिए। वे तुम्हारी छोटी भेंट को भी बहुत प्यार करते हैं।

बात करते हैं

अगर तुम परमेश्वर को एक उपहार देते, वह क्या होता? तुम्हें कैसा लगता है जब तुम किसी को अच्छी चीज़ देते हो?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें प्यार करते हैं। हम आपको अपना दिल देना चाहते हैं। यीशु को हमारे लिए भेजने के लिए धन्यवाद। आमीन।

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लैव्यव्यवस्था 1 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लैव्यव्यवस्था 1 किस विषय में है?
एक बड़ा तम्बू था। उसका नाम था मिलापवाला तम्बू। वहाँ परमेश्वर रहते थे। तम्बू के भीतर सब शांत था। एक दिन परमेश्वर ने मूसा को बुलाया। मूसा तुरन्त दौड़कर आया। परमेश्वर ने धीरे से कहा, "सुनो, मूसा।" "इस्राएल के लोगों से कहो," परमेश्वर बोले। "कोई मुझे भेंट देना चाहे तो सुनो।" "वह अपना सबसे अच्छा पशु लाए।" "गाय, या बैल, या भेड़, या बकरी।" "या फिर एक छोटा पक्षी भी ला सकता है।"
लैव्यव्यवस्था 1 क्या कहता है?
तब याजक आगे आते हैं। वे हारून के बेटे हैं। वे वेदी पर लकड़ी सजाते हैं। फिर वे आग जलाते हैं। लकड़ी चटकती है, आग भड़कती है। आग की गर्मी चेहरे पर लगती है।
लैव्यव्यवस्था 1 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
अगर किसी के पास भेड़ नहीं थी, कोई बात नहीं। वह एक छोटा पंडुक या कबूतर ला सकता था। परमेश्वर छोटी भेंट को भी उतना ही चाहते थे।
नन्हे बच्चे लैव्यव्यवस्था 1 से क्या सीख सकते हैं?
बहुत साल बाद, परमेश्वर ने कुछ और भेजा। इस बार पशु नहीं, बल्कि अपना बेटा भेजा। उनका नाम था यीशु। यीशु ने अपना जीवन दिया, हम सबके लिए। जैसे वह भेंट आग पर जलती थी, वैसे यीशु हमारे लिए अपने आप को दे दिया। एक बार, और वह हमेशा के लिए काफी था। अब हमें बार-बार पशु लाने की ज़रूरत नहीं। यीशु ने सब कुछ पूरा कर दिया।
लैव्यव्यवस्था 1 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम परमेश्वर को एक उपहार देते, वह क्या होता? तुम्हें कैसा लगता है जब तुम किसी को अच्छी चीज़ देते हो?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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