लूका 10
छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
समझाइए
एक आदमी यरूशलेम से यरीहो जा रहा था। रास्ता लंबा था। धूप तेज़ थी। तभी डाकू आए। उन्होंने उसे मारा। उसके कपड़े छीन लिए। फिर वे भाग गए। वह आदमी ज़मीन पर पड़ा था। बहुत दर्द में।
एक पुजारी वहाँ से निकला। उसने आदमी को देखा। पर वह रुका नहीं। वह दूसरी तरफ से चला गया।
फिर एक और आदमी आया। उसने भी देखा। वह भी नहीं रुका।
बेचारा आदमी अकेला पड़ा रहा। किसी ने उसकी मदद नहीं की।
फिर एक सामरी आया। वह दूर का था। लोग उसे पसंद नहीं करते थे। पर उसने आदमी को देखा। उसे उस पर तरस आया। बहुत तरस।
इसका क्या अर्थ है?
सामरी रुक गया। वह घुटनों के बल बैठा। उसने घावों पर तेल डाला। फिर दाखरस डाला। धीरे-धीरे पट्टी बाँधी। फिर उसने आदमी को अपने गधे पर बिठाया। उसे एक सराय में ले गया। वहाँ उसकी देखभाल की। अगले दिन उसने पैसे दिए। उसने कहा, "इसकी सेवा करना।"
यीशु ने यह कहानी सुनाई। फिर पूछा, "कौन असली पड़ोसी था?" जवाब आया, "जिसने तरस खाया।" यीशु ने कहा, "तुम भी ऐसा ही करो।"
इसके बाद यीशु एक गाँव में गए। वहाँ मार्था नाम की एक स्त्री रहती थी। उसने यीशु का स्वागत किया। उसकी बहन का नाम मरियम था। मरियम प्रभु के पाँवों के पास बैठ गई। वह उनकी बातें सुनती रही।
मार्था रसोई में व्यस्त थी। खाना बनाते-बनाते वह परेशान हो गई। उसने यीशु से कहा, "क्या आपको चिंता नहीं? मेरी बहन मुझे अकेला छोड़कर बैठी है।"
यीशु ने प्यार से कहा, "मार्था, तुम बहुत बातों की चिंता करती हो। पर एक बात ज़रूरी है। मरियम ने अच्छा भाग चुना है।"
सिलसिला
यीशु प्रभु थे। वे खुद बीमारों को ठीक करते थे। वे कहते थे, "परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुँचा है।" जब सामरी ने घायल आदमी पर तरस खाया, तो वह यीशु जैसा बना। यीशु भी हम पर तरस खाते हैं। वे हमारे घावों पर मरहम लगाना जानते हैं। और मरियम की तरह, हम भी उनके पास बैठ सकते हैं। उनकी बातें सुन सकते हैं। यह सबसे अच्छा भाग है।
तुम्हारे लिए
अगर तुम्हारा दोस्त गिर जाए, तो क्या करोगे? उसे देखोगे और चले जाओगे? या रुककर उसकी मदद करोगे? सामरी जैसा बनो। रुको। तरस खाओ। मदद करो।
और कभी-कभी बस बैठ जाओ। यीशु के पास। उनकी बात सुनो। जैसे मरियम बैठी थी।
बातचीत के लिए
अगर तुम रास्ते में किसी को गिरा हुआ देखो, तो तुम क्या करोगे?
तुम्हें क्या अच्छा लगता है, यीशु के बारे में बातें सुनना या खेलना? दोनों कब करोगे?
साथ में प्रार्थना
हे यीशु, हमें भी दूसरों पर तरस खाना सिखाइए। जब कोई गिर जाए, तो हमें रुकना सिखाइए। और हमें अपने पास बैठना भी सिखाइए, ताकि हम आपकी बातें सुन सकें। आमीन।
लूका 10 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
लूका 10 किस विषय में है?
लूका 10 क्या कहता है?
लूका 10 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे लूका 10 से क्या सीख सकते हैं?
लूका 10 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
शास्त्री ने परखने के लिए सवाल पूछा, और यीशु ने जवाब देने के बजाय पलटकर पूछा, "व्यवस्था में क्या लिखा है? तू कैसे पढ़ता है?" उसे नई जानकारी की ज़रूरत नहीं थी, वचन तो उसे याद था। कमी पढ़ने के ढंग में थी। आज भी सवाल यही है। तू बाइबल पढ़ता तो है, पर कैसे पढ़ता है? बहस जीतने के लिए, या जीने के लिए?
यीशु ने क्रम बताया: पहले चंगा करो, फिर कहो। "वहाँ के बीमारों को चंगा करो और उनसे कहो, 'परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ पहुँचा है।'" राज्य पहले छुआ गया, फिर सुनाया गया। आपके पड़ोसी के लिए वह राज्य उतना ही निकट है, जितना आप उसके दुःख के पास बैठने को तैयार हैं। शब्द बाद में भी मिल जाएँगे।
याजक और लेवी ने भी उसे देखा था। फर्क आँखों में नहीं, दिल में था। "परन्तु एक सामरी यात्री वहाँ आ निकला, और उसे देखकर तरस खाया।" उस सामरी को भी कहीं पहुँचना था, पर उसने अपनी यात्रा रोक दी। आज कौन सा घायल व्यक्ति तेरे रास्ते में पड़ा है, जिसे तू देख तो रहा है, पर रुक नहीं रहा?
व्यवस्थापक ने पूछा था, "मेरा पड़ोसी कौन है?" पर यीशु ने सवाल उलट दिया, "इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन हुआ?" ध्यान दे, वह पूछते हैं कौन पड़ोसी *बना*। पड़ोसी कोई श्रेणी नहीं, एक फैसला है। सड़क किनारे पड़े उस आदमी की सूची में तू है या नहीं, यह तेरे रुकने से तय होगा।
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