सभोपदेशक 4
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक आदमी था। वह बहुत उदास था।
उसने बहुत लोगों को रोते देखा। बुरे लोग उन्हें दुःख दे रहे थे। कोई भी उनके आँसू पोंछने नहीं आया।
वह आदमी सोचता रहा। वह अकेला बैठा था। उसके पास बहुत काम था। बहुत पैसा भी था। पर उसके पास कोई नहीं था। न बेटा, न भाई, कोई भी नहीं।
वह सोचता था, "मैं यह सब किसके लिए करता हूँ?"
उसका मन खाली था। बिल्कुल खाली।
इसका मतलब क्या है?
फिर उस आदमी को एक बात समझ आई।
उसने कहा, "एक से दो अच्छे हैं।" सुनो, अगर एक गिर जाए, तो दूसरा उसे उठाता है। अगर एक ठंडा हो, तो दूसरा उसे गर्म रखता है।
तुमने कभी रात में किसी का हाथ पकड़ा है? तब डर नहीं लगता, है ना?
उस आदमी ने एक और बात कही। एक डोरी अगर तीन तागों से बनी हो, वह जल्दी नहीं टूटती।
एक तागा कमज़ोर होता है। पर तीन तागे मिलकर बहुत मज़बूत बन जाते हैं।
बड़ी कहानी से इसका संबंध
परमेश्वर नहीं चाहते कि हम अकेले रहें।
इसलिए उन्होंने हमें परिवार दिया। दोस्त दिए। कलीसिया दी, यानी वे लोग जो प्रभु यीशु से प्यार करते हैं।
और सबसे बड़ी बात, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु मसीह को भेजा। यीशु ने कहा, "मैं तुम्हारे साथ रहूँगा।" वे कभी हमें अकेला नहीं छोड़ते।
जब हम गिरते हैं, यीशु हमें उठाते हैं। जब हम डरे होते हैं, वे हमारे पास होते हैं।
तीसरा तागा, वह परमेश्वर हैं। जब हम उनके साथ और एक-दूसरे के साथ जुड़े रहते हैं, हम कभी नहीं टूटते।
तुम्हारे लिए
तुम्हारे पास भी कोई है, है ना? माँ, पापा, भाई, बहन, दोस्त।
आज जब तुम गिरो, किसी का हाथ पकड़ना। और किसी को हाथ देना भी, जब वह गिरे।
और याद रखना, यीशु भी हमेशा तुम्हारे साथ हैं। वे तुम्हें कभी नहीं छोड़ते।
बात करें
तुम्हारे साथ कौन-कौन रहता है, जिनसे तुम प्यार करते हो?
जब तुम गिर जाते हो, कौन तुम्हें उठाता है?
साथ में प्रार्थना
प्रिय परमेश्वर,
धन्यवाद कि आप मुझे अकेला नहीं छोड़ते।
मुझे मेरे परिवार और दोस्तों के लिए धन्यवाद।
मुझे भी सिखाइए कि दूसरों का हाथ पकड़ूँ।
यीशु के नाम में, आमेन।
सभोपदेशक 4 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
सभोपदेशक 4 किस विषय में है?
सभोपदेशक 4 क्या कहता है?
सभोपदेशक 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे सभोपदेशक 4 से क्या सीख सकते हैं?
सभोपदेशक 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
चैन के साथ एक मुट्ठी उससे अच्छी है, जो दोनों मुट्ठी परिश्रम और व्यर्थ के कामों से भरी हों।" सुलैमान ने देखा कि लोग जलन के कारण दिन रात दौड़ते हैं। दोनों हाथ भरे हैं, पर मन खाली है। तेरी एक मुट्ठी कम लग सकती है, फिर भी उसमें नींद है, हँसी है, अपनों के साथ बैठने का समय है। सोच, तू किस चीज़ के पीछे दौड़ रहा है, और क्या खो रहा है?
फिर यदि दो एक साथ सोएँ तो वे गर्म होंगे, परन्तु कोई अकेला कैसे गर्म हो सकता है?" ठंडी रात में यात्री अपनी चादर बाँट लेते थे। ध्यान दो, यहाँ कोई किसी को गर्मी देता नहीं, दोनों एक दूसरे से गर्म होते हैं। तुम्हें सिर्फ किसी की मदद नहीं चाहिए, तुम्हें पास चाहिए। किससे तुमने अपनी ठंडी रात छिपा रखी है?
सुलैमान ने एक ऐसे आदमी को देखा जो अकेला था, न बेटा न भाई, फिर भी दिन रात कमाता रहा और कभी नहीं पूछा, "मैं किसके लिए परिश्रम करता हूँ?" उसी दुख के बीच से यह बात निकली, "एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है।" तेरी मेहनत किसके लिए है? अगर कोई साथ बैठकर तेरी थकान बाँटने वाला नहीं, तो कमाई कितनी भी हो, हाथ खाली ही रहेंगे।
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