3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

लूका 2

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

बाइबल कहानी: लूका 2

व्याख्या

रात बहुत ठंडी थी। बहुत अंधेरी भी। मरियम और यूसुफ चलते-चलते बैतलहम आए। वे बहुत थके थे। मरियम की गोद में एक छोटा बच्चा आने वाला था।

पर सराय में जगह नहीं थी। कहीं भी जगह नहीं थी। तो मरियम ने अपने बच्चे को एक चरनी में लिटाया। चरनी, जहाँ पशु खाना खाते हैं। उन्होंने उसे मुलायम कपड़े में लपेटा। छोटा यीशु वहाँ सो गया।

बाहर मैदान में कुछ गडेरिये थे। वे अपनी भेड़ों की रात में रखवाली कर रहे थे। सब शांत था। तभी अचानक आकाश चमक उठा। बहुत तेज उजाला। एक स्वर्गदूत उनके सामने खड़ा था। गडेरिये डर गए। बहुत डर गए।

स्वर्गदूत ने कहा, "मत डरो।" उसने कहा, "मैं तुम्हें बड़े आनन्द का समाचार सुनाता हूँ। आज बैतलहम में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है।" फिर आकाश में और भी स्वर्गदूत दिखाई दिए। बहुत सारे। वे सब गा रहे थे, "परमेश्वर की महिमा हो।"

इसका क्या अर्थ है?

गडेरिये दौड़े। बहुत जल्दी दौड़े। वे बैतलहम गए और वहाँ मरियम, यूसुफ और चरनी में लेटे बालक को देखा। ठीक वैसा ही, जैसा स्वर्गदूत ने कहा था। गडेरियों की आँखें चमक उठीं। उन्होंने सबको बताया, "हमने उसे देखा है।" मरियम यह सब अपने मन में रखती रही। वह सोचती रही।

एक ही कहानी की डोर

बरसों पहले शमौन नाम का एक बूढ़ा आदमी था। वह मंदिर में इंतज़ार करता रहता था। एक दिन मरियम और यूसुफ छोटे यीशु को मंदिर में लाए। शमौन ने उसे अपनी गोद में लिया। उसने कहा, "अब मेरी आँखों ने उद्धार को देख लिया है।" वह बरसों से इसी बच्चे का इंतज़ार कर रहा था। परमेश्वर ने अपना वचन पूरा किया।

यीशु बड़ा होता गया। एक बार, जब वह बारह वर्ष का था, वह मंदिर में रह गया। उसके माता-पिता उसे ढूँढ़ते रहे। तीन दिन बाद उन्होंने उसे मंदिर में पाया। वह वहाँ बैठा सुन रहा था और प्रश्न पूछ रहा था। सब लोग उसकी बुद्धि से चकित थे।

तुम्हारे लिए

तुम भी यीशु के बारे में सोच सकते हो, जैसे मरियम सोचती रही। तुम भी उसे ढूँढ़ सकते हो, जैसे गडेरियों ने ढूँढ़ा। वह एक छोटा बच्चा था, चरनी में लेटा हुआ। पर वह वही है, जिसे परमेश्वर ने भेजा।

बात करें

तुम्हें क्या लगता है, गडेरिये डरे क्यों थे?

चरनी में सोए बच्चे को देखने के लिए तुम कैसा महसूस करते?

साथ में प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने यीशु को भेजा। वह छोटा बच्चा था, चरनी में लेटा हुआ। हमें भी उसे प्यार करना सिखाइए। आमीन।

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लूका 2 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

लूका 2 किस विषय में है?
रात बहुत ठंडी थी। बहुत अंधेरी भी। मरियम और यूसुफ चलते-चलते बैतलहम आए। वे बहुत थके थे। मरियम की गोद में एक छोटा बच्चा आने वाला था।
लूका 2 क्या कहता है?
बाहर मैदान में कुछ गडेरिये थे। वे अपनी भेड़ों की रात में रखवाली कर रहे थे। सब शांत था। तभी अचानक आकाश चमक उठा। बहुत तेज उजाला। एक स्वर्गदूत उनके सामने खड़ा था। गडेरिये डर गए। बहुत डर गए।
लूका 2 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
गडेरिये दौड़े। बहुत जल्दी दौड़े। वे बैतलहम गए और वहाँ मरियम, यूसुफ और चरनी में लेटे बालक को देखा। ठीक वैसा ही, जैसा स्वर्गदूत ने कहा था। गडेरियों की आँखें चमक उठीं। उन्होंने सबको बताया, "हमने उसे देखा है।" मरियम यह सब अपने मन में रखती रही। वह सोचती रही।
नन्हे बच्चे लूका 2 से क्या सीख सकते हैं?
यीशु बड़ा होता गया। एक बार, जब वह बारह वर्ष का था, वह मंदिर में रह गया। उसके माता-पिता उसे ढूँढ़ते रहे। तीन दिन बाद उन्होंने उसे मंदिर में पाया। वह वहाँ बैठा सुन रहा था और प्रश्न पूछ रहा था। सब लोग उसकी बुद्धि से चकित थे।
लूका 2 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, धन्यवाद कि आपने यीशु को भेजा। वह छोटा बच्चा था, चरनी में लेटा हुआ। हमें भी उसे प्यार करना सिखाइए। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 25

शिमौन का नाम इतिहास में इसलिए नहीं आया कि उसने कुछ बड़ा किया, बल्कि इसलिए कि वह प्रतीक्षा करता रहा। "इस्राएल की शान्ति की प्रतीक्षा कर रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था।" वर्षों बीत गए, कुछ नहीं दिखा, फिर भी उसने आशा छोड़ी नहीं।

तेरी प्रतीक्षा भी लंबी हो गई है? पवित्र आत्मा उन्हें छोड़ता नहीं जो धीरज से ठहरे रहते हैं।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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