मीका 5
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
एक बहुत छोटा गाँव था। नाम था बैतलहम।
बहुत छोटा गाँव। छोटी-छोटी गलियाँ। छोटे-छोटे घर।
लोग कहते थे, "यह गाँव तो कुछ भी नहीं है।"
पर परमेश्वर ने कुछ और कहा। परमेश्वर ने कहा, "इस छोटे गाँव में से, एक बड़ा राजा आएगा।"
सुनो, कितनी अच्छी बात है!
परमेश्वर ने कहा, "यह राजा बहुत पहले से मेरे साथ है। बहुत, बहुत पहले से।"
इसका क्या अर्थ है?
यह राजा कैसा होगा? क्या वह डरावना होगा?
नहीं। परमेश्वर ने कहा, वह एक चरवाहे जैसा होगा।
चरवाहा भेड़ों से प्यार करता है। वह उन्हें खिलाता है। वह उन्हें बचाता है।
यह राजा भी ऐसा ही होगा। वह अपने लोगों की देखभाल करेगा। जैसे एक चरवाहा अपनी भेड़ों की करता है।
और जब यह राजा आएगा, तब लोग सुरक्षित रहेंगे। कोई डर नहीं होगा।
समान सूत्र
यह राजा कौन है?
यह यीशु हैं।
यीशु का जन्म भी बैतलहम में हुआ। उसी छोटे से गाँव में।
बिल्कुल वैसे ही जैसे परमेश्वर ने बहुत पहले कहा था।
परमेश्वर हमेशा अपनी बात रखते हैं। वे जो कहते हैं, वह होता है।
यीशु आए। और यीशु एक अच्छे चरवाहे की तरह हैं। वे अपने लोगों से प्यार करते हैं। वे उनकी रक्षा करते हैं।
तुम्हारे लिए
क्या तुम्हारे पास भी एक चरवाहा है?
हाँ! यीशु तुम्हारे चरवाहे हैं।
जब तुम डरते हो, यीशु तुम्हारे पास हैं।
जब तुम सोते हो, यीशु तुम्हारी रक्षा करते हैं।
छोटा होना ठीक है। बैतलहम भी छोटा था। पर परमेश्वर ने उसे चुना।
तुम भी छोटे हो। पर परमेश्वर तुम्हें भी प्यार करते हैं।
बात करें
क्या तुम्हें पता है चरवाहा क्या करता है?
यीशु तुम्हारी रक्षा कैसे करते हैं?
साथ में प्रार्थना करें
प्रिय परमेश्वर,
धन्यवाद कि आपने यीशु को भेजा।
धन्यवाद कि यीशु एक अच्छे चरवाहे हैं।
मुझे भी सुरक्षित रखिए, जैसे एक भेड़ को।
आमीन।
मीका 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
मीका 5 किस विषय में है?
मीका 5 क्या कहता है?
मीका 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे मीका 5 से क्या सीख सकते हैं?
मीका 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
बेतलेहेम की उस बड़ी भविष्यवाणी के ठीक बाद यह अजीब वचन आता है: "वह उनको उस समय तक त्यागे रहेगा, जब तक जच्चा न जने।" यानी वादा सुनने के बाद भी एक लंबी खामोशी बाकी थी। पर वह खामोशी मौत की नहीं, जन्म की पीड़ा थी। तेरी आज की प्रतीक्षा भी शायद ऐसी ही हो। परमेश्वर ने तुझे छोड़ा नहीं, वह कुछ जन्म दे रहा है।
याकूब के बचे हुए लोग" यानी वे जो हारकर, टूटकर बच गए थे। दुनिया की नज़र में बची-खुची राख। पर परमेश्वर उन्हीं को "भेड़-बकरियों के झुण्ड में जवान सिंह" कहता है। तेरी ताकत तेरी गिनती में नहीं, उसमें है जो तेरे साथ खड़ा है। आज जब तू खुद को बचा-खुचा सा महसूस करे, याद रख, परमेश्वर बचे हुओं में से ही सिंह गढ़ता है।
मैं तेरी अशेरा नामक मूर्तियों को तेरे बीच में से उखाड़ूँगा, और तेरे नगरों को नाश करूँगा।" अशेरा के खंभे गाड़े जाते थे, वे जड़ पकड़ लेते थे। परमेश्वर उन्हें बस गिराता नहीं, जड़ समेत उखाड़ता है। जो चीज़ तेरे जीवन के बीचोंबीच बैठ गई है, उसे निकलते समय दर्द ज़रूर होगा। पर यह क्रोध नहीं, सफ़ाई है। वह जगह खाली कर रहा है, अपने लिए।
तेरा हाथ तेरे द्रोहियों पर उठेगा, और तेरे सब शत्रु नाश होंगे।"
ध्यान दे, इसी अध्याय में परमेश्वर पहले उनके घोड़े, रथ और गढ़ नष्ट कर देता है। जीत का वादा तब आता है जब अपने हथियार छिन चुके हों। शायद आज तेरी वही कमज़ोरी, जिस पर तू शर्मिंदा है, वही जगह है जहाँ उसका हाथ उठेगा।
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