3 से 5 वर्ष के बच्चे के लिए

मत्ती 15

छोटे बच्चे और प्री स्कूल (3 से 5 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक स्त्री थी। वह बहुत दूर से आई थी।

उसकी एक छोटी बेटी थी। बेटी बहुत बीमार थी।

स्त्री यीशु के पास दौड़ी आई। वह ज़ोर से चिल्लाई, "प्रभु, मुझ पर दया करें!"

यीशु चुप रहे। बिल्कुल चुप।

चेलों ने कहा, "इसे भेज दीजिए।"

पर स्त्री नहीं रुकी। वह और पास आई। उसने घुटने टेके।

उसने फिर कहा, "प्रभु, मेरी सहायता करें।"

यीशु ने उसकी ओर देखा। उन्होंने कहा, "तेरा विश्वास बड़ा है।"

और ठीक उसी पल, दूर बैठी बेटी ठीक हो गई।

इसका क्या मतलब है?

स्त्री ने हार नहीं मानी। वह चिल्लाती रही। वह पास आती रही।

वह जानती थी, यीशु के पास जाने लायक कोई शक्ति उसमें नहीं थी। पर उसने फिर भी विश्वास किया।

और यीशु ने उसकी सुन ली।

इसके बाद यीशु एक पहाड़ पर गए। बहुत सारे लोग आए।

लँगड़े लोग, अंधे लोग, गूँगे लोग। सब यीशु के पास लाए गए।

यीशु ने सबको ठीक कर दिया। अंधे देखने लगे। गूँगे बोलने लगे। लँगड़े चलने लगे।

सब लोग चकित हो गए।

फिर शाम हुई। लोग तीन दिन से साथ थे। उनके पास खाने को कुछ नहीं था।

यीशु को उन पर तरस आया। उन्होंने पूछा, "तुम्हारे पास कितनी रोटियाँ हैं?"

चेलों ने कहा, "सात रोटियाँ, और थोड़ी सी मछलियाँ।"

यीशु ने रोटियाँ लीं। उन्होंने धन्यवाद दिया। उन्होंने रोटियाँ तोड़ीं।

और वह रोटी बढ़ती गई, बढ़ती गई। चार हज़ार लोगों ने खाया। सब तृप्त हो गए।

और फिर भी टुकड़े बचे। सात बड़ी टोकरियाँ भर गईं।

समान सूत्र

यीशु हर किसी की पुकार सुनते हैं, चाहे वह दूर का हो या पास का।

वह हमेशा बहुत देते हैं। सात रोटियों से हज़ारों पेट भर गए।

यही यीशु, जिन्होंने उस स्त्री की बेटी को ठीक किया। यही यीशु, जिन्होंने भूखे लोगों को खिलाया।

वे हर जगह, हर किसी की सुनते हैं। वे कभी थकते नहीं।

तुम्हारे लिए

जब तुम दुःखी हो, तुम भी यीशु को पुकार सकते हो। वह सुनते हैं।

जैसे उस स्त्री ने हार नहीं मानी, वैसे ही तुम भी पुकारते रहो।

और याद रखो, यीशु के पास हमेशा काफी है। तुम्हारे लिए भी।

बात करें

उस स्त्री ने यीशु को क्या कहा?

यीशु ने कितनी रोटियों से सबको खिलाया?

साथ में प्रार्थना

हे प्रभु यीशु,

वह स्त्री आपके पास आई, और आपने उसकी बेटी को ठीक किया।

मुझे भी सुनिए, जब मैं आपको पुकारूँ।

धन्यवाद, कि आपके पास मेरे लिए हमेशा काफी है।

आमीन।

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मत्ती 15 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मत्ती 15 किस विषय में है?
स्त्री यीशु के पास दौड़ी आई। वह ज़ोर से चिल्लाई, "प्रभु, मुझ पर दया करें!"
मत्ती 15 क्या कहता है?
वह जानती थी, यीशु के पास जाने लायक कोई शक्ति उसमें नहीं थी। पर उसने फिर भी विश्वास किया।
मत्ती 15 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
फिर शाम हुई। लोग तीन दिन से साथ थे। उनके पास खाने को कुछ नहीं था।
नन्हे बच्चे मत्ती 15 से क्या सीख सकते हैं?
और वह रोटी बढ़ती गई, बढ़ती गई। चार हज़ार लोगों ने खाया। सब तृप्त हो गए।
मत्ती 15 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
यही यीशु, जिन्होंने उस स्त्री की बेटी को ठीक किया। यही यीशु, जिन्होंने भूखे लोगों को खिलाया।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

चेलों ने यह नहीं पूछा कि यीशु ने जो कहा वह सही था या नहीं। उन्होंने बस इतना कहा, "क्या तू जानता है कि फरीसियों ने यह वचन सुनकर ठोकर खाई?" उनकी चिंता सच्चाई नहीं, लोगों की नाराज़गी थी। कई बार हम भी यही करते हैं। सवाल यह नहीं रह जाता कि परमेश्वर क्या कहता है, बल्कि यह कि लोग क्या सोचेंगे। आज तुम्हारे मन में किसका चेहरा बड़ा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

पर जो कुछ मुँह से निकलता है, वह मन से निकलता है, और वही मनुष्य को अशुद्ध करता है।" फरीसी हाथ धोने पर अटके थे, और यीशु ने मन की ओर उँगली उठाई। जो शब्द तुझसे गुस्से में निकल जाता है, वह अचानक नहीं आया, वह भीतर कहीं पल रहा था। इसलिए जीभ पर पहरा लगाने से पहले, अपने मन को परमेश्वर के सामने खोल दे।

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